किसान संगठनों के आह्वान पर 25 सितंबर को आयोजित भारत बंद में मजबूती से उतरेगा माले

press conference in patna 28 august

 

नेशनल माॅनिटाइजेशन पाइपलाइन देश को बेचने की पाइप लाइन है, इस पाइप लाइन को तुरंत बंद होना चाहिए: दीपंकर भट्टाचार्य

पटना, 27 अगस्त 2021

तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के संयुक्त आह्वान पर आगामी 25 सितंबर को आहूत भारत बंद को सफल बनाने में भाकपा-माले पूरी मजबूती से उतरेगा. साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा विगत 70 सालों में सृजित व निर्मित की गई राष्ट्रीय संपत्तियों को बेचने का मुद्दा भी बंद का प्रमुख मुद्दा होगा. बिहार में महागठबंधन के दलों से बातचीत की प्रक्रिया आरंभ हो गई है. हमारी कोशिश होगी कि इन दोनों मुद्दों पर बिहार में बंद को असरदार बनाया जाए.

उक्त बातें आज पटना में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य ने कही. संवाददाता सम्मेलन में माले राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो के सदस्य धीरेन्द्र झा व अमर भी शामिल थे.

संवाददाता सम्मेलन में कामरेड दीपंकर ने कहा कि देश की जनता को गुमराह करने के लिए देश की संपत्तियों को बेचने व निजीकरण के कार्यक्रम का नाम माॅनिटाइजेशन रख कर सरकार कह रही है कि जनता की सम्पत्तियां संपत्ति बेची नहीं जा रही है बल्कि किराए पर लगाई जा रही है और इससे अगले 4 साल में 6 लाख करोड़ रु. का राजस्व मिलेगा.

लेकिन यह बहुत खतरनाक प्रस्ताव है. देश की तमाम सड़कें, रेल लाइन, स्टेडियम, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट सरीखी राष्ट्रीय संपत्ति का निर्माण देश की जनता के पैसे से हुआ है. अब सरकार उसी को बेचकर या किराया लगाकर देश चलाना चाहती है. आखिर इन संपत्तियों के किराएदार कौन हैं? अंबानी-अडानी जैसे काॅरपोरेट ही किराएदार हैं, जिनसे सरकार की गहरी दोस्ती है. यदि किराएदार के पक्ष में किराया तय कर दिया जाए, तो इससे देश को केवल नुकसान ही नुकसान होगा. दरअसल, किराया पर लगाने का मतलब इन संपत्तियों को बेच डालना ही है. बिहार में भी पटना जंक्शन, एयरपोर्ट, सड़कें आदि बेचने की एक सूची जारी हुई है.

दूसरी बात, इस कदम से करोड़ों छोटे कारोबारियों के रोजगार मारे जाएंगे. सड़कों, हाइवे अथवा रेलवे स्टेशनों के दोनों तरफ छोटे-छोटे करोड़ों रोजगार हैं. इन संपत्तियों को किराया पर दे देने के बाद ये रोजगार खत्म हो जाएंगे. यह पूरा प्रयास आम लोगों के खिलाफ है. इसलिए, आम लोगों के रोजगार व देश की आर्थिक व्यवस्था की सुरक्षा के लिए इस पर रोक लगनी चाहिए. इस नेशनल माॅनिटाइजेशन पाइपलाइन यानि देश को बेचने की पाइप लाइन को बंद करना बेहद जरूरी है. 25 सितंबर को भारत बंद में इस सवाल को माले मजबूती से उठायेगी.

कामरेड दीपंकर ने बिहार की सम्भीर परिस्थिति पर बोलते हुए कहा कि संपूर्ण उत्तर बिहार सहित गंगा-सोन-पुनपुन के किनारे बाढ़ ने भारी तबाही मचा रखी है. किसानों को फसल क्षति का मुआवजा मिलना चाहिए. मक्के की फसल बर्बाद हो गई, लेकिन सरकार फसल क्षति शून्य दिखला रही है. बाढ़ पीड़ितों के प्रति सरकार का जो रवैया है, उसके खिलाफ जनता में व्यापक आक्रोश है. यदि जनता और आक्रोशित होती है तो इसके लिए पूरी तरह सरकार जिम्मेवार है. नीतीश कुमार की सरकार पटना के 5 किलोमीटर के दायरे की सरकार बन कर रह गई है. इसके खिलाफ दरभंगा सहित पूरे राज्य में माले, खेग्रामस का आंदेालन चल रहा है.