29 मई को ऐपवा से संबद्ध स्वयं सहायता समूह संघर्ष समिति के आह्वान पर देश भर में इन समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं ने अपने गांवों और मुहल्लों में धरना दिया. ये कार्यक्रम बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, असम, कार्बी अंग्लौंग, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, ओडिशा, उत्तराखंड, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और अन्य कई राज्यों में संपन्न किए गए. इन महिलाओं की मांगें इस प्रकार थीं:
1. स्वयं सहायता समूह में शामिल महिलाओं का कर्ज माफ करो
2. माइक्रो फायनांस कंपनियों द्वारा दिए गए कर्जों का भुगतान सरकार करे
3. हर समूह को उसकी क्षमता के अनुसार या क्लस्टर बनाकर रोजगार का साधन उपलब्ध कराओ
4. एसएचजी (स्वयं सहायता समूह - सेल्पफ हेल्प ग्रुप) के उत्पादों की खरीद सुनिश्चित करो
5. स्वयं सहायता समूह को ब्याज रहित ऋण दो
6. जीविका कार्यकर्ताओं को न्यूनतम 15 हजार रुपया मासिक मानदेय दो

बिहार की राजधानी पटना में ऐपवा राज्य कार्यालय में ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी व राज्य अधयक्ष सरोज चौबे, चितकोहरा में राज्य सचिव शशि यादव, कुर्जी में अनिता सिन्हा, मीना देवी, किरण देवी, उषा देवी, नसरीन बानो, कंकड़बाग में अनुराधा आदि महिला नेताओं की अगुवाई में सैंकड़ों की संख्या में महिलाएं इस कार्यक्रम में शामिल हुईं.

ग्रामीण इलाकों में भी स्वंय सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी दिखलाई पड़ी. पटना जिले के धनरूआ, दुल्हिनबाजार, बाढ़, बिहटा आदि प्रखंडों के विभिन्न गांवों में महिलाओं ने 6-सूत्री मांगों पर प्रतिवाद किया.
भागलपुर जिले में भागलपुर शहर सहित नाथनगर, सबौर, जगदीशपुर, शाहकुण्ड आदि कई प्रखंडों के दर्जनों गांवों-मोहल्लों में ऐक्टू से जुड़ी व स्वयं सहायता समूह में शामिल सैकड़ों महिलाओं ने धरना दिया और पोस्टर-प्लेकार्ड के जरिए अपनी मांगों को बुलंद किया व सरकार विरोधी नारे लगाए.

ऐपवा के जिला अधयक्ष उषा शर्मा व स्मिता ने अपने आवास पर धरना देते हुए कहा यह अत्यंत शर्मनाक है कि इस भयंकर त्रासदी के दौर में भी सरकार सिर्फ बड़े औद्योगिक घरानों की तीमारदारी में लगी हुई है. सूक्ष्म कर्जों के जरिए अपने परिवार की माली स्थिति को पटरी पर लाने की जद्दोजहद करती स्वयं सहायता समूह में शामिल लाखों सदस्य महिलाओं को राहत पहुंचाने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया. जमीनी हकीकत की भयावहता से कोसों दूर सरकारें सिर्फ बड़ी-बड़ी डींगे हांक कर लोगों को गुमराह कर रही हैं.
इनके अलावा पूनम देवी, विनीता देवी, स्वयं सहायता समूह की सदस्य आरती देवी, सजनी देवी, संगीता देवी, छाठो देवी, केली देवी, मीरा देवी, पूजा भारती, काजल देवी, माला देवी, रेणु देवी, बिछो देवी, रुबी देवी, सुमा देवी, उषा देवी, गीता देवी, शीला देवी, रीता देवी आदि ने अलग-अलग स्थानों पर दिए गए धरने का नेतृत्व किया. इस धरना कार्यक्रम के संचालन में ऐक्टू नेता मुकेश मुक्त, स्वयं सहायता समूह संघर्ष समिति (ऐपवा) की गुंजा चौधरी व असंगठित कामगार महासंघ (ऐक्टू) के स्थानीय नेता राजेश कुमार ने भरपूर सहयोग किया.

जमुई: चकाई प्रखंड के सगदनीडीह पार्टी कार्यालय के पास; बोंगी पंचायत के हिंडला गांव में; डढवा पंचायत के कोरिया व झौंसा गांव में तथा नौआडीह पंचायत के करुआपत्थर गांव में एपवा जुड़ी महिलाओं ने प्रदर्शन किया. सगदनीडीह पार्टी कार्यालय में एपवा नेत्री शान्ति देवी के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने प्रदर्शन किया; बोंगी पंचायत के हिंडला गांव में एपवा की प्रखंड संयोजक सुनीता हांसदा के नेतृत्व में दर्जनों की संख्या में महिलाओं ने मांगों से संबंधित प्लेकार्ड लेकर प्रदर्शन किया; नौआडीह पंचायत के करुआपत्थर में मालती देवी एवं बिजली देवी के नेतृत्व में दर्जनों महिलाओं ने प्रदर्शन किया; डढवा पंचायत के झौंसा गांव में एपवा नेत्री नानो देवी ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया. इनके अलावा प्रदर्शनों में सविता देवी, सरिता देवी, उर्मिला देवी, पार्वती देवी, मंगरी देवी, किरण देवी, समावती देवी, मुन्ना देवी, रेशमी देवी, रिनकु देवी, आशा देवी, सुनीता देवी, मुंदेशवरी देवी प्रमुख रूप से शामिल थीं.

पूर्वी चम्पारण में छौड़ादानो अंचल के नारायण चौक, पकड़िया, चैनपुर, बेला, मुड़ली, दरपा, बथुअहिया तथा बनकटवा अंचल के गोलापकड़िया सहित अनेकों गांवों में स्वयं सहायता समूह में शामिल महिलाओं ने धरना दिया.
सिवान में नौतन, अगौता, दरौली, आंदर, गोरिया कोठी व मैरवा के कई पंचायतों में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने धरना दिया. इस धरना कार्यक्रम का नेतृत्व मुख्यतः जिला पार्षद सोहिला गुप्ता, संजू देवी, मुखिया सभापति देवी, शिवरातो देवी, उषा देवी, मालती राम, मंजीता कैल और गीता देवी कर रही थीं.
मुजफ्फरपुर में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और ऐपवा कार्यकर्ताओं ने शहर से गांव तक धरना-प्रदर्शन किया और अपनी मांगें उठाईं. वभिन्न जगहों में आयोजित धरने में ऐपवा जिला अध्यक्ष शारदा देवी, प्रो.भवानी, रानी दास, ऐपवा सह सचिव निर्मला सिंह, जिला सचिव शर्मिला देवी, सह सचिव चन्द्रकला देवी, प्रो. मीरा ठाकुर सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया.

मुशहरी के रजवाड़ा, मणिका, छपरा मेघ, धीरनपट्टी, शेखपुर सहित कई गांव-टोले में धरना दिया गया. बोचहां प्रखंड के आदिगोपालपुर, तुर्की-भुताने, पटियासा, रोसी-बल्थी, शर्फुद्दीनपुर सहित कई जगहों पर ऐपवा व समूह की महिलाओं ने पोस्टर के साथ धरना दिया. कुढ़नी, बंदरा, मीनापुर, साहेबगंज, औराई, गायघाट व अन्य प्रखंडों में भी दर्जनों गांव-पंचायतों में ऐपवा कार्यकर्ता व स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने धरना दिया.

इस अवसर पर ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि आज पूरे देश में स्वंय सहायता समूह की महिलएं अपनी जायज मांगों पर विरोध-प्रदर्शन कर रही हैं. ऐपवा का उन्हें हर दृष्टिकोण से समर्थन है. केन्द्र सरकार के 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा में स्वयं सहायता समूह के लिए कुछ नहीं है. सरकार की घोषणा में बस इतना है कि एक साल तक उन्हें लोन की किस्त जमा करने से छूट मिलेगी. कर्ज माफ नहीं होगा, बल्कि उन्हें कर्ज जमा करने के समय में छूट दी गई है. जबकि सच्चाई यह है कि एक साल के बाद भी लोन चुकता करना उनके लिए संभव नहीं होगा. दूसरी तरफ स्वयं सहायता समूह चलाने वाली प्राइवेट कंपनियां अभी भी लोन का किस्त जबरन वसूल रही हैं. सरकार बड़े पूंजीपतियों के कर्जे लगातार माफ करती जा रही है, जबकि जरूरत है कि उनसे कर्ज वसूल किया जाए और गरीब महिलाओं को राहत दी जाए.

प्राइवेट कंपनियां पैसा वसूलने में लगी हैं. हमारी मांग है कि यह पैसा सरकार भुगतान करे. ज्यादातार ग्रुपों को कोई काम नहीं है अथवा महिलाएं जो सामान बनाती हैं उसका कोई बाजार नहीं है. लोन भारी इंटरेस्ट पर दिया जाता है. हर समूह को उसकी क्षमता के अनुसार या क्लस्टर बनाकर रोजगार का साधन उपलब्ध कराने की जरूरत है. उनके उत्पादों की खरीद सुनिश्चित होनी चाहिए और स्वयं सहायता समूह को ब्याज रहित ऋण देना होगा.

ऐपवा की राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे ने कहा कि बिहार सरकार ने हरेक परिवार को 4 मास्क देने का फैसला किया है. इसके निर्माण का काम स्वयं सहायता समूह को देने की घोषणा की गई थी. लेकिन वास्तविकता यह है कि सभी समूहों को यह काम दिया ही नहीं गया. अगर कहीं दिया भी गया तो उनसे मास्क खरीदा नहीं जा रहा है. अगर इस फैसले को गंभीरता से लागू किया जाता तो समूह को एक बड़ी आर्थिक सहायता हो सकती थी. इसे लागू करने की बजाय रोजगार की सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं. राज्य सचिव शशि यादव ने चितकोहरा में महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड के खिलाफ जीविका दीदियां जंग के मैदान में हैं, लेकिन सरकार उन्हें इस जोखिम भरे काम के एवज में क्या देती है ?

हमारी मांग है कि न्यूनतम 15 हजार रुपया सबको दिया जाए. हम सभी जानते हैं कि अन्य तमाम श्रमिक वर्ग की तरह ही लाॅकडाउन के कारण इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी बुरी तरह बिगड़ गई है. इसलिए सरकार भ्रम फैलाने की बजाय ठोस उपाय करे.

असम: माइक्रोफाइनांस कंपनियों के शोषण के खिलाफ ग्यारह संगठनों को लेकर बनी ‘संग्रामी मंच’ के ऐलान पर इस दिन असम-व्यापी ‘मांग दिवस’ मनाया गया. यह कार्यक्रम डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, नगांव, गोवालपारा, होजाई, मरिगांव, जोरहाट, गोलाघाट, चराइदेउ आदि जिलों में लागू किया गया.
इस मंच के मुख्य संयोजक अरूप कुमार मोहंतो ने एक प्रेस वार्ता के जरिए कहा कि लाॅकडाउन के चलते महिलाओं की आर्थिक स्थिति इतनी चरमरा गई है कि आनेवाले दिनों में कर्ज चुकाना उनके लिए असंभव है. इधर सरकार द्वारा कर्ज की किश्त चुकाने के मामले में छूट दिए जाने के बाद भी ये कम्पनियां कर्ज के किश्त जबरन वसूल रही हैं. मालेगाम समिति द्वारा प्रस्तावित ब्याज दर की सीमा को भी हटाया गया है. ब्याज दर ज्यादा व मनमाना है, कर्जपत्र मातृभाषा में लिखा नहीं जाता और जीवन बीमा के कागजात भी कम्पनियों के कब्जे में गैरकानूनी तरीके से रखे जाते हैं और ब्याज चुकाने की मामले में भी कोई पारदर्शिता नहीं अपनाई जाती है.

इसीलिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए असम के सारे प्रखण्डों को इंटेन्सिव ब्लाॅक का दर्जा देकर इन प्राइवेट कंपनियों के स्वयंसमूहों को एनआरएलएम के तहत संगठित कर 10 लाख रुपए की ग्रांट राशि देनी चाहिए.
विभिन्न राज्यों में हुए इन कार्यक्रमों में मुख्य रूप से ऐपवा महासचिव मीना तिवारी, अध्यक्ष रति राव, राष्ट्रीय सचिव कविता कृष्णन, सुधा चौधरी, सरोज चौबे, शशि यादव, गीता मंडल, आर. नागमणि, प्रतिमा इंघिपी, कृष्णा अधिकारी, कुसुम वर्मा, जसबीर नत्थ, इंद्राणी दत्ता, चैताली सेन, मीना सिंह, आरती राय, गीता पांडे, अनिता सिन्हा, सोहिला गुप्ता, इंदु सिंह, सावित्री देवी, मृणाली देवी, परी बरुआ, जयंती चौधरी, शोभा देवी, नीता बेदिया, जूही आलम, फरहत बानो तथा ऐपवा की अन्य स्थानीय नेता शामिल हुईं.