लेख

कन्हैया का दल-बदल


कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने से पहले दो बातों की बहुत चर्चा रही. उनके हवाले से कई दिनों से यह बात घूम रही थी कि वे अपनी पार्टी यानि भाकपा में घुटन महसूस कर रहे थे. दूसरी बात उनके कांग्रेस में शामिल होने के ऐन पहले चर्चा में रही कि वे पार्टी दफ्रतर में अपना लगाया एसी भी उखाड़ कर ले गए. ये दो बातें उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को काफी हद तक परिभाषित कर देती हैं. कम्युनिस्ट पार्टी में जिसे निजी एसी चाहिए हो, उसे कम्युनिस्ट पार्टी में घुटन महसूस होना लाजमी है.

13 अप्रैल, जलियांवाला बाग की वर्षगांठ पर


–  तुहिन देब

13 अप्रैल 1919 में हुए जलियांवाला बाग नृशंस हत्याकाण्ड के 102 वर्ष गुजर गए हैं. असंख्य स्वतंत्रत संग्रामी क्रांतिकारियों के बलिदान से मिली औपचारिक आजादी को भी 74 वर्ष पूरे हो गए हैं. यह भारत के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करीब 100 वर्ष पूर्व की घटना के विश्लेषण का एक विनम्र प्रयास है.

आज के भारत में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अनुगूंज


– दीपंकर भट्टाचार्य, महासचिव, भाकपा(माले)

23 जनवरी 2021 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती थी. जब हम इस ऐतिहासिक अवसर को मना रहे हैं, तो यही समय है कि भारत के स्वाधीनता आंदोलन के इस महान नायक की मूल दृष्टि और विरासत पर हम पुनः निगाह डालें.

सत्ता की साजिशों पर भारी पड़ा किसान आंदोलन का पलटवार


– पुरुषोत्तम शर्मा

जिस तरह से दिल्ली के सीएए विरोधी आंदोलन को तोड़ने और बदनाम करने के लिए केंद्र की सत्ता और भाजपा-आरएसएस ने दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा की साजिश रची, भाजपा नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को उसका नायक बनाया, उसी तरह से 26 जनवरी 2021 को पिछले पांच माह से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से चल रहे किसान आंदोलन को भी बदनाम करने और हिंसक बनाने के लिए साजिश रची गई.