भाकपा (माले) (लिबरेशन) लोकसभा चुनाव घोषणापत्र 2019

भगतसिंह और अम्बेडकर के सपनों के भारत के लिए

देश बचाओ

भारत के लोकतंत्र को मजबूत बनाओ

भाकपा (माले) (लिबरेशन) लोकसभा चुनाव घोषणापत्र 2019

 

देशवासियो,

2019 का चुनाव भारत के लिए ऐतिहासिक चुनाव होने जा रहा है. इस चुनाव में हमारे लोकतंत्र का सम्वैधानिक ढाँचा दाँव पर लगा हुआ है. हम मौजूदा दौर की भयावहता को ध्यान में रखते हुए इस चुनावी समर में भागीदारी करें. हम भारत के हर नागरिक से अपील करते हैं कि मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने और अपने लोकतंत्र को फिर से हासिल करने के लिए फासीवाद के खतरे को परास्त करें और सोच-समझ कर अपने वोट का प्रयोग करें.

पिछले पाँच सालों में मोदी सरकार और संघ परिवार द्वारा मुल्क को फासीवाद की ओर धकेलने की कोशिश जारी रही. संगठित उन्मादी भीड़ द्वारा अल्पसंख्यकों की हत्याएँ, दलितों पर बढ़ते हमले, बलात्कारियों के पक्ष में सत्ताधारी भाजपा द्वारा रैलियाँ निकालना, पत्रकारों व कार्यकर्ताओं को भद्दी गालियाँ, धमकियाँ, गिरफ्तारियाँ और और यहां तक कि उनकी हत्याएँ, कुछ एक मीडिया समूहों को छोड़कर ज़्यादातर को डराने-धमकाने और चुप कराने की कोशिशें एक महामारी बन कर अब तो असामान्‍य रूप से ‘आम’ हो चुकी हैं. सीबीआई से लेकर आरबीआई और अदालतों तक की स्वायत्तता और विश्वसनीयता पर हमले किए गए हैं. प्रधानमंत्री ने पिछले पाँच सालों में एक भी प्रेस कांफ्रेन्स नहीं की है.

गरीबों के जीवन और जीविका पर नोटबंदी के जरिए तीखा हमला किया गया. किसानों और आदिवासियों ने जब अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की तो उन्हें गोलियों का सामना करना पड़ा. सत्ता की आँख में आँख डालकर सच बोलने के चलते मजदूरों, महिलाओं, दलितों, छात्रों, नौजवानों और बुद्धिजीवियों को दमन का सामना करना पड़ा.

मोदी राज में भारत इन दुश्वारियों का सामना कर रहा है:

  • पिछले 45 सालों में सबसे बुरी बेरोजगारी की मार
  • ईंधन और खाद्य सामग्री की आसमान छूटी कीमतें
  • पिछले चौदह सालों में सबसे धीमी कृषि आय वृद्धि दर
  • खेत मजदूरों की मजदूरी नहीं बढ़ी
  • किसान आत्महत्याएँ जारी रहीं
  • किसानों, मजदूरों, बेरोजगारों, छात्रों, दलितों, आदिवासियों, धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और विरोध करने वाले नागरिकों को ज़्यादा तीखे राज्य दमन का सामना करना पड़ा और उनपर दानवीय कानूनों के तहत मुकदमे दर्ज किए गए.
  • प्रधानमंत्री कार्यालय पर अब तक के सबसे संगीन भ्रष्टाचार और अपने दोस्तों को लाभ पहुँचाने की गैर-कानूनी कोशिशों के आरोप लगे.
  • कई दशक बाद कश्मीर घाटी में आत्मघाती बमबारी फिर से लौट आयी.
  • उरी, पठानकोट, पुलवामा आदि में आतंकवादी हमलों को रोकने में सरकार पूरी तरह नाकाम रही.
  • चुनावी फायदे के लिए युद्धोन्‍मादी उकसावेबाजी कर देश को पाकिस्‍तान से युद्ध करने की कगार तक ले जाया गया.

भाजपा के सांसद भारत के संविधान से छेड़छाड़ करने की मंशा जगजाहिर कर 2019 के चुनाव को भारत का आख़िरी चुनाव बताने की घोषणा करते खुलेआम घूम रहे हैं.

सन् 1977 के चुनाव भारत के लोकतंत्र को बचाने और आपातकाल के जरिए अत्याचार करने वालों को सजा देने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण थे. उसी तरह भारत के आम नागरिकों के लिए 2019 के चुनाव बहुत महत्त्वपूर्ण हैं. इस चुनाव में भारत के लोकतंत्र को मोदी की आपदा से बचाने और भारतीय लोकतंत्र को एक नए नजरिए व प्रतिबद्धता के साथ फिर से खड़ा करने की जरूरत है.

ऐसे में भाकपा (माले) (लिबरेशन) का यह संघर्षों का घोषणा पत्र संघर्ष के प्रमुख मुद्दों को रेखांकित करता है. यह घोषणा पत्र भारत के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. मौजूदा आपदा के असर से बाहर आने के लिए हमें भारत के लोकतंत्र का पुनर्निर्माण करना और इसे अंदर से मजबूत बनाना होगा ताकि यह भविष्य में फासीवादी व अत्याचारी हमलों के सामने कमजोर न पड़े. भाकपा (माले) (लिबरेशन) से चुने गए सांसद इस मकसद को हासिल करने के लिए संसद से सड़क तक संघर्ष करेंगे.

1. भ्रष्ट कारपोरेट राज का खात्मा

मोदी राज में गैर-बराबरी बहुत तेजी से बढ़ी है. 2017 में नोटबंदी के चलते लाखों लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा, जमा-पूँजी उड़ गयी, मजदूरी घटी और लोगों को आजीविका के लिए संघर्ष करना पड़ा. इसी समय अडानी की कुल सम्पत्ति में सबसे तेज दर से वृद्धि हुई और मुकेश अम्बानी व राधाकृष्ण दमानी की कुल सम्पत्ति में अस्सी फीसदी का इजाफा हुआ. 2018 का ऑक्सफैम का सर्वे दिखाता है कि भारत के सबसे अमीर एक फीसदी लोग 39 फीसदी ज़्यादा अमीर हुए जबकि भारत की सबसे नीचे की आधी आबादी की सम्पत्ति में महज तीन फीसदी का इजाफा हुआ. आज भारत के सबसे अमीर नौ अरबपतियों की कुल सम्पत्ति भारत की पचास फीसदी नीचे की जनसंख्या की सम्पत्ति के बराबर है. यदि इन कारपोरेट परिवारों के मुखिया अपनी सम्पत्ति पर केवल 0.5 फीसदी अतिरिक्त टैक्स चुकाएँ तो सरकार जन-स्वास्थ्य पर होने वाले कुल खर्चे में 50 फीसदी बढ़ोत्तरी कर सकती है.

मोदी का कहना है कि उनके पास परिवार नहीं है इसलिए वे भ्रष्ट नहीं हो सकते. लेकिन उन्हें अपने दोस्त कारपोरेट परिवारों से बेशुमार लाभ हुआ है. मोदी के प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने दोस्त कारपोरेट घरानों को रक्षा सौदों (राफेल-अनिल अम्बानी), बिजली, तेल, गैस सौदों (मुकेश अम्बानी), कोयला, हवाई अड्डा सौदों (अडानी) के साथ-साथ शिक्षा सौदे (जियो-मुकेश अम्बानी) को हासिल करने में भरपूर मदद की. बदले में ये कारपोरेट घराने भाजपा को गुप्त तरीके से चुनावी बॉन्ड के जरिए अरबों रुपए दे सकते हैं. इसलिए हम चाहते हैं कि :

क: एक फीसदी अति धनी लोगों पर सम्पत्ति व उत्तराधिकार कर लगाया जाय.

ख: कारपोरेट घरानों की टैक्स व कर्ज माफी खत्म की जाय.

ग: बैंकों के कर्ज़दारों की रघुराम राजन द्वारा दी गयी सूची पर कार्यवाही की जाय.

घ: मोदी सरकार की चुनावी बॉन्ड योजना को खत्म किया जाय क्योंकि यह भ्रष्ट कारपोरेट के सत्ता से दोस्ताने को छिपाता है. राजनीतिक चन्‍दे में पारदर्शिता लायी जाय.

 

2: आर्थिक नीतियों में जन-पक्षधर बदलाव

मोदी सरकार में लाभ कमाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों को कमजोर करके बेचने और कारपोरेट लूट को बढ़ाने की नीतियों ने जोर पकड़ा. 59 मिनट में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों के लिए कर्ज़ की योजना फर्जीबाड़ा साबित हुई. असल में नोटबंदी के चलते सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए. भाजपा और मोदी सरकार ने खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के सवाल पर यू-टर्न ले किया. इन नीतियों के चलते बेरोजगारी में बुरी तरह इजाफा हुआ. मोदी सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज कल्याण पर खर्च को भी घटा दिया. भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए इन नीतियों में आमूलचूल बदलाव की जरूरत है ताकि रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें, माँग में वृद्धि हो सके और सामाजिक खर्च में प्राथमिकताएँ तय की जा सकें.  हम इस पक्ष में हैं कि:

क: महत्त्वपूर्ण ढाँचागत व वित्तीय क्षेत्रों के निजीकरण को रोका जाय और तेल, गैस व खनिज जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को सार्वजनिक क्षेत्र के मातहत लाया जाय.

ख: सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों के निजीकरण तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों व बीमा कम्पनियों के विलय पर रोक लगाई जाय.

ग: खुदरा और रणनीतिक क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर रोक लगाई जाय. श्रम केंद्रित क्षेत्रों को गैर-बराबरी पूर्ण विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया जाय.

घ: घरेलू क्षेत्र में उत्पादन को मजबूत करने के लिए छोटे व मध्यम उद्योगों पर बल दिया जाय.

च: स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश बढ़ाया जाय.

छः न्यूनतम मजदूरी बढ़ा कर 18,000 रुपए प्रतिमाह की जाय और न्यूनतम मजदूरी न देने वालों को कानूनन गंभीर अपराध बनाया जाय.

 

3: भ्रष्टाचार रोकने और भ्रष्टाचारियों को सजा देने की नीति

भारत में घोटालों का सम्बंध कारपोरेट दोस्ताने से है. सरकार नीतियों में बदलाव करने की अपनी ताकत का इस्तेमाल करके अपने दोस्त कारपोरेट घरानों को लाभ पहुँचाती है. यदि टू-जी घोटाला सरकार और पूँजीपतियों के अवैध दोस्ताने का यूपीए के समय का उदाहरण है तो मोदी सरकार इस अवैध दोस्ताने की सरताज है. राफेल घोटाला किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा पेश की गयी इस अवैध दोस्ताने की सबसे बड़ी मिसाल है जहाँ एक मोटे पैसे वाला रक्षा सौदा सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी से छीन कर एक अक्षम और दिवालिया दोस्त अनिल अम्बानी के हवाले कर दिया गया. बैंक से कर्ज़ लेकर उसे न चुकाने का बहुत बड़ा घोटाला है (एन.पी.ए.) लेकिन मोदी सरकार ने कर्ज़ न चुकाने वालों की रघुराम राजन द्वारा दी गयी सूची पर कोई कार्यवाही नहीं की. मोदी का पूरा कार्यकाल ऐसे घोटालों से भरा पड़ा है जिनमें अमित शाह और अजित डोभाल के बेटों और मंत्री पीयूष गोयल व अन्य ने मुनाफा कमाया. कई घोटालों में राज्यों की भाजपा सरकारें शामिल हैं (मसलन व्यापामं, शारदा और सृजन आदि). इतना ही नहीं सरकार ने सीबीआई, एनएसए, ईडी, सीआईसी, सीबीसी जैसी संस्‍थाओं की स्वायत्तता में हस्तक्षेप किया, भ्रष्टाचार विरोधी कानून को कमजोर किया, लोकपाल की नियुक्ति में देर की और 2019 के चुनाव के ठीक पहले सारी प्रक्रियाओं को धता बताते हुए लोकपाल नियुक्त किया.

भ्रष्टाचार को रोकने और भ्रष्टाचारियों को सजा देने के लिए हम निम्नलिखित कदम उठायेंगे :

क: जाँच व निगरानी करने वाली सीबीआई, एनएसए, ईडी, सीआईसी, सीबीसी जैसी संस्थाओं की स्वायत्तता की गारंटी होगी .

ख: लोकपाल को मजबूत बनाया जायेगा.

ग: भ्रष्टाचार विरोधी कानून को कमजोर करने वाले प्रावधानों को वापस लिया जायेगा.

घ: हितों के टकराव के सम्बंध में कानून बनाया जायेगा.

च: राफेल घोटाला, नोटबंदी घोटाला, जय शाह, विवेक डोभाल और पीयूष गोयल की संलिप्तता वाले घोटालों, पीएनबी घोटाला, सृजन, शारदा, रोज वैली चिटफंड घोटाला और व्यापमं घोटाला समेत तमाम घोटालों की जाँच करा कर दोषियों को सजा दी जायेगी. एनपीए घोटाले को समाप्त करने के लिए रघुराम राजन की सूची में मौजूद बकाएदारों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होगी.

 

4: लोगों के मौलिक अधिकारों और हक़ों को मजबूत करेंगे

मोदी सरकार ने लोगों के मौलिक अधिकारों और हक़ों पर चौतरफा हमले किए. खुद प्रधानमंत्री मोदी ने रोजगार गारंटी जैसे अधिकारों को खैरात कहा और मनरेगा व आँगनबाड़ी जैसी योजनाओं का बजट काट दिया. आधार को अन्य योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया के चलते बूढ़ों और बच्चों समेत दर्जनों लोगों की मृत्यु हुई क्योंकि उन्हें खाने और पेंशन से वंचित कर दिया गया. वैश्विक भूख सूचकांक में भारत का नम्‍बर 119 देशों में 103वाँ है. मोदी सरकार ग्रामीण विद्युतीकरण और सबके लिए आवास जैसे वादों को पूरा नहीं कर सकी. स्वच्छ भारत योजना का पैसा विज्ञापनों पर खर्च कर दिया गया और सरकार पीने व धोने का साफ पानी मुहैय्या नहीं करा सकी.

आश्चर्यजनक नहीं है कि विश्व खुशी सूचकांक में भारत 118वें स्थान से फिसलकर 140वें स्थान पर लुढ़क गया. अच्छे दिन तो ऐसे ही आए हैं!

भारत के विकास के लिए जरूरी है कि भारत की जनता के मूलभूत अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की गारंटी की जाय. इसलिए निम्नलिखित कदम उठाने जरूरी हैं :

क: काम के अधिकार, भोजन और पोषण के अधिकार, स्वास्थ्य के अधिकार, आवास के अधिकार और शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकारों का दर्जा देने के लिए सम्विधान संशोधन करना.

ख: प्रति परिवार 50 किलो खाद्यान्न के साथ दाल और खाने का तेल को सार्वभौम सार्वजनिक वितरण प्रणाली में शामिल करना और इसे लागू करना.

ग: बुज़ुर्गों, विकलांगों, अकेली महिलाओं और कमजोर आदिवासी समूह के सदस्यों के लिए कम से कम 3,000 रुपए की सामाजिक सुरक्षा पेंशन की गारंटी करना.

घ: ग्रामीण घरों के लिए मुफ़्त गैस व बिजली कनेक्शन की गारंटी करने के साथ बिजली और खाना पकाने की गैस का दाम कम करना.

च: आधार कानून खत्म करना और कल्याणकारी सेवाओं के लिए आधार की जरूरत को समाप्त करना.

छः सबके लिए साफ पेय जल सुनिश्चित करना.

ज: भूमि सीलिंग (हदबंदी) की अधिकतम सीमा को कम करना और सभी राज्यों में भूमि हदबंदी के एक समान मानक  निर्धारित करना .

झ: भूमि, बँटाईदारी व अन्य किसान समर्थक कृषि सुधारों को तत्काल लागू करना.

ट: गाँव का विद्युतीकरण और रियायती दर पर शहरी व ग्रामीण गरीबों तथा छोटे उद्योगों व कृषि के लिए चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति की गारंटी करना.

 

5. हर हाथ को काम मिलेगा<

मोदी सरकार ने एनएसएसओ के हालिया आँकड़ों को दबाने की कोशिश की जिनसे साफ होता है कि 2017-18 में बेरोजगारी दर पिछले 45 सालों में सबसे ज़्यादा थी. बेरोजगारी दर 2-2.5 फीसदी से छलाँग लगाकर 6 फीसदी से ऊपर पहुँच गयी है. 15 से 29 साल के बीच की उम्र वाले युवा पुरुष और महिलाओं पर बेरोजगारी की मार सबसे ज़्यादा पड़ी है. नोटबंदी के चलते एक करोड़ से ज़्यादा रोजगार खत्म हुए. इनमें से अट्ठासी लाख रोजगार महिलाओं के थे.

क: कम से कम 250 दिनों के रोजगार की गारंटी के लिए मनरेगा को विस्तारित किया जायेगा.

ख: शहरी इलाकों के लिए रोजगार गारंटी कानून बनाया जायेगा. हर बेरोजगार भारतीय के लिए बेरोजगारी भत्ते की गारंटी होगी.

ग: सरकारी नौकरियों में खाली पड़े पद भरे जायेंगे.

घ: भर्तियों में भ्रष्टाचार और पर्चा लीक का राज खत्म होगा.

 

6: सबसे लिए आवास की गारंटी होगी

क: समुचित आवास और भूमि अधिकार के लिए कानून बना कर उसे लागू किया जायेगा.

ख: झुग्गी झोपड़ी वासियों और ग्रामीण/जंगल निवासी समुदायों को जबरन उजाड़ने पर रोक लगेगी.

ग: आवास व भूमि अधिकारों का उल्लंघन करने वालों की जाँच के लिए एक राष्ट्रीय अधिकरण का गठन किया जायेगा और समुचित मुआवजे की व्यवस्था की जायेगी.

घ: आवास के बारे में प्रगतिशील अदालती आदेशों को लागू किया जायेगा और इसकी निगरानी के लिए उचित व्यवस्था बनायी जायेगी.

च: खेती और प्लान्टेशनों/बागानों में काम करने वालों के लिए आवास-भूमि की गारंटी की जायेगी.

छः सब के लिए आवास की गारंटी होगी.

ज: कम आय वाले समूहों, महिलाओं और वंचित समुदायों के लिए जरूरत में कानूनी मदद सुनिश्चित करायी जायेगी.

झ: विकलांग व्यक्तियों की आवास समस्याओं का निदान करने के लिए कानूनों और नीतियों में बदलाव होगा. भवन उप-कानून 2016 में विकलांगों के अधिकारों की गारंटी की जायेगी.

 

7: सभी कामगारों के सम्मान व अधिकारों की गारंटी होगी

रोजगार के मोर्चे पर अपनी भीषण असफलता को मोदी सरकार खोमचा लगाने, पकौड़ा बेचने, चौकीदारी करने आदि को रोजगार की तरह पेश कर रही है. 'व्यापार करने में सहूलियत' (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) और 'मेक इन इंडिया' के नाम पर ये सरकार श्रम कानूनों को लगातार कमजोर करती गयी है जिससे मजदूरों का काम और भी असुरक्षित, उत्पीड़न भरा और अस्थिर हो गया है. भारत में 82 फीसदी पुरुष और 92 फीसदी महिलाएँ 10,000 रुपए प्रतिमाह से भी कम आय पर जीवित हैं. हाथ से सफाई करने वालों की सीवर में मौतें हो रही हैं. न्यूनतम मजदूरी बेहद कम है और उसे भी पूरी तरह दिया नहीं जाता. यूनियन बनाने के अपने अधिकार का प्रयोग करने के चलते मजदूरों को लगातार बर्खास्त किया जा रहा है. महिला मजदूरों को लगातार अपमानित किया जाता है, उन्हें गालियों का सामना करना पड़ता है. यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानून लागू नहीं किए जा रहे.

हम चाहते हैं कि:

क: न्यूनतम मजदूरी और यूनियन बनाने के अधिकार समेत श्रम कानूनों को मजबूत बनाया जाय और उन्हें कड़ाई से लागू किया जाय.

ख: लेबर कोड बिल वापस लिया जायेगा.

ग: रोजगार सुरक्षा की गारंटी की जायेगी. ठेका प्रथा समाप्त होगी तथा ठेका मजदूरों को स्थायी नौकरी दी जायेगी.

घ: सभी मजदूरों के लिए सार्वभौम सामाजिक सुरक्षा की गारंटी करनी होगी. न्यूनतम 18,000 रुपए की न्यूनतम मजदूरी की गारंटी होगी.

च: आशा, आँगनबाड़ी, रसोईया और अन्य योजनाओं में काम करने वालों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जायेगा.

छः घरेलू कामगारों को मजदूर का दर्जा मिलेगा और उनकी सुरक्षा के लिए कानून और कल्याण बोर्ड का गठन किया जायेगा.

ज: दस्तकारों, शिल्पियों, स्व-रोजगार में लगे लोगों व असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए पहचान पत्र बनेगा ताकि वे आवास, स्वास्थ्य व शिक्षा के लाभ उठा सकें.

झ: जाति आधारित पेशा निर्धारण खत्म किया जायेगा और हाथ से मैला साफ करने के खिलाफ बने कानून को लागू किया जायेगा

ट: सभी क्षेत्रों में महिला कामगारों के लिए मातृत्व लाभ की गारंटी करनी जरूरी है और काम की जगहों पर बच्चों की देखभाल की सुविधाओं की गारंटी भी.

ठ: कार्यस्थल पर शौचालय इस्तेमाल करने पर रोक-टोक और मोबाइल फोन पर प्रतिबंध जैसी अपमानजनक प्रथाओं को समाप्त किया जायेगा.

ड: दूसरे राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों के खिलाफ घृणा व हिंसा पर रोक लगेगी.

ढ: हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों को जीएसटी के दायरे से बाहर लाया जायेगा.

त: केंद्रीय व राज्य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की जायेगी.

 

8: सार्वभौम स्वास्थ्य अधिकार की गारंटी होगी

स्वास्थ्य सेवा व गुणवत्ता के वैश्विक सूचकांक में भारत का 145वाँ स्थान है. इस मामले में यह भूटान और बांग्लादेश से भी पिछड़ा हुआ है. भारत परिवार नियोजन और मातृ व शिशु मृत्यु दर के मामले में दुनिया के सबसे पिछड़े देशों में से एक है. सेंट्रल ब्यूरो ऑफ हेल्थ इंटेलीजेंस (सीबीएचआई) द्वारा हाल ही में जारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल 2018 में पाया गया कि भारत सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर सकल घरेलू उत्पाद का सिर्फ़ 1.3 फीसदी खर्च करती है जबकि वैश्विक स्तर पर औसतन छः फीसदी खर्च किया जाता है. सरकार प्रति व्यक्ति सालाना 1,112 रुपए स्वास्थ्य पर खर्च करती है जिसका अर्थ है: सिर्फ़ तीन रुपया रोज. भारत स्वास्थ्य पर नेपाल, मालदीव, श्रीलंका और भूटान से भी कम खर्च करता है. ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भारी कमी है. सीबीएचआई की रिपोर्ट के अनुसार एक सरकारी एलोपैथिक डॉक्टर पर 11,082 लोग निर्भर हैं. यह विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रस्तावित 1:1,000 से ग्यारह गुना ज़्यादा है. बिहार में हालात और भी बदतर हैं जहाँ एक डॉक्टर पर 28,391 लोग निर्भर हैं. उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है जहाँ हर डॉक्टर पर 19,962 लोग निर्भर हैं. झारखंड तीसरे स्थान पर है जहाँ हर डॉक्टर पर 18,518 लोग निर्भर हैं.

ऐसी हालात के बावजूद इन राज्यों और केंद्र में शासन करने वाली भाजपा सरकार अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों की संख्‍या बढ़ाने की जगह मंदिर और मस्जिद के नाम पर ध्रुवीकरण कराने में लगी हुई है !  वे 'स्वास्थ्य बीमा' योजनाओं को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं जबकि पूरी दुनिया में ऐसी योजनाएँ बुरी तरह असफल रही हैं. इनसे केवल बीमा कम्पनियों की जेब भरती है जबकि योगी राज में बच्चे अस्पतालों में ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ देते हैं.

जरूरी तौर पर :

क: सबके लिए बेहतरीन गुणवत्ता वाले सरकारी अस्पतालों के नेटवर्क, हर ब्लाक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, महामारी जैसी बीमारियों की रोकथाम के कार्यक्रमों आदि से युक्त स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी की जाएगी.

ख: सभी गर्भवती महिलाओं को बिना शर्त मातृत्व लाभ दिए जायेंगे.

ग: जन स्वास्थ्य अभियान के 'जनता के स्वास्थ्य घोषणा पत्र' में उठायी गयी माँगों को लागू किया जायगा.

घ: आयुष्मान भारत और स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को समाप्त किया जायगा.

च: इसके स्थान पर केंद्र व राज्य स्तर पर स्वास्थ्य सेवा कानून बनाया जाय जिसमें हर भारतीय के लिए सार्वभौम स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों. इसके लिए मुफ़्त में उपलब्ध सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जायगा.

छः स्वास्थ्य और बीमारी से बचाव के लिए पोषण अत्यंत आवश्यक है इसलिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सबके लिए लागू किया जायगा.

ज: आशा और एएनएम कर्मचारियों को स्थायी व कुशल सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए. उनके लिए प्रशिक्षण, वेतन व अन्य सुविधाओं की गारंटी की जायगा.

झ: सरकारी खर्चे पर सबके लिए नशामुक्ति व पुनर्वास केंद्र उपलब्ध कराए जाएँ. नशे के ज़्यादा आदी हो चुके लोगों को इलाज के दौरान वेतन सहित छुट्टी दी जायगा.

ट: विकलांग व्यक्तियों के लिए सरकारी खर्चे पर स्वास्थ्य व पुनर्वास सेवाओं की गारंटी की जाए. साथ ही हर सार्वजनिक स्थल व परिवहन सेवाओं को ऐसे व्यक्तियों की पहुँच के अनुरूप बनाया जायगा.

हम उपरोक्त बातों को तत्काल अमल में लाएंगे.

9: शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जायेगा

2011 की जनगणना के मुताबिक पाँच से सत्रह वर्ष की आयु के 8.4 करोड़ बच्चे स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर हैं. इसका सबसे बड़ा कारण स्कूली शिक्षा का निजीकरण है. पिछले चुनाव अभियान के दौरान मोदी ने शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का छः फीसदी खर्च करने का वादा किया था लेकिन अपने पहले ही बजट में उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के बजट में 23 फीसदी की कटौती कर दी. अभी सकल घरेलू उत्पाद का केवल 3.5 फीसदी ही शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है. इस खर्च का भी 65 फीसदी हिस्सा शिक्षा कर के जरिए उगाहा जा रहा है. पूरे देश के केवल 12 फीसदी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया गया है. तकरीबन दो लाख से ज़्यादा सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं.

उच्च शिक्षा में फण्ड कटौती, सीट कटौती, छात्रवृत्ति कटौती, छात्रों के प्रवेश और अध्यापकों की नियुक्ति में आरक्षण में कटौती आदि के जरिए स्कूली और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अम्बानी के ‘जियो-मॉडल’ को लाभ पहुँचाने की कोशिश की जा रही है. कॉलेजों में सीटें पिछले नौ सालों के न्यूनतम स्तर पर हैं. शिक्षक-छात्र अनुपात 2017-18 में 1:34 पर पहुँच गया और निजी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों की तादात बढ़ती चली गयी. शिक्षकों के दो लाख से ज़्यादा पद खाली पड़े हैं. किसी न किसी बहाने छात्रों के प्रवेश और अध्यापकों की भर्ती में आरक्षण पर हमला किया जा रहा है. 2014 से 2016 के बीच 26,500 छात्रों ने खुदकुशी कर ली.

स्कूलों और उच्च शिक्षा में समाज विज्ञान और विज्ञान में तथ्यों की जगह भगवाकरण और दकियानूस विचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है. कैम्पस लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले जारी हैं. जीएसकैश जैसी संस्थाओं को समाप्त कर दिया गया है और यौन उत्पीड़न के आरोपी भाजपा समर्थक प्रोफेसरों को बचाया जा रहा है.

हालात में बदलाव के लिए निम्नलिखित सुधार लाने होंगे :

क: शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का दस फीसदी खर्च किया जायेगा.

ख: समान स्कूल व्यवस्था लागू होगी ताकि हर बच्चे के लिए उसके घर के पास समान रूप से उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके.

ग: केजी से पीजी तक सबके लिए मुफ़्त शिक्षा की गारंटी करनी है.

घ: सरकारी स्कूलों को बंद करने, उनका आपस में विलय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जायेगी.

च: शिक्षक नियुक्तियों में 200 प्वाइंट रोस्टर लागू होगा.

छः निजी शिक्षण संस्थाओं व कोचिंग केंद्रों को नियंत्रित किया जायेगा. ठीक ढंग से आरक्षण लागू किया जायेगा.

झ: कैम्पस लोकतंत्र की गारंटी की जायेगी.

ट: जीएसकैश (यौन उत्पीड़न के खिलाफ जेंडर सेन्सिटाइजेशन कमेटी) का गठन किया जायेगा और महिला छात्रावासों में भेदभावपूर्ण कर्फ़्यू व अन्य नियमों को समाप्त किया जायेगा.

ठ: पाठ्यक्रमों में वैज्ञानिक व तर्कपूर्ण सामग्री होगी और नफरत व दक़ियानूसी फैलाने वाली पाठ्यपुस्तकों को समाप्त किया जायेगा.

ड: सीटों की कमी के चलते होने वाली प्रतिस्पर्धा को समाप्त करने के लिए पर्याप्त और सस्ते उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना की जायेगी.

ढ: सभी आरक्षित पदों को भरा जायेगा.

त: सभी तदर्थ, अस्थायी, ठेके पर तैनात, अंशकालिक, अनुदान आधारित नियुक्त अध्यापकों और कर्मचारियों को स्थायी किया जायेगा

थ: समान काम के लिए समान वेतन लागू करते हुए सभी शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक पदों पर स्थायी नियुक्तियाँ होंगीं. द: शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभाओं को पलायन से रोकने के लिए समय आधारित व सुनिश्चित पदोन्नति की गारंटी की जायेगी और वेतन सम्बंधी असंगतियों को दूर किया जायेगा.

ध: सभी सेवा निवृत्त शिक्षकों और गैर शैक्षिक कर्मचारियों की बकाया पेंशन जारी की जायेगी. कैटेगरी 1 एवं 2 के खिलाफ एसएलपी वापस ली जायेगी.

न: एनईईटी व अन्य केंद्रीकृत परीक्षाओं को समाप्त किया जायेगा क्योंकि ये सम्विधान द्वारा निर्धारित संघीय ढाँचे को कमजोर करती हैं और राज्यों की शिक्षा में समान भूमिका को नकारती हैं.

प: नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल 2017 वापस लिया जायेगा . सभी शिक्षण संस्थाओं में और शिक्षा के हर स्तर पर एक स्वस्थ छात्र-अध्यापक अनुपात बहाल करना होगा.

फ: अनुदान व सहायता आधारित राज्‍यों में सभी संस्थाओं के अध्यापकों व अन्य कर्मचारियों को भी यूजीसी द्वारा निर्धारित वेतनमान और अन्य सेवा शर्तें मुहैय्या करायी जायेंगी.

 

10: किसानों की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की गारंटी होगी

मोदी सरकार ने मुश्किलों से जूझते किसानों के प्रति बेहद क्रूरता भरा और अपमानजनक व्यवहार किया है. पिछले बजट में सरकार ने किसानों के 'सम्मान' में एक योजना की शुरुआत की जिसमें किसान परिवार के हर सदस्य के लिए केवल तीन रुपए तीस पैसे प्रतिदिन का प्रावधान किया गया.

हम निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्यवाही करेंगे:

क: किसानों के मुद्दों और कृषि संकट पर संसद का विशेष सत्र बुलाया जायेगा और 30 नवम्बर 2018 को किसान मुक्ति मार्च द्वारा दिल्ली में आयोजित किसान संसद में प्रस्तावित दोनों कानूनों को पारित किया जायेगा. इनमें किसानों को फसल के सकल लागत मूल्य से 50 फीसदी अधिक कीमत की गारंटी करने वाले किसान ‘कृषि उत्पादों के लिए सुनिश्चित मूल्य कानून 2017’ और किसानों के संस्थागत व गैर-संस्थागत सभी बकाया कर्ज़ों को समाप्त करने के लिए ‘किसानों की कर्ज़ से मुक्ति कानून 2017’ शामिल हैं.

ख: संकटग्रस्त इलाकों में आपदाओं के दौरान कर्ज़ चुकाने की क्षमता बहाल होने तक गैर-सांस्थानिक स्रोतों समेत सभी संस्थानों की कर्ज़ वसूली पर प्रतिबंध लगेगा.

ग: बजट सत्र में विशेष किसान बजट पारित किया जायेगा.

घ: स्वामीनाथन किसान आयोग की किसान-हित में सिफारिशों को लागू किया जायेगा.

च: हदबंदी में बची हुई, भूदान और फाज़िल जमीनों का वितरण किया जायेगा.

छः खेती और जंगल की जमीनों को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपने पर रोक लगेगी.

ज: सिंचाई के साधनों में निवेश बढ़ाया जायेगा व किसानों के लिए लगातार और बराबर पानी की गारंटी की जायेगी.

झ: सभी किसान परिवारों को खेती के लिए ब्याज मुक्त सांस्थानिक कर्ज़ की गारंटी होगी.

ट: बँटाईदारों और महिला किसानों को 'किसान' का दर्जा मिलेगा ताकि उनको योजनाओं के सभी लाभ हासिल हो सकें.

ठ: भूमि अधिग्रहण (संशोधन) कानून 2015 को संसद से वापस लिया जायेगा.

ड: भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना कानून 2013 के उचित मुआवजा व पारदर्शिता के प्रावधानों के विरुद्ध बने सभी राज्य स्तरीय भूमि अधिग्रहण कानूनों को समाप्त करेंगे और एक कृषि भूमि संरक्षण कानून बनाया जायेगा.

ढ: जबरन भूमि अधिग्रहण रद्द किये जायेंगे और इस तरह अधिगृहीत जमीनों को वापस किया जायेगा. खेती का कारपोरेटीकरण बंद होगा.

त: भारत के बीज बाजार पर मोन्सांटो व करगिल जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के बढ़ते एकाधिकार पर रोक लगेगी. अपने बीजों के संरक्षण के साथ किसानों के बीज पर अधिकार की गारंटी होगी. एग्रो-प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, सिंचाई व कृषि-बाजारों के नेटवर्क जैसी आधुनिक कृषि सुविधाएँ मुहैय्या करायी जायेंगी.

थ: केंद्र सरकार की उस किसान विरोधी अधिसूचना को रद्द किया जायेगा जो मवेशी बाजार में मवेशियों की खरीद फरोख़्त पर रोक लगाती है. गौरक्षा कानूनों को समाप्त किया जायेगा क्योंकि इनके चलते न सिर्फ़ डेयरी किसान बल्कि खेती करने वाले लोग भी तबाह हो रहे हैं और इसका इस्तेमाल मुसलमान अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न व हत्या करने के लिए किया जा रहा है.

द: मोदी सरकार द्वारा लाए गए "वन कानून 1927 में संशोधन प्रस्ताव, 7 मार्च 2019" को वापस लिया जाएगा। यह संशोधन प्रस्‍ताव वनाधिकार कानून 2006 को निष्प्रभावी बनाने के लिए और इस कानून को एफएसपीए जैसे कानून में तब्‍दील कर जंगल में बसे इलाकों में दमन बढ़ाने के लिए लाया गया है. इसके विपरीत हम जन विरोधी "वन कानून 1927" को निरस्त कर, आदिवासियों, वनवासियों के भूमि अधिकार सहित सभी परंपरागत हकों की रक्षा और पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक नया वन अधिनियम लायेंगे.

 

11: महिलाओं के सम्वैधानिक अधिकारों, आजादी और बराबरी सुनिश्चित करेंगे

हम महिला अधिकारों पर चौतरफा हमलों के दौर से गुजर रहे हैं. संघी गिरोह अंतरधार्मिक संबंधों में महिलाओं को धमका रहे हैं, भाजपा बलात्कारियों के पक्ष में रैलियाँ कर रही है, बिहार और उत्तर प्रदेश में सरकार की शह पर शेल्टर होम में लड़कियाँ और लड़के व्यवस्थित रूप से यौन उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं.

इसलिए हमारा संकल्प है कि :

क: घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए चलाए जा रहे सरकारी शेल्टर होम पारदर्शी और जेंडर सम्वेदनशील तरीके से संचालित करेंगे.

ख: सभी शेल्टर होमों का नियमित सोशल ऑडिट किया जायेगा. मुकदमों के तेजी से निपटारे के लिए भारत की जनसंख्या के अनुपात में न्यायाधीशों और अदालतों की तादात बढ़ाने के लिए आवश्यक धन मुहैय्या कराया जायेगा.

ग: धारा 498 A को कमजोर करने वाले प्रावधानों को वापस लिया जायेगा.

घ: पीसीपीएनडीटी कानून को कड़ाई से लागू होंगे.

च: संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण लागू करने के लिए महिला आरक्षण कानून पारित किया जायेगा.

छः महिलाओं के खिलाफ मॉरल पुलिसिंग और संगठित नफरत फैलाने वाले समूहों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने के लिए कानून बनेंगे . ऐसे समूह अंतर्जातीय-अंतरधार्मिक विवाहों और समलैंगिक संबंधों वाली महिलाओं पर हमला और हिंसा करते हैं.

ज: कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न (बचाव, निषेध और सुधार) कानून 2013 के उस प्रावधान में संशोधन जरूरी है जो 'झूठी शिकायत' पर महिलाओं के खिलाफ सजा का प्रावधान करता है.

झ: विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से सम्बंधित विभिन्न पर्सनल लॉ में महिलाओं की हालात के सुधार के लिए गठित उच्चस्तरीय कमेटी के सुझावों को लागू करना होगा जिससे महिलाओं को सम्विधान द्वारा दिए गए अधिकारों के अनुरूप बराबरी हासिल हो सके.

ट: त्वरित तीन तलाक का अपराधीकरण करने वाले कानून को समाप्त करना है . इसकी जगह उन सभी धार्मिक संस्थाओं और व्यक्तियों की मान्यता रद्द होगी जो त्वरित तीन तलाक को तलाक की मान्यता देते हैं.

ठ: किसी भी धार्मिक स्थल पर महिलाओं के प्रवेश पर जारी प्रतिबंधों को समाप्त किया जायेगा और महिलाओं के लिए 'समान काम के लिए समान वेतन' लागू होगा.

ड: महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्माजनक और लाभकारी रोजगार सुनिश्चित होगा.

ढ: सभी महिलाओं के लिए स्वच्छ शौचालय, नियमित व सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की गारंटी की जायेगी.

 

12: दलित अधिकारों को बुलंद करेंगे

क: अनुसूचित जाति, जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून 2018 को लागू किया जायेगा और एफआईआर न दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों को सजा दी  जायेगी.

ख: अनुसूचित जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए आवंटित राशि का पूरी तरह इस्तेमाल होगा और इस राशि में इजाफा किया जायेगा.

ग: शिक्षण संस्थाओं में जाति आधारित भेदभाव की रोकथाम के लिए कानून (रोहित कानून) बनाया जायेगा.

घ: बिहार व अन्य राज्यों में दलितों के जन संहार के मामलों में अभियुक्तों को बरी किए जाने के खिलाफ लम्बित याचिकाओं के निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन करेंगे. केंद्र सरकार इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल करेगी.

च: हाथ से सफाई करने की प्रथा को समाप्‍त करेंगे, और हाथ से सफाई करने/ मैला ढोने पर रोक लगाने के लिए बने कानून को कड़ाई से लागू करायेंगे. दलित सफाई मजदूरों के लिए पूरी मजदूरी, सुरक्षा और सम्मान की गारंटी करायेंगे.

छ: लोकतांत्रिक आन्दोलनों (महाराष्ट्र में भीमा-कोरेगांव मामला, मध्य प्रदेश में एस.सी./एस.टी. कानून को कमजोर करने के खिलाफ आन्दोलन, या उत्तर प्रदेश में एन.एस.ए. में निरुद्ध किये गये आन्दोलनकारियों आदि) में जेल भेजे गये दलितों एवं दलित आन्दोलनों के समर्थकों की रिहाई सुनिश्चित करायी जायेगी और उनके विरुद्ध लगाये गये आरोपों को वापस लिया जायेगा.

 

13: आदिवासी अधिकारों की गारंटी

मोदी सरकार ने आदिवासियों के अधिकारों पर लगातार हमले किए हैं. सुप्रीम कोर्ट में सरकार की चुप्पी के चलते एक ऐसा आदेश पारित हुआ जिसमें जंगल में रहने वाले 20 लाख आदिवासियों और वनवासियों को वन क्षेत्र से विस्थापित करने का आदेश था. भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद मोदी सरकार को पुनर्विचार याचिका दायर करनी पड़ी जिसपर सुनवाई चल रही है. सुनवाई पूरी होने तक इस आदेश को स्थगित कर दिया गया है. अभी हाल ही में मोदी सरकार ने राज्यों को एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें एएफएसपीए की तर्ज़ पर ही भारतीय वन-कानून में संशोधन करने की सलाह दी गयी है. इसके तहत अधिकारियों को किसी भी व्यक्ति को गोली मारने का अधिकार होगा और मारे गए व्यक्ति के पास पायी गयी चीज़ों के आधार पर उसका अपराध तय किया जाएगा. इस मामले में अधिकारियों की कोई जवाबदेही नहीं होगी.

इसलिए हम :

क: समता फैसला, पाँचवी अनुसूची, पेसा, सीएनटी और एसपीटी कानूनों को सही तरीके से लागू करेंगे.

ख: पेसा के लिए नियम बनायेंगे.

ग: वनाधिकार कानून लागू होगा और सभी समुदायों और व्यक्तियों के दावों को स्वीकार किया जायेगा.

घ: झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में झूठे मुकदमों में फँसाए गए जेलों में बंद हजारों आदिवासी कैदियों को रिहा किया जायेगा.

च: आदिवासी धर्मों को मान्यता देंगे, आधिकारिक पत्र व्यवहार में आदिवासी भाषाओं का इस्तेमाल शुरू होगा और आदिवासी भाषाओं को स्कूल पाठ्यक्रमों में शामिल किया जायेगा.

छः अनुसूचित जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए आवंटित राशि का पूरी तरह इस्तेमाल होगा  और इस राशि में इजाफा किया जायेगा.

 

14: कमजोर समुदायों और अल्पसंख्यकों के लिए सामाजिक न्याय:

क: सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के खाली पड़े आरक्षित पदों को भरा जायेगा.

ख: सरकारी नौकरियों में पदोन्नति के लिए आदिवासियों/दलितों व अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की गारंटी होगी.

ग: निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों और निजी क्षेत्र की नौकरियों में अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया जायेगा.

घ: सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करेंगे.

च: आम तौर पर अल्पसंख्यकों और खासतौर पर मुसलमानों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाया जायेगा.

छः विविध क्षेत्र विकास कार्यक्रम (MsDP) पूरी तरह लागू होगा.

ज: शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं समेत अल्पसंख्यक कल्याण के यूपीए के समय के प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय कार्यक्रम को पूरी तरह लागू करेंगे.

 

15: एलजीबीटीक्यू अधिकारों की गारंटी

क: सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रान्सजेंडर लोगों की पहचान और उनके कल्याण के लिए सुझाए गए प्रस्तावों को लागू किया जायेगा. 2018 के ट्रांसजेंडर कानून को रद्द करेंगे और ट्रांसजेंडर लोगों द्वारा अपनी पहचान तय करने के अधिकार की गारंटी करने वाला नया कानून बनायेंगे.

ख: भेदभाव व हिंसा का सामना कर रहे एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों को कानूनी व अन्य सहायताएँ देने के लिए एक हेल्पलाइन नम्बर की शुरुआत की जायेगी और सहायता केंद्रों की स्थापना होगी.

 

16: घृणा अपराधों और साम्प्रदायिक हिंसा की रोकथाम के लिए व्यापक नीतियाँ बनायी जायेंगी

क: साम्प्रदायिक हिंसा (रोकथाम, नियंत्रण और पीड़ितों के पुनर्वास) कानून बनायेंगे.

ख: धार्मिक, एथनिक और नस्लीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव, घृणा-अपराध व उत्पीड़न के खिलाफ कानून बनायेंगे.

ग: उन्मादी गिरोहों द्वारा की गयी हत्याओं, जातीय जनसंहारों, साम्प्रदायिक दंगों, एथनिक हत्याओं और पुलिस द्वारा गैर-कानूनी हत्याओं के दोषियों को सजा की गारंटी के लिए विशेष ट्रिब्यूनलों का गठन करेंगे.

घ: गोरक्षा और धर्मांतरण विरोधी कानून समाप्त करेंगे

च: मर्यादा के नाम पर होने वाले अपराधों के खिलाफ और अंतर्जातीय-अंतरधार्मिक व सगोत्र जोड़ों की रक्षा के लिए कानून बनाया जायेगा छ: अति दक्षिणपंथी, साम्प्रदायिक आतंकी समूहों से निपटने और उन्हें खत्म करने के लिए विशेष टास्क-फोर्स का गठन किया जायेगा.

 

17: विकलांग व्यक्तियों के सम्मान व अधिकार सुनिश्चित होंगे

क: विकलांग व्यक्ति अधिकार कानून 2016 को कड़ाई से लागू करेंगे.

ख: सार्वजनिक स्थानों, परिवहन, शिक्षा व सार्वजनिक स्वास्थ्य तक विकलांग व्यक्तियों की पहुँच को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठायेंगे.

ग: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विकलांग व्यक्तियों द्वारा जमा धनराशि पर 0.5 % अतिरिक्त ब्याज देंगे.

घ: विकलांग व्यक्तियों की सहायता करने वाली मशीनों और उनके पुर्ज़ों से टैक्स समाप्त करेंगे.

च: खासकर स्थानीय निकायों में विकलांग व्यक्तियों के बेहतर प्रतिनिधित्व की गारंटी की जायेगी.

 

18. बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करेंगे

क: बच्चों के कुपोषण को खत्म करने के लिए तुरंत और समयबद्ध कदम उठाए जायेंगे. आँगनबाड़ी का बजट बढ़ाया जायेगा.

ख: स्कूलों के मध्यान्ह भोजन में माँस, मछली और अंडों को अनिवार्यत: शामिल किया जायेगा, बच्चों की सुरक्षा के लिए बने नेशनल ऐक्शन प्लान के लिए बजट मुहैय्या कराया जायेगा.

ग: 12वीं कक्षा तक सबके लिए मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था की जायेगी.

घ: संकट में फँसे बच्चों के लिए हर जिले में संकट केंद्र की स्थापना करेंगे. आरोपित और अपराधों के शिकार बच्चों के लिए खास तौर पर प्रशिक्षित सम्वेदनशील पुलिसकर्मियों की भर्ती की जायेगी.

च: बाल श्रम से बच्चों को बचाने के कानून में प्रतिगामी बदलाव को समाप्त करेंगे. बाल श्रम से बचाए गए बच्चों के परिवारों का आर्थिक पुनर्वास सुनिश्चित किया जायेगा.

छः जेजे कानून में उन संशोधनों को समाप्त करेंगे जिनके मुताबिक कुछ खास अपराधों में बच्चों से बड़ों की तरह व्यवहार किया जाता है.

ज: जेजे होम्स का सोशल ऑडिट होगा. बच्चों से सम्बंधित मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष न्यायालय बनाये जायेंगे.

 

19: नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा में सुधार करेंगे

क: आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पावर्स) ऐक्ट (एएफएसपीए), नेशनल सेक्योरिटी ऐक्ट (एनएसए), अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) ऐक्ट (यूएपीए), 499 (क्रिमिनल डिफेमेशन) और सेडिशन 124 A (देशद्रोह) जैसे दानवीय कानूनों को खत्म किया जायेगा. इन सभी और टाडा जैसे पुराने दानवीय कानून में गिरफ़्तार बनाए गए सभी कैदियों को रिहा करेंगे.

ख: देश भर में हिरासतों में होने वाले अत्याचारों और हत्याओं के मामलों की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक उच्च स्तरीय ट्रिब्यूनल गठित की जायेगी.

ग: पुलिस को सम्विधान के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए पुलिस-सुधार लागू किया जायेगा. हर एनकाउंटर और हिरासत में हुई हर हिंसा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जायेगी.

घ: झूठे मुकदमों में फँसाए गए और जेल में डाले गए हर मुसलमान और आदिवासी के प्रति सार्वजनिक तौर पर सरकार माफी माँगे और मुआवजा सुनिश्चित किया जायेगा.

च: एनआईए और आईबी को संसद के प्रति ज़िम्मेदार बनाया जायेगा.

छः जेल मैनुअल में सुधार करेंगे और उसे कड़ाई से लागू करेंगे.

ज: जेलों में बढ़ती संख्या को रोकने के लिए जमानत का नियम बनाया जायेगा. यह तय किया जायेगा कि बिना अपराध सिद्ध हुए लोगों को सालों तक जेल न काटनी पड़े. मौत की सजा को समाप्त किया जायेगा.

झ: कश्मीर, उत्तर पूर्व और बस्तर के नागरिक इलाकों का सैन्यीकरण बंद करेंगे.

ट: कश्मीर की अवाम की आकांक्षा के अनुरूप कश्मीर समस्या के राजनैतिक हल की गारंटी करेंगे.

ठ: घृणा-अभियान और बहिष्करण के लिए एनआरसी के इस्तेमाल की कोशिशों का प्रतिरोध करेंगे.

ड: ‘संदेहास्पद गैर कानूनी प्रवासियों के लिए किसी भी राज्य में बने डिटेंशन कैम्प को बंद किये जायेंगे

 

20: प्रेस की आजादी बहाल की जायेगी

दुनिया में प्रेस की आजादी के सूचकांक में भारत अब तक के सबसे निचले पायदान, 180 देशों में से 138वें पर पहुँच गया है. पिछले पाँच सालों में मोदी सरकार के काम-काज पर खोजपरक रिपोर्ट लिखने वाले पत्रकारों को हत्या व बलात्कार की धमकियाँ मिली हैं, उनपर मानहानि के मुकदमे दायर हुए हैं. किशोरचंद्र वांगखेम मणिपुर में गिरफ़्तार हुए, सोमारू नाग और संतोष यादव को छत्तीसगढ़ में गिरफ़्तार किया गया और उन्हें यातनाएँ दी गयीं. गौरी लंकेश की हत्या कर दी गयी. इन सबसे आगे कारपोरेट मालिकाने वाले टीवी समाचार का बड़ा हिस्सा फासीवादी प्रचार में लिप्त है. वह हर तरह की झूठी और घृणा भरी कहानियाँ फैला रहा है और और हर असली खबर को या तो दबा रहा है या कोशिश कर रहा है कि उससे लोगों का ध्यान भटक जाय.

क: मानहानि और ऑफ़िशियल सिक्रेट्स कानून को समाप्त किया जायेगा.

ख: सूचना अधिकार को मजबूत करेंगे, उसको कमजोर बनाने वाले प्रावधानों को वापस लिया जायेगा.

ग: सचेतकों (व्हिसिलब्लोअर्स) की सुरक्षा के लिए कानून बनाया जायेगा.

घ: अभिव्यक्ति की आजादी को कानून द्वारा दी गयी सुरक्षा मजबूत की जायेगी.

च: पत्रकारों को धमकाने, उत्पीडि़त करने और उनकी हत्या करने वाले अपराधियों पर समयबद्ध रूप से मुकदमा चलाया जायेगा और सजा दी जायेगी.

 

21: सम्वैधानिक नैतिकता और तर्क को प्रोत्साहित करेंगे

क: 'काला जादू' और अंधविश्वास के नाम पर हिंसा और शोषण खत्म करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मानव बलि और अन्य अमानवीय प्रथाओं के रोकथाम व उन्मूलन का कानून लागू करेंगे.

ख: जाति, जेंडर, लैंगिकता, साम्प्रदायिकता, नस्लवाद और विकलांगता के आधार पर भेदभाव के खिलाफ सम्वैधानिक नैतिकता की समझ विकसित और प्रोत्साहित करने तथा भारत की भाषायी व सांस्कृतिक विविधता एवं तार्किकता के सिद्धांतों को प्रोत्साहित करने व इन विषयों पर जन शिक्षा अभयान चलाने के लिए हर केंद्र व राज्य सरकार अभियान चलाने के समुचित संसाधन मुहैय्या कराने की गारंटी करेंगे.

ग: हर स्कूल व कॉलेज में सम्वैधानिक नैतिकता को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जायेगा.

घ: पुलिस और न्यायपालिका में भर्ती होने वाले सभी लोगों के लिए सम्वैधानिक नैतिकता की परीक्षा पास करना अनिवार्य किया जायेगा. ऐसी परीक्षाएँ सेवारत लोगों के कार्यकाल के दौरान भी समय-समय पर ली जायेंगी.

च: सम्वैधानिक नैतिकता के खिलाफ अपने पूर्वग्रहों को बनाए रखने या जाति/जेंडर/साम्प्रदायिक कट्टरता फैलाने वाले सभी सरकारी अधिकारियों के खिलाफ 'कोई उदारता नहीं' की नीति लागू की जायेगी.

 

22: पर्यावरणीय अधिकार एवं सुरक्षा:

मोदी सरकार ने व्यवस्थित तरीके से सभी पर्यावरणीय अधिनियमों को कमजोर कर दिया है. अभी सरकार ने छत्तीसगढ़ के घने हासदो अरंड जंगल के परसा इलाके में 1,70,000 हेक्टेयर जमीन अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड की शाखा राजस्थान कोईलरीज लिमिटेड (आरसीएल) को खुले कोयला खनन की पर्यावरणीय इजाजत दी है.

क: जंगलों और पर्यावरण का विनाश बंद करेंगे. पर्यावरणीय अधिनियमों और वनाधिकार कानून को मजबूत बनायेंगे.

ख: पर्यावरण और वन सुरक्षा कानूनों को कमजोर करते हुए या उनका उल्लंघन करते हुए पर्यावरणीय इजाजत देना बंद किया जायेगा.

ग: संवहनीय विकास को प्रोत्साहित करेंगे.

घ: परमाणविक परियोजनाओं, बड़े बाँधों और अन्य जन विरोधी परियोजनाओं को बंद किया जायेगा.

च: परमाणविक आपूर्तिकर्ताओं की ज़िम्मेदारी बढ़ायी जायेगी. परमाणविक शक्ति के विस्तार पर रोक लगेगी.

छः संवहनीय ऊर्जा विकल्पों में निवेश किया जायेगा.

ज: विशेषज्ञों द्वारा पर्यावरणीय असर की समुचित समीक्षा के बगैर पहाड़ी इलाकों में 'हर मौसम वाली सड़क' बनाना बंद किया जायेगा.

झ: गंगा समेत भारत की सभी प्रदूषित नदियों को साफ करेंगे.

ट: शहरी पर्यावरण की रक्षा करेंगे. पेड़ काटना बंद होगा. झीलों व अन्य जलाशयों की सुरक्षा होगी. शहरी प्रदूषण की रोकथाम के लिए तत्काल समुचित पहलकदमी ली जायेगी.

 

23: चुनाव सुधार

क: ‘सबसे ज़्यादा वोट पाकर जीतने' की प्रणाली की जगह पर समानुपातिक प्रतिनिधित्व लागू करेंगे.

ख: ईवीएम में गड़बड़ी करने की व्यापक आशंकाओं के कारण मतपत्रों से चुनाव की व्यवस्था में वापस लौटेंगे.

ग: चुनाव बॉन्ड योजना समाप्त करेंगे और चुनावी चंदे में पारदर्शिता लायेंगे. चुनावी चंदे को सूचना अधिकार कानून के दायरे में लाया जायेगा.

घ: चुनाव आयोग हर प्रत्याशी को सार्वजनिक मंच मुहैय्या कराएगा ताकि वह अपना चुनावी घोषणापत्र व एजेंडा लोगों के सामने पेश कर सके.

च: जनादेश से गद्दारी करने वाले चुने हुए प्रतिनिधियों को 'वापस बुलाने का अधिकार' जनता को दिया जायेगा.

 

24: संघीयता को मजबूत करेंगे, संघीय पुनर्निर्माण और राज्यों का पुनर्गठन किया जायेगा

क: राज्यपाल का पद समाप्त करेंगे क्योंकि संघीय ढाँचे को नुकसान पहुँचाने के लिए इस पद का बार बार दुरुपयोग किया जाता है.

ख: पिछड़े राज्यों व क्षेत्रों को विशेष दर्जा दिया जायेगा और क्षेत्रीय असमानता को खत्म करने के लिए हर सम्भव सांस्थानिक समर्थन दिया जायेगा.

ग: विभिन्न राज्यों की माँग पर सहानभूतिपूर्वक और सम्पूर्णता में विचार करने हेतु दूसरे राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया जायेगा.

घ: कार्बी-आंगलांग और दीमा हसाओ जिलों के स्वायत्त राज्य के दर्जे की गारंटी करने के लिए धारा 244 A को लागू किया जायेगा.

च: दिल्ली और पुदुच्चेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जायेगा.

 

25: स्वतंत्र और मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों के लिए भारत की विदेशनीति को नई दिशा

क: भारत की विदेश नीति को अमेरिकी विदेश नीति के हितों और प्राथमिकताओं से पूरी तरह मुक्त करेंगे.

ख: अपने सभी छोटे-बड़े पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बंध और आपसी सहयोग की नीति अपनायी जायेगी.

ग: युद्ध अपराध के सभी दोषियों को सजा दिलाने के लिए भारत सक्रिय भूमिका निभायेगा.

घ: रोहिंग्या शरणार्थियों को शरणार्थी का दर्जा दिया जायेगा और उनकी नागरिकता व सुरक्षा की गारंटी के लिए म्यांमार पर दबाव बनाया जायेगा.

च: भारत दुनिया भर में विदेशी सैन्य शिविरों को समाप्त करवाने की दिशा में प्रयास करेगा.

छः भारत फिलिस्तीन में कब्जे को खत्म कराने के लिए प्रयास करेगा और इजराइल के साथ सभी सैन्य व व्यापारिक सम्बंध समाप्त किये जायेंगे.

भाकपा(माले) (लिबरेशन) भारत के हर नागरिक से अपील करती है कि भारत के लोकतंत्र को बचाने, फासीवादी भाजपा को हराने और संसद में भाकपा(माले) (लिबरेशन) व अन्य वाम दलों की ताकत बढ़ाने के लिए वोट दें. भाकपा(माले) (लिबरेशन) की ओर से चुने गए सांसद गैर-राजग सरकार बनाने की सभी सम्भावनाओं को तलाशेंगे और संसद में जनांदोलनों की बुलंद आवाज होंगे. वे सदैव जनता के हितों की रक्षा के लिए समर्पित रहेंगे.

वर्ष28