दस्तावेज

राष्ट्रीय परिस्थिति

आक्रामक फासीवादी एजेंडा

1.     भारत ने पिछले चार सालों में बड़े पैमाने का राजनीतिक बदलाव देखा है. भाजपा ने शासकवर्गों की वर्चस्वशाली प्रतिनिधि पार्टी के बतौर निर्णायक तौर पर कांग्रेस को पीछे धकेल दिया है. भारत के संसदीय इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि भाजपा ने न सिर्फ अपने बूते केंद्र में बहुमत हासिल किया है बल्कि अपने बल पर या अन्य दलों के साथ गठजोड़ बना कर वह कुछेक राज्यों को छोड़कर सभी राज्यों की शासक पार्टी बन कर भी उभरी है. त्रिपुरा में, जहां पिछले 25 साल से वामपंथ लगातार सत्ता में थी, अपनी हाल की जीत के साथ भाजपा की उत्तर-पूर्व में पकड़ मजबूत हुई है.

अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति

अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति

1.     वैश्विक आर्थिक संकट और नव-उदारवादी शासनों द्वारा इसे दूर करने के लिए किये गए उपायों (कारपोरेट के लिए राहत-पैकेज और आम लोगों के लिए जन-हितकारी मदों में कटौती) ने पिछले दशक में बेरोजगारी बढ़ाई है, काम और जीवन की स्थितियों को तबाह और अस्थिर किया है और असमानता को बढ़ाया है. वैश्विक गैर-बराबरी पर एक हालिया अध्ययन दिखाता है कि अमेरिका और भारत में आय का केन्द्रीकरण 1920 के दशक के स्तर तक पहुँच गया है.

जलवायु परिवर्तन पर प्रस्ताव

जलवायु परिवर्तन पर प्रस्ताव

1.     पिछले कुछ दशकों से जीवाश्म ईंध्न के उपयोग के कारण भारी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों के हो रहे उत्सर्जन के चलते जलवायु परिवर्तन एक स्थापित तथ्य बन चुका है. आज हम अपने चारों तरफ हो रहे जलवायु परिवर्तन के आसानी से पहचानने योग्य चिन्हों को स्पष्टतः देख पा रहे हैं.

सामान्य कार्यक्रम

प्रस्तावना

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्कसवादी-लेनिनवादी) अपने सर्वोच्च वर्ग-लक्ष्य की प्राप्ति के लिये संघर्षरत भारतीय सर्वहारा का सर्वोच्च राजनीतिक संगठन है. इसका गठन जनता के अगुआ दस्तों को लेकर हुआ है और यह लिंग, जाति, धर्म-संप्रदाय, भाषा या राष्ट्रीयता का भेद किये बिना स्वतंत्र नागरिक के रूप में भारतीय जनता के सामंती बेड़ियों और बड़ी पूंजी एवं साम्राज्यवाद की लूट और वर्चस्व से मुक्ति पाने तथा समान अधिकार और तीव्र प्रगति हासिल करने के संघर्ष में नेतृत्व-केंद्र का कार्य करती है.