बेतला में वन-पदाधिकारी का घेराव

झारखंड के लातेहार जिले के बेतला में गत 10 अक्टूबर 2018 को भाकपा(माले) प्रखंड कमिटी के बैनर तले बेतला वन विभाग के अधिकारियों का घेराव किया गया। स्थानीय आखड़ा मिडिल स्कूल के मैदान से भारी संख्या में लोगों का जुलूस ‘वन विभाग की मनमानी नहीं चलेगी!’, ‘जान-माल और फसल सुरक्षा की गारंटी करो!’, ‘जान माल और फसल बरबादी का उचित मुआवजा देना होगा!’, ‘भाजपा हटाओ देश बचाओ!’ आदि गगन भेदी नारे लगाते हुए बेतला की मुख्य सड़क से गुजरते हुए वन विभाग कार्यालय गेट पर पहुंचा. वहां मेन गेट को जाम कर जन-दबाव से ताला खुलवाया गया और वहीं रेंजर का घेराव किया गया. जुलूस का नेतृत्व माले के लातेहार जिला सचिव बिरजू राम व बेतला प्रखंड सचिव राजेन्द्र सिंह ने किया. सभा की अध्यक्षता कन्हाई सिंह और संचालन राजेन्द्र सिंह ने किया।

वन विभाग घेराव के मद्देनजर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था, लेकिन जनता के जुझारू तेवर के सामने वह मूक दर्शक बना रहा। घेराव में शामिल आंदोलनकारियों को सम्बोधित करते हुए भाकपा(माले) राज्य सचिव का. जनार्दन प्रसाद ने कहा कि आज भाजपा और उनके मुखिया लूट और झूठ के प्रतीक बने हुए हैं। जो मोदी मंहगाई की मार का हवाला देकर सत्ता में आये, उसी मोदी राज में मंहगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी। पूरे देश की जनता की एक ही पुकार है ‘राफेल चोर मोदी गद्दी छोड़’। आज मोदी राज देश के लिये हादसा है। बहुत शर्म की बात है कि सरकार वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन किसानों की फसल के बचाव के लिये इनके पास पैसे नहीं हैं। इसलिए वन विभाग और किसान विरोधी भाजपा सरकार के खिलाफ जनता को मजबूत लड़ाई लड़ना होगा।

जिला सचिव बिरजू राम ने कहा कि गरीबों की मुक्ति का रास्ता भाकपा(माले) है। आज से पांच वर्ष पहले माले के नेतृत्व में चले जुझारू किसान आंदोलन की बदौलत समय पर फसल सुरक्षा के लिये समय पर किरासन तेल, बम-पटाका, टार्च और फसल सुरक्षा हेतु गांव-गांव में आठ-आठ आदमी लेकर शिविर का निर्माण किया जाता था। लेकिन आज वन विभाग किसानों को ठेंगा दिखा रहा है। इसलिए फिर एक बार आरपार की लड़ाई के लिये तैयार रहना होगा।

सभा को पलामू के जिला सचिव आर एन सिंह के अलावा स्थानीय कमलेश सिंह, मंजू देवी, धनेश्वर सिंह, बजरंगी कुमार सहित दर्जनों नेताओं ने सभा को सम्बोधित किया। अंत में सभा स्थल पर वन क्षेत्र पदाधिकारी (रेंजर) को बुलाकर मुख्य वन संरक्षक के नाम जान-माल, फसल सुरक्षा एवं उचित मुआवजा, गरीबों पर से केस हटाने, वन विभाग में मशीन की जगह आदमी से काम कराने से लेकर गार्ड को समय पर वेतन की भुगतान करने तथा उनकी वेतन कम से कम 20,000 रु. करने सहित 12-सूत्री मांगपत्र दिया गया और हर मांग पर रेंजर से स्पष्टीकरण लिया गया। इस बीच जनता के बीच रेंजर को लगभग 2 घंटे खड़ा रहना पड़ा। रेंजर ने एक सप्ताह के अंदर मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। जनता ने घोषणा की कि मांगें पूरी नहीं होने पर वन विभाग का तमाम काम ठप कर दिया जायगा और किसी अधिकारी या सिपाही को वन में या गांव में नहीं घुसने दिया जायगा।

वर्ष27
अंक45