‘जम्मू-कश्मीर के पक्ष में उठ खड़े हों’ के नारे पर समूचे भारत में प्रतिवाद

5 अगस्त 2019 को अमित शाह द्वारा जम्मू-कश्मीर के सम्बंध में धारा 370 और 35-ए के रद्द किये जाने और उसे दो केन्द्रशासित क्षेत्रों में विभाजित किये जाने के तानाशाही भरे बेरहम ऐलान के चंद घंटों बाद ही, वामपंथी पार्टियों द्वारा आहूत प्रतिवाद के आह्नान पर दिल्ली के संसद मार्ग पर सैकड़ों की तादाद में प्रतिवादकारी एकत्रित हो गये. प्रतिवादकारियों में बड़ी तादाद में छात्र मौजूद थे जो प्रतिवादी बैनर और तख्तियां लिये हुए थे, जिन पर लिखा था – “कश्मीर को जेलखाना बनाना बंद करो!”, “धारा 370 और 35-ए को बहाल करो!”, “कश्मीर के तमाम विपक्षी राजनेताओं को रिहा करो!”, “कश्मीर और संविधान के साथ खिलवाड़ बंद करो!”, और “हम सब जम्मू-कश्मीर की अवाम के पक्ष में खड़े हैं!”

प्रतिवाद में शामिल प्रदर्शनकारियों को सीपीआई(एम) के महासचिव का. सीताराम येचुरी और भाकपा(माले) के महासचिव कादीपंकर भट्टाचार्य के अलावा ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव एवं भाकपा(माले) की पोलिटब्यूरो सदस्य का. कविता कृष्णन, सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मांदर और आइसा की नेता कंवलप्रीत ने सम्बोधित किया. प्रतिवाद में भाग लेने वाली अन्य शख्सियतों में शामिल थे प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज, एनटीयूआई के गौतम मोदी, मातु जन संगठन के विमल भाई, एनएपीएम के मधुरेश, सामाजिक कार्यकर्ता एम.जे. विजयन, जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष एन. साई बालाजी एवं अन्य कई लोग.

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पटना में भाकपा(माले), आइसा, इंनौस एवं ऐपवा ने मिलकर करगिल चौक पर एक नागरिक प्रतिवाद आयोजित किया जिसके दौरान हो रही जनसभा पर उग्र-दक्षिणपंथी संगठन के गुंडों ने, जो खुद को “रुद्र चंडी सेना” बता रहे थे, हमला कर दिया और गांधी जी के हत्यारे के समर्थन में नारे लगाये “गोडसे जिंदाबाद”. उनके अचानक हमले से जाहिर था कि वे लाठी एवं अन्य हथियार चलाने में प्रशिक्षित थे. मगर प्रतिवादकारी न सिर्फ प्रदर्शन और जुलूस में डटे रहे बल्कि जोशीला प्रतिरोध करते हुए उन्होंने हमलावर गुंडों से लाठियां छीनकर उनको मार भगाया. इस क्रम में कई साथियों को चोटें आई हैं और एक साथी सुमंत शरण को अस्पताल में दाखिल करना पड़ा जहां उन्हें कई टांके लगाये गये. इसके अलावा एनएपीएम के आशीष रंजन झा, जन जागरण समिति की कामायनी जी, माले नेता प्रकाश कुमार को भी चोटें आईं. प्रतिवाद में मुख्य रूप से एन सिन्हा इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक डीएम दिवाकर, भाकपा माले के पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेंद्र झा, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, सरोज चौबे, शशि यादव, अभ्युदय, उमेश सिंह, रणविजय, समता राय, आइसा अध्यक्ष संदीप सौरभ, राज्य अध्यक्ष मोख्तार, नट मण्डप की मोना झा, विमुक्ता संगठन की आकांक्षा, मजदूर बिगुल दस्ता की बारुनी, अजय सिन्हा, रूपेश सहित कई अन्य दूसरे संगठन के भी लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे.

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बिहार में पटना के अलावा भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीवान, गया, जहानाबाद, अरवल, नालंदा, भोजपुर, पटना ग्रामीण के कई प्रखंडों में नागरिक प्रतिवाद मार्च निकाले गये.

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वामपंथी पार्टियों ने सिलीगुड़ी में भी एक प्रतिवाद आयोजित किया, जिसमें भाकपा(माले) केन्द्रीय कमेटी के सदस्य कामरेड अभिजित मजुमदार के नेतृत्व में पार्टी के सदस्य बड़ी तादाद में मौजूद थे. पुदुच्चेरी में भाकपा;मालेद्ध ने एक प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित किया जिसको पार्टी राज्य सचिव बालसुब्रह्मण्यन ने किया. पंजाब के गुरदासपुर में भी पार्टी ने प्रतिवाद सभा आयोजित की जिसमें सैकड़ों की तादाद मे लोग शामिल हुए.

बंगलौर के टाउन हाॅल में हुई एक प्रतिवाद सभा में बड़ी तादाद में लोग शामिल हुए. एक तरफ संघी गिरोहों ने और दूसरी तरफ पुलिस ने प्रतिवाद को रोकने के लिये धमकियां दी थीं और पाबंदियां लगा दी थीं फिर भी प्रतिवादकारियों के जोश में कोई फर्क नहीं पड़ा. भोपाल में नागरिक समाज के समूहों ने प्रतिवाद आयोजित किया. लखनऊ में भी प्रतिवाद आयोजित किया गया.

साउथ एशिया साॅलिडरिटी ग्रुप की पहलकदमी पर अन्य कई ग्रुपों को शामिल करते हुए लंदन में भी एक प्रतिवाद विजिल (मोमबत्ती जुलूस) आयोजित किया गया.

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झारखंड के रांची, गिरिडीह, बोकारो, रामगढ़, धनबाद, कोडरमा एवं अन्य जिलों में भी प्रतिवाद प्रदर्शन किये गये. उत्तराखंड के नैनीताल जिले के बिंदुखत्ता में का. राजा बहुगुणा, कैलाश पांडेय के नेतृत्व में प्रतिवाद जुलूस निकाला गया.

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में अम्बेडकर प्रतिमा के समक्ष प्रतिवाद धरना दिया गया. इसके अलावा गाजीपुर सहित अन्य जिलों में प्रतिवाद कार्यक्रम किये गये.

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7 अगस्त को भी देश भर में प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित किये गये. वामपंथी पार्टियों के लोगों ने इन कार्यक्रमों में बढ़चढ़कर भाग लिया. दिल्ली में भाकपा(माले) के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य, सीपीआई(एम) महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई के महासचिव डी. राजा तथा अन्य वामपंथी नेता कविता कृष्णन, वृन्दा करात, एन्नी राजा, राजीव डिमरी, पुरुषोत्तम शर्मा आदि के नेतृत्व में मंडी हाउस से संसद मार्ग तक एक रैली निकाली गई. इसके अलावा पटना, गुवाहाटी, जयपुर, उदयपुर, झुंझनू, नैनीताल, चंडीगढ़ और भुवनेश्वर तथा राजस्थान के अन्य जिलों में भी प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित किये जाने की खबर है. जयपुर में आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने पुलिस के संरक्षण में प्रतिवादकारियों पर हमला चलाया, मगर प्रतिवादकारी डटे रहे और अंततः हमलावर गुंडों को पीछे हटने पर मजबूर किया.

तमिलनाडु के तिरुनेल्वेलि में भाकपा(माले) राज्य कमेटी सदस्य का. जी. रमेश के नेतृत्व में वकीलों ने प्रतिवाद मार्च निकाला. पुलिस और प्रशासन द्वारा बाधाएं डालने और पाबंदियां लगाये जाने के बावजूद राज्य अन्य स्थानों पर भाकपा(माले) ने प्रतिवाद आयोजित किये. विल्लुपुरम में प्रतिवाद प्रदर्शन कर रहे भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

धारा 370 और धारा 35-ए को बहाल करो ! कश्मीर में सभी विपक्षी नेताओं को रिहा करो ! कश्मीर और देश के संविधान से खिलवाड़ मत करो !

नई दिल्ली, 5 अगस्त 2019 राष्ट्रपति के आदेश द्वारा धारा 370 को रद्द करना और जम्मू एवं कश्मीर राज्य को दो केन्द्र शासित क्षेत्रों – लद्दाख और जम्मू एवं कश्मीर – में विभाजित करना भारतीय संविधान के विरुद्ध तख्तपलट जैसी कार्यवाही से कम नहीं है. मोदी सरकार अपने लुके-छिपे, साजिशाना और गैर-कानूनी तौर तरीकों से संविधान को और कश्मीर को बाकी भारत से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पुल को, जलाने का काम कर रही है.

इस तख्तपलट की तैयारी में मोदी सरकार ने पिछले एक सप्ताह से कश्मीर की घेराबंदी कर रखी थी. दुनिया के इस सबसे अधिक सैन्यीकृत क्षेत्र में 35,000 सैन्य बल और भेज दिये गये थे. सैलानियों और तीर्थयात्रियों को घाटी छोड़ने की चेतावनी दे दी गयी थी, जबकि वहां कश्मीरी लोगों ने उनके स्वागत में अपने दरवाजे खोले हुए थे. उसके बाद अब, विपक्ष के नेताओं को नजरबन्द कर दिया गया है, इण्टरनेट को बंद कर दिया है, पेट्रोल की बिक्री बंद है, और पुलिस थाने सीआरपीएफ को सौंप दिये गये हैं.

संविधान के अनुसार जम्मू एवं कश्मीर की सीमाओं को पुनर्निर्धारित करने अथवा धारा 370 और धारा 35-ए के बारे में कोई भी निर्णय वहां की राज्य सरकार की सहमति के बगैर नहीं लिया जा सकता है. 2018 में जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा बगैर किसी दावेदार को सरकार बनाने का मौका दिये गैरकानूनी तरीके से भंग कर दी गई थी. फिर केन्द्र सरकार ने संसदीय चुनावों के साथ जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभा के चुनाव कराने से इंकार कर दिया था. इसलिए राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया यह आदेश पूरी तरह से एक तख्तपलट है.

जिस प्रकार नोटबंदी ने भ्रष्टाचार और कालेधन का कम नहीं किया, बल्कि इसने आम जनता के लिए नई समस्याएं पैदा कर दीं और भ्रष्टाचार को बेतहाशा बढ़ा दिया, उसी प्रकार जम्मू एवं कश्मीर के बारे में ऐसा हादसा जनक और गुप्त फैसला जबकि वहां इस समय एक चुनी हुई विधानसभा भी नहीं है, कश्मीर समस्या को हल नहीं करेगा बल्कि वहां के हालात को और खराब कर देगा. वहां बढ़ाया जा रहा सैन्य बलों का जमावड़ा और विपक्षी दलों पर हमला जम्मू एवं कश्मीर की जनता को और ज्यादा अलगाव में डाल देगा.

इस प्रकार का तख्तपलट केवल कश्मीर के हालात पर ही बुरा असर नहीं छोड़ेगा, बल्कि यह संविधान पर एक सीधा हमला है और इसका असर पूरे भारत पर पड़ेगा. भाजपा जम्मू एवं कश्मीर में उठाये गये इस कदम से, नागरिकता संशोधन बिल और एन.आर.सी. आदि के माध्यम से भारत को फिर से 1940 के दशक वाली उथल-पुथल और अशांति की ओर धकेल रही है. जम्मू एवं कश्मीर में आज वस्तुतः आपातकाल लागू कर दिया गया है: पूरे भारत को दृढ़ता से इसके विरोध और प्रतिरोध में खड़ा होना होगा क्योंकि यही आपातकाल जल्द ही पूरे भारत में फैलने के संकेत दे रहा है.

भाकपा(माले) संकट के इस समय में जम्मू एवं कश्मीर की जनता के साथ खड़ी है और यह आह्वान करती है कि संविधान पर हुए इस हमले और तख्तपलट के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये जाएं. हम मांग करते हैं कि कश्मीर घाटी से सैन्य बल तुरंत हटाये जायें, धारा 370 और धारा 35-ए को तुरत बहाल किया जाय और सभी विपक्षी नेताओं को नजरबन्दी से तत्काल रिहा किया जाय.

दीपंकर भट्टाचार्य महासचिव, भाकपा(माले)

वर्ष28
अंक34