वर्ष - 28
अंक - 43
05-10-2019

भाकपा(माले) की केन्द्रीय कमेटी के आह्वान पर 3 अक्टूबर 2019 को समूचे देश के सभी राज्यों में ‘कश्मीर एकजुटता दिवस’ दिवस मनाया गया. 5 अगस्त को धारा 370 और 35-ए के खारिज किये जाने के बाद से शुरू हुई कश्मीर की नाकेबंदी के पूरे 60 दिन बीत चुके हैं. कश्मीरी जनता को पूर्ण लोकतांत्रिक अधिकारों की वापसी और वहां स्वाभाविक स्थिति बहाल करने की मांग करते हुए राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद एवं एकजुटता कार्यक्रम आयोजित किये गये. इन प्रतिवादों के दौरान सरकार और खासकर केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति होने बारे में किये जा रहे सफेद झूठे दावों का पर्दाफाश किया गया और उनकी निंदा की गई.

कश्मीर में सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को जेल में बंद करके सरकार ने खुद ही इस बात की गारंटी कर दी है कि कश्मीर में कोई राजनीतिक प्रक्रिया नहीं चलेगी और आम कश्मीरियों पर सशस्त्र बलों के अत्याचार जारी रहेंगे. आधिकारिक तौर पर और अनाधिकृत रूप से वहां हजारों बच्चों को कैद कर लिया गया है, और उनके माता-पिता को बलपूर्वक लगातार उत्पीड़ित किये जाने के भय में जीने को विवश किया जा रहा है. कश्मीर एकजुटता दिवस पर प्रतिवाद में सरकार से मांग की गई कि लोगों को जेल भेजने तथा उन्हें यातनाएं देने पर अविलम्ब रोक लगाई जाय और तमाम राजनीतिक नेताओं को नजरबंदी से आजाद किया जाये तथा जेल में भेजे गये या अन्य स्थानों पर रखे गये सभी नागरिकों को भी रिहा किया जाय.

इन प्रतिवादों में लैंडलाइन फोन, मोबाइल एवं इंटरनेट सेवा तथा संचार के अन्य साधनों को पूर्ण रूप से बहाल करने, दवाओं की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति करने और कश्मीर के सभी हिस्सों में अस्पतालों को समुचित रूप से चलाने तथा उन तक लोगों की पहुंच को सुनिश्चित करने की मांगें खास तौर पर उठाई गईं.

ori

 

ap

 

‘कश्मीर को कैद से आजाद करो’, ‘मोदी-शाह झूठ बोलना बंद करो, समूची दुनिया देख रही है’, ‘कश्मीरी जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को बुलंद करो’, ‘कश्मीर में स्वाभाविक स्थिति वापस लाओ’ आदि नारों के साथ देश के सैकड़ों शहरों और जिला मुख्यालयों में प्रतिवाद जुलूस निकाले गये तथा साथ ही उपरोक्त मांगों पर भारत सरकार को स्मारपत्र सौंपे गये. भाकपा(माले) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में जंतर मंतर पर तथा विभिन्न राज्यों की राजधानियों – कोलकाता, बंगलौर, पटना, लखनऊ, रांची, चंडीगढ़ एवं अन्य – में प्रतिवाद जुलूस निकाले और धरना दिये. कई स्थानों पर सीपीआई, सीपीआई(एम) एवं अन्य वामपंथी पार्टियां भी इस प्रतिवाद में शामिल हुईं.

delhi

 

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दो महीने बीत गये हैं और सरकार अपने ही देश के एक राज्य के लोगों के साथ दुश्मनों जैसा बरताव कर रही है और उनको उनके लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों और यहां तक कि बुनियादी नागरिक सुविधाओं से भी वंचित कर रही है. उन्होंने कहा कि जनता अब धीरे धीरे आरएसएस-भाजपा द्वारा फैलाये जा रहे दुष्प्रचार और झूठ को समझ रही है और देख रही है कि उनका कश्मीर एजेंडा कितना बर्बर है, जो देश भर में साम्प्रदायिक विभाजन को भड़काने और तीखा करने के अलावा और कुछ नहीं है. प्रतिवाद के दौरान वक्ताओं ने सरकार द्वारा फैलाये जा रहे झूठे प्रचार का मुंहतोड़ जवाब देने की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि इस किस्म के अत्याचारों का निशाना अन्य राज्यों के लोगों को भी बनाया जा सकता है. प्रतिवादकारियों ने मीडिया की जबान पर ताला लगाने और खबरों को दबाने की भी कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि सरकार सभी राज्यों में भय का वातावरण पैदा करने की कोशिश कर रही है ताकि वह अपने पिठ्ठू कारपोरेटों के हित में अपनी जन-विरोधी नीतियों को बिना जन-प्रतिवाद के लागू कर सके.

बिहार में भीषण वर्षा के चलते बाढ़ का कहर झेलने के बावजूद कई जिलों में 3 अक्टूबर को कश्मीर एकजुटता दिवस मनाया गया. जहां पश्चिम चम्पारण के सिकटा में जुलूस निकाला गया वहीं दरभंगा में कश्मीर के साथ एकजुटता का इजहार करते हुए गोष्ठी हुई. मुजफ्फरपुर में भी कश्मीर एकजुटता दिवस मनाया गया. अन्य कई जिलों में इस दिन विभिन्न कार्यक्रम किये जाने की खबर है. इस दिन उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में ‘कश्मीर एकजुटता दिवस’ मनाया गया. राजधानी लखनऊ के परिवर्तन चौक पर माले कार्यकर्ताओं ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर मानव शृंखला बनाई और कश्मीर में जारी दमन का विरोध किया. कार्यकर्ताओं ने मौन रख कर और नारे लिखी तख्तियां हाथों में उठा कर मोदी सरकार की कश्मीर नीति का विरोध किया. ऐसी ही एक तख्ती पर लिखा था – बंदी कश्मीर को रिहा करो. यहां प्रतिवाद कार्यक्रम का नेतृत्व जिला पार्टी प्रभारी रमेश सिंह सेंगर व राज्य समिति सदस्य कामरेड मीना ने किया. अपनी मांगों के साथ राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से पार्टी की जिला इकाइयों द्वारा भेजे गए.

वाराणसी शहर में माले और इंसाफ मंच के बैनर तले जुलूस निकाल कर एकजुटता दिवस मनाया गया. गाजीपुर में पार्टी के केंद्रीय समिति सदस्य का. ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा तथा जिला सचिव का. रामप्यारे राम के नेतृत्व में तुलसी सागर लंका स्थित पार्टी जिला कार्यालय से जूलूस निकालकर कर सरयू पार्क में धरना दिया गया. आजमगढ़ में राज्य स्थाई समिति के सदस्य कामरेड ओमप्रकाश सिंह के नेतृत्व में अंबेडकर पार्क में हुए धरने में प्रमुख रूप से बसंत सिंह, विनोद सिंह, सुदर्शन, रामजीत प्रजापति, रामकृष्ण यादव, राममूर्ति चैहान व राजू राव शामिल थे. मिर्जापुर में पार्टी राज्य सचिव सुधाकर यादव के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय पर एक दिन का सामूहिक उपवास किया गया.

देवरिया जिले में मुंह पर काली पट्टी बांध कर कश्मीरी जनता के पक्ष में धरना देकर आवाज बुलंद की गई. जिला सचिव कामरेड श्रीराम कुशवाहा, ऐक्टू की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेमलता पांडे, राज्य कमेटी सदस्य रामकिशोर वर्मा, ऐक्टू जिला अध्यक्ष हंसनाथ यादव, ऐपवा नेता गीता पांडे, नीलम सिंह, पूनम यादव आदि धरने में शामिल थे.

up

 

इलाहाबाद में भाकपा(माले), सीपीआई, सीपीएम के नेतृत्व में बालसन चौराहे पर प्रर्दशन किया गया. प्रर्दशन में मुख्य रूप से भाकपा(माले) जिला प्रभारी डा. कमल उसरी, सीपीआई नगर मंत्री रामसागर, सीपीएम जिला सचिव अखिल विकल्प, इनौस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील मौर्य, आइसा के प्रदेश अध्यक्ष शैलेश पासवान, हाईकोर्ट एडवोकेट माता प्रसाद पाल, रणविजय सिंह आदि थे. सीतापुर में जिला सचिव अर्जुन लाल के नेतृत्व में धरना देकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया गया. धरने में प्रमुख रूप से गया प्रसाद, ऐपवा नेता सरोजिनी आदि शामिल थे. चंदौली और जालौन में इस मौके पर प्रतिवाद मार्च निकाल कर सभा आयोजित की गई. इसके अलावा मऊ, सोनभद्र, मथुरा, फैजाबाद, गोंडा समेत प्रदेश के अन्य जिलों में भी कार्यक्रम हुए.

झारखंड के रांची में कश्मीर को कैदखाने में तब्दील करने के खिलाफ गिरफ्तार हजारों बच्चों और विपक्षी नेताओं की रिहाई के लिए भाकपा(माले), माकपा ने आज कश्मीर की जनता के मांगों के साथ एकजुटता रैली निकाली. रैली माले कार्यालय से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचकर एकजुटता सभा की गई. एकजुटता सभा को संबोधित करते हुए माले राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद ने कहा कि 60 दिनों की लम्बी अवधि तक कर्फ्यु और दमन देश ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा रिकार्ड बन गया है, जो देश के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा घातक है. सभा को माले जिला सचिव भुवनेश्वर केवट और वरिष्ठ माले नेता बशीर अहमद ने सम्बोधित किया. मार्च में माकपा के सुखनाथ लोहरा, भवन सिंह, माले नेता अजबलाल सिंह, रामचरित्र शर्मा, एनामुल अंसारी, एलिसब्बा एक्का, आइती तिर्की आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे.

palamu

 

पलामू जिले के पांकी में पांकी मस्जिद चौक पर प्रतिरोध सभा का आयोजन किया. माले कार्यकर्ता अपने अपने हाथों में नारे लिखी तख्तियां लिए हुए थे जिसमें कश्मीरी बच्चों को जेलों से रिहा करो, कश्मीर में सामान्य स्थिति लागू करो जैसे नारे लिखे हुए थे. प्रतिरोध सभा को भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता का. आरएन सिंह, पांकी प्रखंड सचिव कमलेश प्रजापति आदि ने सम्बोधित किया. प्रतिरोध सभा की अध्यक्षता पार्टी जिला कमेटी सदस्य नर्वदेश्वर सिंह ने की. जिला मुख्यालय डालटनगंज में भाकपा(माले), दिहाड़ी मजदूर यूनियन, ग्राम स्वराज मजदूर संघ, नागरिक मंच, इप्टा, आइसा आदि संगठनों ने मिलकर कश्मीर में कश्मीर में लोकतंत्र बहाल करने आदि मांगों के साथ नगर के छहमुहान पर पोस्टर के साथ प्रदर्शन किया. इस मौके पर भाकपा(माले) के रविंद्र भुइयां, सरफराज आलम, मजदूर यूनियन के राजीव कुमार, संजीव ठाकुर, इप्टा के शैलेंद्र कुमार, आइसा से दिव्या भगत, इजहार अली आदि उपस्थित थे.

इस दिन गिरिडीह जिले में कश्मीर एकजुटता दिवस मनाने के साथ-साथ पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत किसानों की गैर मजरुआ जमीन छीनने के विरोध में धरना को जोड़ लिया गया. गिरिडीह के अम्बेडकर चैक पर पार्टी जिला कमेटी और किसान महासभा की ओर से एक दिवसीय धरना दिया गया जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए. इसकी अध्यक्षता कामरेड उस्मान अंसारी ने और संचालन कामरेड पवन महतो ने किया. इस अवसर पर पार्टी के केंद्रीय कमेटी सदस्य कामरेड विनोद कुमार सिंह, विधायक का. राजकुमार यादव, परमेश्वर महतो, सीताराम सिंह, मुश्ताक अंसारी इत्यादि उपस्थित थे. सभी प्रखंडों से लोगों की अच्छी भागीदारी रही. वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने कश्मीर में सिर्फ विपक्षी दल के नेता कार्यकर्ता को ही नहीं, लाखों लाख आम जनता को भी दो माह से कैद करके नजरबंद करके रखा है जो संविधान के खिलाफ है और लोकतंत्र की हत्या की गई है. भाजपा सरकार की कारपोरेटपरस्त नीति के अनुरूप किसानों से लाखों एकड़ जमीन छीन कर बड़े कारपोरेट कंपनियों को देने की योजना को अगले विधानसभा चुनाव के बाद लागू करने की बड़ी तैयारी की जा रही है. वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के अनुरूप 4 गुना मुआवजा भी विभिन्न समय दखल की गई जमीन के बदले नहीं दिया जा रहा है. यहां तक कि बगोदर के समीप जीटी रोड के पास गैस पाइप लाइन बिछाने के लिए अधिकृत जमीन का भी मुआवजा जेल कंपनियों द्वारा नहीं दिया जा रहा है. धरना सभा में कश्मीर में लोकतंत्र को पूर्ण रूप से बहाल करने और साथ ही गिरिडीह में गैर मजरुवा जमीन पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग की गई है.

इस दिन गढ़वा जिले के सभी प्रखंडों से बड़ी तादाद में जनता को गोलबंद कर गढ़वा शहर में कश्मीर एकजुटता दिवस मनाया गया. नारे लिखी तख्तियों समेत आकर्षक बैनर झंडे के साथ बड़ी संख्या में लोगों ने गढ़वा शहर में मार्च निकाला और एकजुटता सभा की, जिसका नेतृत्व जिला सचिव कालीचरण मेहता, ऐपवा नेत्री सुषमा मेहता, कामेश्वर विश्वकर्मा, वीरेंद्र चौधरी आदि कार्यकर्ताओं ने किया.

देवघर जिले के मोहनपुर बाजार में झंडा बैनर तख्तियों से सजा हुआ कश्मीर एकजुटता मार्च निकाला गया, जिसका नेतृत्व गीता मंडल सहदेव यादव, अशोक मेहता, शम्भू तुरी, मंजू तांती, गुलाबी देवी आदि कार्यकर्ताओं ने किया. कश्मीरी जनता को कैद से मुक्त करने, सभी नजरबंद विपक्षी नेताओं का नजरबंदी हटाने व लोकतंत्र की पूर्ण बहाली कर जनजीवन सामान्य करने की मांग की गई.

बोकारो शहर में ‘बंदी कश्मीर को रिहा करो’ के बुलंद नारे के साथ बोकारो के संगठित-असंगठित मजदूरों ने भाकपा(माले) जिला सचिव देवदीप सिंह दिवाकर, जे एन सिंह के नेतृत्व में कश्मीर एकजुटता दिवस मनाया गया. लोहरदगा में जिला सचिव महेश सिंह और विश्वनाथ गुप्ता के नेतृत्व में कश्मीर एकजुटता दिवस मनाया गया.

ramgarh

 

इस दिन भाकपा(माले) की रामगढ़ जिला कमेटी के सचिव का. भुनेश्वर बेदिया, देवकीनंदन बेदिया, नीता बेदिया, नरेश बडाईक, देवानंद गोप आदि के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में रामगढ़ शहर के मेन रोड में ‘कश्मीर एकजुटता दिवस मार्च’ निकाला गया जो रामगढ़ बस स्टैंड तक गया. सुभाष चौक में एक सभा की गई, जिसमें नेताओं ने कहा कि कश्मीरी जनता को बंदी बनाकर अलोकतांत्रिक तरीके से 370 एवं 35-ए धारा को हटा दिया गया और कश्मीरी बच्चों को कैंपों में कैद कर लिया गया है जो लोकतंत्र की हत्या है. उन्होंने कश्मीर में लोकतंत्र और कश्मीरी जनता के अधिकारों की बहाली की मांग की.

pnb