धरना/प्रदर्शन/प्रतिरोध

बेतला में वन-पदाधिकारी का घेराव

झारखंड के लातेहार जिले के बेतला में गत 10 अक्टूबर 2018 को भाकपा(माले) प्रखंड कमिटी के बैनर तले बेतला वन विभाग के अधिकारियों का घेराव किया गया। स्थानीय आखड़ा मिडिल स्कूल के मैदान से भारी संख्या में लोगों का जुलूस ‘वन विभाग की मनमानी नहीं चलेगी!’, ‘जान-माल और फसल सुरक्षा की गारंटी करो!’, ‘जान माल और फसल बरबादी का उचित मुआवजा देना होगा!’, ‘भाजपा हटाओ देश बचाओ!’ आदि गगन भेदी नारे लगाते हुए बेतला की मुख्य सड़क से गुजरते हुए वन विभाग कार्यालय गेट पर पहुंचा. वहां मेन गेट को जाम कर जन-दबाव से ताला खुलवाया गया और वहीं रेंजर का घेराव किया गया.

‘नमक-मिर्च-रोटी धरना’ में हजारों डीटीसी कमर्चारियों ने भागीदारी की

डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर (ऐक्टू) द्वारा 22 अक्टूबर को डीटीसी मुख्यालय (आई.पी. डिपो) पर ‘नमक-मिर्च-रोटी धरना’ किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में डीटीसी कमर्चारियों ने भागीदारी की।

तमिलनाडु में ऐक्टू नेताओं का अनिश्चितकालीन अनशन

14 मई 2008 को ‘औद्योगिक रोजगार स्थायी आदेश अधिनियम’ में संशोधन कर इसे तमिलनाडु विधान सभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था. ‘सुमंगली योजना’, जहां प्रशिक्षुओं के द्वारा ही 100 प्रतिशत उत्पादन किया जाता है, के खिलाफ उठी आवाजों के प्रत्युत्तर में सरकार ने यह कदम उठाया था. इस अधिनियम की धारा 10 ‘ए’ में प्रशिक्षु, बदली, अस्थायी और आकस्मिक मजदूरों के नियोजन और पुनर्नियोजन के प्रावधान है ऋ जबकि धारा 10 ‘बी’ में किसी प्रतिष्ठान में स्थायी व अ-स्थायी श्रमिकों के प्रतिशत-निर्धारण की बात निहित है.

झारखंड में मिड-डे-मील कर्मियों का जुझारू संघर्ष जारी है

झारखण्ड के मिड-डे-मील कर्मियों के राज्यव्यापी रसोइया-संयोजिका संघ ने अपनी 15-सूत्री मांगों को हासिल करने के लिये भाजपा-नीत रघुवर सरकार के खिलाफ आर पार की लड़ाई छेड़ दी है। उनकी मांगें हैं - बर्खास्त किए गए सभी रसोइया और संयोजिकाओं को काम पर वापस लो, तमिलनाडु की तर्ज पर झारखण्ड में भी रसोइया-संयोजिका को चतुर्थ वर्गीय सरकारी कर्मचारी के रूप में बहाल करो, सभी रसोइया-संयोजिका को न्यूनतम वेतन 18,000 रु.

एक्सप्रेसवे परियोजना को रद्द करने की मांग करते भाकपा(माले) नेताओं की गिरफ्तारी

तमिलनाडु में चेन्नई से सैलम तक बनाये जा रहे 8-लेन ग्रीन एक्सप्रेसवे परियोजना को रद्द करने की मांग पर भाकपा(माले) लगातार संघर्ष कर रही है. इसी क्रम में अगस्त की शुरूआत में कोयम्बटूर से सैलम की ओर मार्च कर रहे भाकपा(माले) के तमिलनाडु राज्य कमेटी सदस्य एवं कोयम्बटूर के जिला सचिव का. एसके बालसुब्रह्मण्यम, का. एनके नटराजन, दामोदरन, वेंकटाचलम और एआईसीसीटीयू के राज्य सचिव जयप्रकाश नारायणन समेत 31 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इस परियोजना में जंगलात का बड़े पैमाने पर विध्वंस होने जा रहा और किसानों से उनकी जमीन हड़पी जा रही है.

मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदले जाने के खिलाफ प्रतिवाद

निरंकुश तानाशाही का एक और नमूना दिखलाते हुए भाजपा सरकार ने सैकड़ों वर्ष पुराने ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंकशन रख दिया है. इस नाम परिवर्तन के समारोह में आने वाले भाजपा नेताओं में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं अन्य दर्जन भर नेता शामिल हैं. इनका विरोध करने के लिये कई संगठनों के कार्यकर्तागण एकत्रित हुए और उन्होंने भाजपा नेताओं को काले झंडे दिखलाये तथा प्रतिवाद प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम कर दिया.

रांची में भाकपा(माले) की आदिवासी अधिकार रैली

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर 9 अगस्त 2018 को भाकपा(माले) रांची नगर कमेटी ने ‘आदिवासी अधिकार रैली’ निकाली. रैली में जंगल जमीन की रक्षा के लिए पारम्परिक हथियारों से लैस आकर्षक झांकी भी निकाली गयी. भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल रद्द करने, 5वीं अनुसूची को सख्ती से लागू करने, आदिवासी अधिकारों पर हमले बंद करने के जोरदार नारों के साथ राज्य कार्यालय से रैली निकाली जो मेन रोड सर्जना चौक, शहीद चौक होकर अल्बर्ट एक्का चौक पहुंची, जहाँ सभा की गई. सभा को संबोधित करते हुए माले नेता जगरनाथ उरांव ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी अधिकारों की रक्षा का संकल्प दिवस है.

धोखेबाज मोदी सरकार के खिलाफ किसानों का राष्ट्रव्यापी ‘जेल भरो’ आन्दोलन

पिछले अंक में हमने 9 अगस्त को आयोजित देशव्यापी ‘जेल भरो’ अभियान की तत्काल मिली खबरें प्रकाशित की थीं. इस बार हम यहां बाद में मिली शेष खबरें दे रहे है.

आश्रय गृहों में हिंसा और यौन उत्पीड़न के विरोध में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर नीतीश-मोदी के इस्तीफे की मांग के साथ पूरे बिहार में कैंडल मार्च

बिहार के आश्रय गृहों - बालिका गृहों, अल्पावास गृहों, दत्तक केन्द्रों और सुधार गृहों में सरकारी धन की लूट, संवासिनों के साथ हिंसा और यौन उत्पीड़न के खुलासे का सिलसिला और इसके विरोध में जनता का आक्रोश दोनों ही थमने का नाम नहीं ले रहा है. ‘टिस’ की रिपोर्ट के जरिये मुजफ्फरपुर समेत राज्य के 15 आश्रय गृहों से इसकी शुरूआत हुई और बहुत ही तेजी से देश के हर राज्य में संचालित ऐसे हर ऐसे आश्रय गृह की यही कहानी सामने आने लगी. सीबीआई के जरिए जांच कराने और चंद मंत्रियों-अधिकारियों को हटाने या सजा देने से उस सच्चाई पर पर्दा नहीं डाला जा सकता कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे नरेन्द्र मोदी-नीतीश कुमार ही इसके लिए जिम्मेवार हैं. पटना के आसरा होम में दो संवासिनों की साजिशाना हत्या ने ऐसे लोगों को जो अब भी थोड़ा बहुत न्याय होने की उम्मीद रखते थे, आंदोलित कर दिया है. सफल बिहार बंद आयोजित करने के बाद बिहार के वामदलों ने इसी परिस्थिति में विगत 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राज्य के तमाम जिला मुख्यालयों पर कैंडल मार्च आयोजित करने का आह्वान किया था. यहां प्रस्तुत है उसकी एक संक्षिप्त रिपोर्ट जिससे यह पता चलता है कि यह कार्यक्रम गांव-कस्बों तक में लागू हुआ है और बिहार के लोग न्याय पाने की लड़ाई को और आगे तक ले जाने का संकल्प ले चुके हैं.