वर्ष - 29
अंक - 17
18-04-2020

अन्य राज्यों की भांति पश्चिम बंगाल में कोरोना का कहर जारी है और उससे संक्रमित मरीजों की तादाद दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है. मौजूदा समय में जो राष्ट्रव्यापी योजनाविहीन लाॅकआउट लागू कर दिया गया है, उससे दसियों लाख दिहाड़ी मजदूर, प्रवासी मजदूर, शहरी गरीब, झुग्गी-झोपड़ीवासी, ग्रामीण खेतिहर मजदूर, चाय बागानों/जूट मिलों/बंद कारखानों के मजदूर, आदिवासी और राज्य के हाशिये पर खड़े लोग अपनी आजीविका को मिली सर्वव्यापी चुनौती का सामना कर रहे हैं.

पश्चिम बंगाल के विभिन्न भागों में कामरेड लोग अत्यंत गरीब और बदहाली में पड़े समाज के कमजोर तबकों के बीच राहत के वितरण की व्यवस्था कर रहे हैं. केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा घोषित विभिन्न राहत पैकेज राशन को घर-घर पहुंचाने या मध्याह्न भोजन को सुनिश्चित करने में नाकाम रहे हैं और राशन की दुकानों के जरिये अनाज एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं के वितरण में काफी घालमेल है. हमारे कामरेडों को नदिया, उत्तर 24-परगना, कोलकाता इत्यादि जिलों से राशन की दुकानों में अनाज उपलब्ध न होने अथवा अपर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने तथा कालाबाजारी एवं गैरकानूनी जमाखोरी की अनगिनत शिकायतें प्राप्त हुई हैं. अपने जन संगठनों के साथ मिलकर पार्टी कामरेडों ने कई जिलों में क्षेत्रवार छोटे-छोटे स्वयंसेवक ग्रुप संगठित किये हैं जो राशन दुकानों से वितरण में पारदर्शिता पर कड़ी निगाह रखते हैं और वार्ड/प्रखंड/जिला स्तर पर प्रशासन के साथ सम्पर्क कायम रखते हैं, आवश्यक आपातकालीन राहत सेवाओं का इंतजाम करते हैं तथा कोरोना के सामुदायिक पैमाने पर संक्रमण को रोकने के लिये वैज्ञानिक जानकारी देने, सावधानी बरतने और स्वास्थ्य सम्बंधी निर्देश देने का काम करते हैं.

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समूचे राज्य में कामरेडों ने जनता कर्फ्यू के दिन (22 मार्च) अपने इलाकों में एकजुटता की शपथ लेने का अभियान चलाया जिसके दौरान उन्होंने निशुल्क जांच करने, सार्वजनिक स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा विकसित करने, सभी स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षात्मक उपकरण (पीपीई) मुहैया कराने, गुजारे भर आजीविका का मुआवजा देने, राशन का घर-घर वितरण करने, सभी को मध्याह्न भोजन, इत्यादि मांगें भी उठाईं. पश्चिम बंगाल के कामरेड राष्ट्रीय स्तर की ‘हेल्प लाॅकडाउन एफेक्टेड’ (लाॅकडाउन प्रभावित लोगों को सहायता) टीम के साथ तालमेल कायम करके विभिन्न जगहों में फंसे प्रवासी मजदूरों की भी मदद कर रहे हैं. इस संकट की घड़ी में लोगों का गुजर-बसर सुनिश्चित करने के लिये मुख्यमंत्री एवं कई सम्बंधित मंत्रियों के समक्ष विभिन्न डेपुटेशन एवं मांगपत्र दिये गये हैैं.

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हुगली

इस योजनाविहीन लाॅकआट के सबसे बुरे शिकार हुए हैं असंगठित क्षेत्र के मजदूर. उत्तरपाड़ा-रिसड़ा क्षेत्रा में हमारे स्वयंसेवकों ने स्थानीय निवासियों को किसी आपातकालीन स्थिति में मदद के लिये हेल्पलाइन नम्बर दे दिये हैं तथा किसी भी राहत कार्य के लिये, खासकर गरीब निर्माण मजदूरों एवं असंगठित क्षेत्र के अन्य मजदूरों की आवश्यकताएं पूरी करने के लिये राहत कार्य में स्वयंसेवक के बतौर भाग लेने के लिये स्थानीय नगर निगम को प्रस्ताव दिया है. सहृदय नागरिकों के सहयोग से उन्होंने उत्तरपाड़ा-कोटरंग नगर निगम के वार्ड नं2 में तथा कोन्नगर नगर निगम के वार्ड नं. 19 और 6 में 16 दिहाड़ी मजदूरों को राशन के थैले पहुंचाये.

ऐक्टू से सम्बद्ध पश्चिमबंग गृह ओ अन्यान्य निर्माण श्रमिक संगठन ने सैनिटाइजेशन (सफाई) कार्यक्रम आयोजित किये तथा बांदल क्षेत्र में स्थित नेताजी पार्क में निर्माण मजदूरों एवं टोटो चालकों के बीच साबुन एवं डिसइन्फैक्टेंट (संक्रमणरोधी दवाएं) वितरित कीं. राहत पैकेजों के लिये उनकी मांगों को जिलाधिकारी के समक्ष पेश किया गया.

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अ.भा. खेग्रामस और सारा बांग्ला आदिवासी अधिकार ओ विकास मंच ने हुगली जिले के बलागढ़ प्रखंड के कमालपुर, हरिसालपुर, बोराल, बक्सागढ़, सायरा, इलामपुर, इच्छापुर, द्यामोरग्राम, करिन्या, ब्यात्ना ग्रामों के गरीब खेत मजदूरों एवं आदिवासियों के 312 परिवारों को राहत देने के लिये अर्जियां बीडीओ ऑफिस में दी हैं. कामरेडों ने तालबना, कोनुईबांक और भंडारहाटी गांवों के छह परिवारों के लिये, जिनके पास जिंदा रहने का कोई उपाय नहीं बचा था, राशन थैलों का इंतजाम किया. 16 तंगहाल परिवारों को धनियाखाली थाने से राहत तभी मिली जब हमारे खेग्रामस, आइसा, इंनौस एवं आदिवासी विकास मंच के कामरेडों ने बीडीओ के पास जाकर राशन आपूर्ति की उनकी मांगों को उनके सामने पेश किया.

भाकपा(माले)और आइसा के कामरेड चंदननगर गोंडोलपाड़ा क्षेत्र में बंद जूट मिलों की मजदूर कालोनियों में छात्रों के लिये एक निशुल्क कोचिंग सेन्टर चला रहे हैं. इनमें अधिकांश नहीं के बराबर सामान्य आय वाले परिवार अत्यंत साधनहीन स्थिति में हैं. चंदननगर और बैद्यबाटी से हमारे कामरेडों ने स्थानीय नागकिों एवं शुभचिंतकों की मदद से इलाके के 50 परिवारों के बीच खाद्य-पदार्थ एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया.

हुगली जिले के बैंची में एक चावल मिल इस कठिन स्थिति का फायदा उठाकर काफी अधिक मूल्य पर चावल बेच रहा था. हमारे स्वयंसेवकों ने स्थानीय पंचायत और बीडीओ के सामने यह मुद्दा उठाया. सही समय पर हस्तक्षेप ने बीडीओ के दबाव पर चावल मिल को उचित मूल्य पर चावल बेचने को बाध्य कर दिया.

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हावड़ा

हमने विभिन्न राज्यों में फंसे हुए प्रवासी मजदूरों की दयनीय स्थिति को देखा है जो पैसे तथा अन्य संसाधनों से वंचित होकर अपने गांवों की ओर सैकड़ों मील पैदल चलने को बाध्य हुए हैं. 300 से अधिक प्रवासी मजदूर, जिनमें हमारे चंद कामरेड भी शामिल थे, महाराष्ट्र से आसाम की ओर ट्रेन से चल पड़े थे मगर लाॅकडाउन घोषित होने के कारण अचानक में ट्रेन कैंसिल होने के चलते 25 मार्च को बीच रास्ते में हावड़ा स्टेशन पर फंस गये. स्टेशन के अधिकारियों एवं प्रशासन ने उनको स्टेशन खाली कराने के लिये बाहर खदेड़ने की पूरी कोशिश की. केवल हमारे हस्तक्षेप और लगातार दबाव के बाद ही उन्हें स्टेशन पर रहने दिया गया और खाने की व्यवस्था हुई. प्रशासन के साथ कई स्तरों पर वार्ता तथा राज्य सरकार से समझौता होने के बाद अंततः प्रवासी मजदूरों को गुवाहाटी तक पहुंचाने के लिये तीन बसों की व्यवस्था की गई.

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रामराजातला-जगाछा क्षेत्र में आम जनता की मदद से ऐक्टू के निर्माण मजदूर साथियों ने जागरूकता अभियान चलाया और अत्यधिक जरूरतमंद एवं असुरक्षित परिवारों के बीच आवश्यक खाद्य पदार्थों का वितरण किया.

बाली-बेलूर इलाके में आइसा और भाकपा(माले) की स्वयंसेवक टीमों ने शारीरिक दूरी बरकरार रखते हुए सामाजिक एकजुटता का इजहार किया. आवश्यक खाद्य-पदार्थों के पैकेट बनाये गये और इलाके के वंचित परिवारों के बीच वितरित किये गये. साथ ही महामारी को रोकने के लिये जागरूकता अभियान भी चलाया गया.

उत्तर 24 परगना

यहां जूट मिल और ईंट भट्ठे के मजदूरों की कालोनियों में अस्वास्थ्यकर स्थितियां मौजूद हैं. कोरोा महामारी को रोकने के लिये व्यक्तिगत स्वास्थ्य रक्षा के लिये आवश्यक वस्तुओं जैसे साबुन, साफ पानी आदि बहुत जरूरी है. ऐक्टू ने जूट एवं भट्ठा मिल मालिकों के समक्ष ये मुद्दे उठाये ताकि यहां लोगों का जुटान रोका जाय, मजदूरों को समय पर मजदूरी और राशन दिया जाए तथा मजदूर कालोनियों में साफ-सफाई की व्यवस्था की जाये.

पार्टी प्रभारी ने राशन के सामान के उचित वितरण को सुनिश्चित करने के लिये, जिसकी घोषणा राज्य सरकार के राहत कार्यक्रमों में की है, अशोक नगर के थाना प्रभारी से मुलाकात की, ताकि कालाबाजारी को तथा खाद्यान्न की अवैध जमाखोरी को पूरी तरह से रोका जाये और प्रखंड की 76 राशन दुकानों से राशन वितरण के दौरान भीड़ या अव्यवस्था को रोका जा सके. भाकपा(माले) ने स्थानीय दिहाड़ी मजदूरों के परिवारों को आवश्यक राशन किट का भी इंतजाम किया.

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नदिया

नदिया में राशन वितरण प्रणाली अभी तक पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न दिये जाने के लिहाज से ज्यादा पारदर्शी नहीं है. हमारे कामरेडों ने जब देखा कि गच्छा की एक राशन दुकान से सिर्फ 2 किलो चावल और मुड़ागाछा की एक राशन दुकान में आटे के दो पैकेटों (850 ग्राम) के साथ 2 किलो चावल दिया जा रहा है, जबकि घोषित मात्रा 5 किलो है, तो उन्होंने आपत्ति उठाई.

ऐक्टू कामरेडों ने कृष्णनगर में असंगठित मजदूरों के बीच राहत अभियान संगठित किये और एक मुहल्ले के 27 गरीब परिवारों की एक सूची बनाकर स्थानीय पुलिस थाने में उन्हें राशन दिलाने की अपील की. हमारी पहलकदमी पर दूसरे ही दिन पुलिस अधिकारियों ने उन लोगों के घर तक राशन पहुंचाया.

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धुबुलिया स्थित पार्टी कार्यालय द्वारा भी राहत वितरण का काम चल रहा है, जहां गरीबों एवं दिहाड़ी मजदूरों को बुनियादी खाद्य वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.

कालियागंज प्रखंड के गोहरापोटा गांव में कामरेड अरशद ने अपनी विकलांग पेंशन से 2,000 रुपये का अनुदान दिया, जबकि यही उनके परिवार की आय का एकमात्र स्रोत है. उन्होंने 30 गरीब परिवारों के लिये राशन का इंतजाम कियाहताशा और दुख के इस माहौल में भी कामरेड अरशद जैसे साथी आशा की उज्ज्वल किरण हैं.

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कोलकाता

आइसा, इंनौस एवं कोलकाता नागरिक समन्वय के कामरेडों ने जादवपुर-ढाकुरिया अंचल में लाॅकडाउन के दौरान किसी आपातकालीन आवश्यकता से निपटने के लिये एक स्वयंसेवक टीम बनाई है. एक राहत अभियान चलाया गया जिसमें स्थानीय साइकिल रिक्शा चालकों के बीच स्थानीय पुलिस, पार्षदों और नागरिकों के साथ मिलकर राशन और आवश्यक सामग्री का वितरण किया गया. प्रवासी मजदूरों के लिये वार्ड ऑफिसों द्वारा जो राहत अभियान चलाया जा रहा है उसके उचित एवं समान वितरण को सुनिश्चित करने के लिये निगरानी रखी जा रही है.

इसके अलावा, हमारे स्थानीय पार्टी कार्यालय द्वारा जरूरतमंद परिवारों के बीच 150 राशन किटों का वितरण किया जा चुका है. जादवपुर स्टेशन और बेहाला के कालीतला क्षेत्र की झुग्गी-झोपड़ियों में, जहां लोगों को मजबूरी में भीड़भाड़ और अस्वास्थ्यकर स्थितियों में रहना पड़ रहा है, हम लोगों ने जागरूकता अभियान चलाया और सैनिटाइजर का वितरण किया. बेहाला के 121 वार्ड में राशन किटों का वितरण किया गया.

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असंगठित क्षेत्र के अनगिनत मजदूर, जो लाॅकडाउन के दौरान अपना रोजगार खो बैठे हैं, उनके पास राज्य अथवा केन्द्र सरकार का अभी तक कोई राहत पैकेज नहीं पहुंचा है. मेटियाबुर्ज क्षेत्र के आइसा कामरेडों ने मेटियाबुर्ज और तारातला की झुग्गी-झोपड़ियों में 50 परिवारों के लिये खाद्य किट का इंतजाम किया.

बांशद्रोणी के भाकपा(माले) एवं ऐक्टू कामरेडों ने बिहार के 5 प्रवासी मजदूरों की मदद की जो लाॅकडाउन की वजह से रेनिया अंचल में फंस गये थे और और उनको कोई राशन नहीं मिला क्योंकि उनके पास राशन कार्ड नहीं थे. जब स्थानीय पार्षद और पुलिस ने उन्हें राशन देने से मना कर दिया तो हमारे कामरेडों ने राज्य के श्रम मंत्री से सम्पर्क कर उन्हें यह मामला बताया. हमारे स्थानीय पार्टी स्वयंसेवकों ने इन फंसे मजदूरों के लिये आवश्यक खाद्य सामग्री का इंतजाम किया.

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बांकुड़ा

योजनाविहीन लाॅकडाउन की वजह से ग्रामीण क्षेत्र में किसानों का भारी नुकसान हो रहा है. पर्याप्त संख्या में वाहनों के उपलब्ध न होने की वजह से फसल और सब्जियों को बाजार में ले जाना मंद पड़ गया है जिससे भारी बर्बादी हो रही है. ओन्दा प्रखंड के ओला-निकुंजपुर बाजार में किसानों को अपनी सब्जियां बहुत गिरे दामों पर बेचनी पड़ी क्योंकि वे वाहनों के अभाव में स्थानीय बाजार में उनको न बेच सके. मंत्री से बार बार अपील एवं वार्ता करने के बावजूद इसकी भरपाई करने के लिनये कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है. बिना राशन कार्ड वाले लोगों को राशन दुकानों से अनाज न मिलने के मुद्दे को भी उठाया गया क्योंकि प्रखंड कार्यालयों को भेजे गये उनके आवेदनों को खारिज कर दिया गया है.

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उत्तर बंगाल

राष्ट्रव्यापी लाॅकडाउन की घोषणा होने के बावजूद उत्तर बंगाल के 300 से अधिक चाय बागानों को खुला रखा गया क्योंकि राज्य सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया था. मुख्यमंत्री के समक्ष एक डेपुटेशन देकर ऐक्टू ने मांग पेश किया कि तमाम बड़े एवं छोटे चाय बागानों को तत्काल बंद किया जाए और तमाम स्थायी, ठेका एवं अस्थायी मजदूरों को वेतन-सहित छुट्टी दी जाये, तमाम चालू एवं बंद चाय बागानों के मजदूर परिवारों को राशन एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जाये.

इसके अलावा, सिलीगुड़ी में भाकपा(माले) के स्वयंसेवकों की टीम बीमार एवं वृद्ध लोगों को दवाइयों अथवा खाद्य जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति कर रही है.

पूर्व बर्धमान

बर्धमान जिले के कई मजदूर आजीविका के लिये केरल जाते हैं. खेग्रामस के जिला कमेटी सदस्य कामरेड इब्राहीम शेख उन 500 मजदूरों में से एक हैं जो लाॅकडाउन के दौरान केरल के विभिन्न अंचलों में फंस गये हैं. का. शेख इन फंसे मजदूरों के बीच राहत कार्य में समन्वय कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. बंगाल के विभिन्न जिलों में स्थिति इसी प्रकार गंभीर है. बारासत से अपने गांव सालार पैदल चलकर पहुंचने वाले ऐसे चार मजदूरों की मुलाकात फालेया में हुई जहां उन्होंने अपनी दास्तान सुनाई कि किस तरह लाॅकडाउन के दौर में उन्हें शोषण, दुव्र्यवहार और भुखमरी झेलनी पड़ी है.

मंतेश्वर प्रखंड के कुसुमग्राम में हमारे प्रयासों एवं समयोचित हस्तक्षेप ने बड़े थोक विक्रेताओं द्वारा किराना दुकानों में आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और चढ़े दामों पर बिक्री पर रोक लगाई है. पुलिस ने उस व्यक्ति को गिरफ्तार करके 200 बोरा चावल जब्त किया है.

मेडिकल टीम

भाकपा(माले) एवं फोरम फाॅर पीपुल्स हेल्थ की पहलकदमी पर डाक्टरों, नर्सों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की चौबीसों घंटे काम करने वाली एक मेडिकल टीम बनाई का गठन किया गया है जो कोरोना लाॅकडाउन के दौरान आपातकालीन स्वास्थ्य-सम्बंधी सवालों का जवाब व सलाह देने तथा मदद पहुंचाने का काम कर रही है.