बेगूसराय में जिला सचिव की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रतिवाद

बिहार में दलित-गरीबों के मान सम्मान व भूमि अधिकार के लिये भाकपा(माले) के नेतृत्व में चलाये जा रहे मेहनतकशों के संघर्ष से और साथ ही बिहार की धरती से ‘भाजपा भगाओ लोकतंत्र बचाओ’ के नारे पर वामपंथी-जनवादी शक्तियों की एकता के माले के आह्नान से बिहार सरकार बौखला गई है. इसलिये जगह-जगह जनांदोलनों का नेतृत्व कर रहे भाकपा(माले) के कार्यकर्ताओं पर केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा हमले किये जा रहे हैं. इसके जरिये वे गरीबों के मान-सम्मान, भूमि अधिकार व लोकतांत्रिक अधिकारों के लिये जारी संघर्षों को पीछे धकेल देने की कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में 4 अक्टूबर 2018 को आधी रात पुलिस ने बेगूसराय जिला के भाकपा(माले) जिला सचिव कामरेड दिवाकर को छह-छह फर्जी आरोपों में अभियुक्त बनाकर गिरफ्तार कर लिया.

गिरफ्तारी के पीछे मुख्य कारण यह बना कि भाकपा(माले) के नेतृत्व में बेगूसराय जिले के बलिया अनुमंडल के डंडारी प्रखंड के बांक गांव में सरकारी जमीन पर 500 भूमिहीन दलितों-अल्पसंख्यक व गरीब परिवारों को बसाया गया है. जमीन के पट्टे के लिये गरीब-भूमिहीनों का संघर्ष भाकपा(माले) के नेतृत्व में जारी है. स्थानीय भूमाफिया ने डीएसपी के साथ गठजोड़ कायम करके गरीब दलितों को उजाड़ देने की कोशिश थी. परंतु भाकपा माले के नेतृत्व में चलाये जा रहे गरीबों के संगठित प्रतिवाद के कारण जिला प्रशासन बैकफुट पर था. इन संघर्षों को पीछे धकेलने की कोशिश में सत्ता और भूमाफिया गठजोड़ द्वारा का. दिवाकर की गिरफ्तारी की साजिश रची गई है. इस साजिश में एक केंद्रीय मंत्री भी शामिल है. सरकार की इस दमनकारी कोशिश के खिलाफ भाकपा(माले) ने चौतरफा प्रतिवाद खड़ा करके जोरदार चुनौती पेश की है, जिसमें हजारों की तादाद में जिले के दलित भूमिहीन गरीबों व छात्रा नौजवानों की भागीदारी रही है. फलस्वरूप बांक गांव में दलितों गरीबों को उजाड़ने की सरकार व प्रशासन की कोशिशें अभी तक नाकाम रही हैं और बांक में 500 दलितों-गरीबों के घर अब भी बसे हुए हैं. भूमि आंदोलन को जिले में और अधिक धारदार बनाने की कई पहलकदमियां ली गई हैं.

प्रतिवाद के क्रम में गिरफ्तारी के दूसरे ही दिन 5 अक्टूबर को जेल भेजे जाने के समय जिला समाहर्ता के समक्ष भाकपा-माले के नेतृत्व में गरीब भूमिहीन व छात्रा नौजवानों ने का. दिवाकर की बिना शर्त रिहाई तथा गरीबों के बीच सरकारी जमीन का वितरण करने तथा फर्जी मुकदमे के दोषी डीएसपी पर कार्रवाई की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन व प्रतिवाद मार्च आयोजित किया, जिसका नेतृत्व का. नवल किशोर, बैजू सिंह, चंद्रदेव वर्मा, आइसा नेता वतन कुमार आदि ने किया.

6 अक्टूबर को भाकपा-माले, आइसा एवं इनौस ने बलिया बाजार में प्रतिवाद मार्च निकालकर बलिया अनुमंडल के डीएसपी का पुतला दहन किया. कार्यक्रम का नेतृत्व का. नूर आलम, इंद्रदेव राम, आइसा नेता वतन कुमार, इनौस के मोब्बसिर अहमद ने किया. पुनः 7 अक्टूबर को भाकपा(माले) नगर कमेटी सचिव राजेश श्रीवास्तव, वतन कुमार, जीशान अली के नेतृत्व में प्रतिवाद मार्च आयोजित हुआ. फिर 9 अक्टूबर को भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता का. शिवसागर शर्मा के नेतृत्व में का. दिवाकर प्रसाद को रिहा करने, झूठे मुकदमों की वापसी, बलिया डीएसपी पर कार्रवाई करने तथा सरकारी जमीन को दलित-गरीब भूमिहीनों के बीच वितरण करने की मांग को लेकर हजारों दलितों गरीब मजदूरों छात्रा नौजवानों की एक बड़ी आम सभा की गई और बलिया एसडीओ का घेराव किया गया. इस कार्यक्रम में भाकपा माले नेता बैजू सिंह, चंद्रदेव वर्मा, नूर आलम, रंगकर्मी दीपक सिन्हा, आइसा के वतन कुमार, जीशान अली तथा आंदोलन के समर्थन में उतरे सीपीएम नेता विद्यानंद यादव, जयप्रकाश यादव, सीपीआई नेता सनोज सरोज भी शामिल हुये. फिर 12 अक्टूबर को भाकपा-माले ने का. दिवाकर प्रसाद व परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करने तथा जमींदार के साथ मिलीभगत से फर्जी मुकदमा लगाकर प्रताड़ित करने के खिलाफ बलिया डीएसपी पर मुकदमा दर्ज कराया.

अगले दिन 13 अक्टूबर को आयोजित प्रेस वार्ता में भाकपा(माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य व पूर्व विधायक का. राजाराम सिंह ने गरीबों के मान सम्मान व भूमि अधिकार के संघर्ष को और अधिक तेज करने का आह्नान करते हुये 28 अक्टूबर को भूमि अधिकार रैली के आयोजन की घोषणा की. उन्होंने कहा कि बेगूसराय वामपंथी आंदोलन का केंद्र रहा है. भाकपा(माले) का. दिवाकर प्रसाद के साथ किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार व अपमान को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि एक तरफ पूरे बिहार में महिलाओं, गरीबों व आम आदमियों पर हो रहे हमले व आपराधिक कार्रवाईयों में शामिल सामंती अपराधियों को खुली छूट दे दी गई है, अपराध रोके नहीं रुक रहे और दूसरी ओर सामंती ताकतों व सत्ता की सांठगांठ के दबाव में जनांदोलनों के नेताओं को पुलिस गिरफ्तार कर रही है. उन्होंने का. दिवाकर पर लगाये गये फर्जी मुकदमे वापस लेकर उन्हें बरी करने तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ अपमानजनक व्यवहार करने वाले डीएसपी को बर्खास्त करने की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार को बेनामी, भूदान, सीलिंग से अतिरिक्त जमीन गरीबों में बांटना होगा. यह लड़ाई हक की लड़ाई है, यह रुकने वाली नहीं है. जनांदोलनों के दमन व दिवाकर की गिरफ्तारी के खिलाफ 28 अक्टूबर को बेगूसराय में जिलास्तरीय रैली आयोजित होगी जिसमें मुख्य वक्ता भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य होंगे.

वर्ष27
अंक44