वर्ष - 27
अंक - 45
27-10-2018

दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब हाल में 15 अक्टूबर 2018 को ‘भारत में बुलेट ट्रेन - किसकी कीमत पर’ विषय को केंद्र कर एक जन कन्वेंशन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘भूमि अधिकार मंच’ के बैनर तले किया गया था। कार्यक्रम में इस परियोजना के चलते महाराष्ट्र और गुजरात से विस्थापित होने वाले किसान और आदिवासी बड़ी संख्या में पहुंचे थे। जमीनी स्तर पर इस आंदोलन को नेतृत्व दे रहे कार्यकर्ताओं ने अपने सारगर्भित अनुभव लोगों से साझा किए।

कार्यक्रम में बुलेट ट्रेन के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ इन पीड़ित आदिवासियों और किसानों का साथ देने के लिए विपक्ष की तमाम राजनीतिक पार्टियों को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में आकर आंदोलन को समर्थन देने वालों में सीपीआई के डी. राजा, सीपीएम के रागेश, सीपीआई(एमएल) के पुरुषोत्तम शर्मा, एसयूसीआई के प्राण शर्मा, ‘आप’ के सोमनाथ भारती, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के डीपी त्रिपाठी, समाजवादी पार्टी के जावेद के अलावा राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल सेकुलर, स्वाभिमानी शेतकरी संगठना और एआईकेएससीसी के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया।

भाकपा(माले) की ओर से बोलते हुए केंद्रीय कमेटी सदस्य कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि हमारी पार्टी महाराष्ट्र और गुजरात में बुलेट ट्रेन के खिलाफ चल रही लड़ाई में सक्रिय है। उन्होंने कहा कि आज लड़ाई एक बुलेट ट्रेन के खिलाफ नहीं बल्कि देश में किसानों-आदिवासियों की जमीन और आजीविका बचाने की है। यह लड़ाई इतनी बड़ी आबादी के देश की खाद्य सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भाकपा(माले) तमिलनाडु में चेन्नई-सैलम एक्सप्रेसवे के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड में हम ईस्टर्न फ्रेट कारीडोर और गेल द्वारा गैस पाइप लाइन के लिए जबरिया भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लड़ रहे हैं। झारखंड में अडानी पावर प्रोजेक्ट के लिए जबरिया आदिवासियों को उजाड़ने और उत्तराखंड में विनाशकारी पंचेश्वर बांध के खिलाफ संघर्ष में हम पीड़ित किसानों और आदिवासियों के साथ हैं।

का. पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि आज कारपोरेट अगर हमें जमीनों के भारी भरकम दाम भी देने को तैयार हों तो क्या हम अपनी जमीन और आजीविका उन्हें लूटने की इजाजत दे देंगे ? यह हरगिज नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाकपा(माले) देश भर में चल रहे भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों को एक प्लेटफार्म पर एकत्रित करने की पक्षधर है। इसके लिए हम हर तरह का योगदान करने को तैयार हैं। कार्यक्रम का संचालन किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव कामरेड हन्नान मोल्ला और भूमि अधिकार आंदोलन के कृष्ण कान्त ने संयुक्त रूप से किया।

कन्वेंशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर जापानी दूतावास के माध्यम से जापान सरकार को एक प्रस्ताव सौंपने का निर्णय लिया। इसमें प्रभावित किसानों-आदिवासियों के साथ ही देश में विपक्ष के भारी विरोध के चलते जापान सरकार से बुलेट ट्रेन योजना से हटने की अपील की जाएगी।