गड़हनी (भोजपुर) में संकल्प सभा : सत्ता और बन्दूक से नहीं दबेगी जनता की आवाज

का. दीपंकर

भोजपुर जिले के गड़हनी प्रखंड अंतर्गत बराप पंचायत के मुखिया और भाकपा(माले) तथा अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता का. अरुण सिंह की हत्या और अगिआंव विधान सभा क्षेत्र में बढ़ते सामंती हमले के खिलाफ विगत 31 अगस्त को गड़हनी प्रखंड  मैदान में एक संकल्प सभा आयोजित हुई जिसे पार्टी महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने संबेाधित किया. सभा में गड़हनी प्रखंड  सहित अगिआंव विधानसभा के अन्य इलाकों से आए मजदूर-किसानों, छात्र-युवाओं और महिलाओं ने भागीदारी की. उमस भरी गर्मी के बावजूद वे अपने हाथों में लाल झंडा लिए जुलूस के शक्ल में गांव-गांव से निकले और ‘का. अरुण सिंह के हत्यारों को गिरफ्तार करो’ व ‘शहीदों के अरमानों को मंजिल तक पहुंचायेंगे’ आदि नारे लगाते हुए सभास्थल पहुंचे.

सभा में पहुंचने के दौरान दुलारपुर गांव में का. दीपंकर भट्टाचार्य का दौ सौ से भी अधिक मोटरसाइकिल सवार नौजवानों ने जोरदार स्वागत किया और जुलूस के साथ उन्हें सभास्थल पर पहुंचाया. का. दीपंकर भट्टाचार्य द्वारा झंडोत्तोलन, शहीद का. अरुण सिंह सहित तमाम शहीदों को श्रद्धांजलि देने तथा जनकवि निर्माेही के द्वारा शहीद गीत गायन के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ.

सभा को संबोधित करते हुए का. दीपंकर ने कहा कि आज देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है. आर्थिक मंदी की मार हमेशा से गरीबों, मजदूर- किसानों को ही झेलनी पड़ती थी. लेकिन इस बार देश के बैंककर्मी से लेकर नौकरीपेशा लोग भी डरे हुए हैं. उन्हें भय है कि न जाने कब उनकी नौकरी खत्म हो जाएगी. लेकिन, सरकार इस दौर में भी केवल पूंजीपतियों की आर्थिक सेहत पर ही ध्यान दे रही है, ताकि उन पर आर्थिक मंदी की मार नहीं पड़े. मोदी सरकार ने आरबीआई से जबरन एक लाख छियत्तर हजार करोड़ रुपए ले लिया और उसे गरीबों व किसानो को देने के बजाए बैंकों के माध्यम से पूंजीपतियों को दे दिया.

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सरकार बोल रही है कि हमने कश्मीरियों के फायदे के लिए धारा-370 को हटाया. लेकिन, इसके विरोध में वहां के लोगों ने ईद नही मनाई. वे जानते हैं कि उनके अधिकारों को खत्म किया गया है. अगर  कश्मीर का आरक्षण देशभक्ति के नाम पर खत्म किया गया है तो समाजिक आरक्षण भी समाजिकता के नाम पर खत्म किया जाएगा. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इसीलिए कहा है कि आरक्षण पर बात होनी चाहिए. देश एक भारी आर्थिक मंदी से गुजर रहा है और भाजपा धारा-370 और आरक्षण को हटाने पर बात कर रही है.

उन्होंने कहा कि सभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों को का. अरुण सिंह की हत्या की निंदा करनी चाहिए क्योंकि वे भाकपा(माले) का नेता होने से पहले एक जनप्रतिनिधि थे. भोजपुर की लड़ाई मुखिया के चुनाव को लेकर ही शुरू हुई थी. आज 50 वर्ष बाद भी अगर का. अरुण सिंह जैसे लोग मुखिया बनते हैं और गरीबों, किसानों, मजदूरों और भाकपा(माले) की बात करते हैं तो उनकी हत्या कर दी जाती है. यह साबित करता है कि हमें सामंती-अपराधी ताकतों से अभी भी एक लंबी लड़ाई लड़नी होगी.

का. दीपंकर ने कहा कि दिल्ली-पटना में ऐसी सरकारें हैं जो विरोध की आवाज को उठने नहीं देना चाहती. यहां तक कि पंचायत में भी वे यही चाहती हैं. वे सरकार, सत्ता और बन्दूक के बल पर लोकतंत्र और जनता के अधिकार को छीन लेना चाहती हैं. भोजपुर में ऐसे लुटेरों-हत्यारों के खिलाफ संघर्षों की शानदार विरासत रही है. भाकपा(माले) इस शानदार विरासत को आगे बढ़ाएगी और तमाम शहीदों के सपनों को मंजिल तक पहुंचायेगी.

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सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय कमेटी सदस्य का. मनोज मंज़िल ने कहा कि जब-जब शहीदों का खून इस धरती पर गिरा, तब-तब माले का झंडा और ऊंचा हुआ. का. अरुण सिंह दलितों-गरीबों के लोकप्रिय नेता थे. जनता उनकी हत्या करनेवाली सामंती-अपराधी ताकतों को मुकम्मल जवाब देगी.

पार्टी केन्द्रीय कमेटी के सदस्य व विगत चुनाव में  लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी का. राजू यादव ने कहा कि का. अरुण सिंह नए समाज का निर्माण करना चाहते थे. उनकी हत्या से भाकपा(माले) का कारवां रुकनेवाला नही है. भाजपा प्रचारित करती है कि देश में हिन्दू खतरे में हैं. लेकिन, उसने दिल्ली-तुगलकाबाद में संत रविदास का मंदिर को तोड़वाने का काम किया. क्या वे हिन्दू संत नहीं थे?

सभा को सम्बोधित करते हुए मुखिया अरुण सिंह के पुत्र अंशु सिंह ने कहा कि हम अपने पिता के विचारों और उनके कार्याे को जन-जन तक पहुंचाएंगे. सभा को तरारी क्षेत्र से विधायक का. सुदामा प्रसाद, इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष का. अजित कुशवाहा, इंसाफ मंच के राज्य सचिव का. कयामुद्दीन अंसारी, ऐपवा की जिला सचिव का. इन्दु सिंह, अरुण सिंह आदि ने भी संबोधित किया. सभा का संचालन पूर्व विधायक व चर्चित किसान नेता का. चंद्रदीप सिंह ने किया.

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सभा में भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो के सदस्य व वरिष्ठ नेता का. स्वदेश भट्टाचार्य, पार्टी के राज्य सचिव का. कुणाल, जिला सचिव का. जवाहरलाल सिंह, गड़हनी प्रखंड के सचिव का. नवीन कुमार, शहीद का. अरुण सिंह के भाई मुन्ना सिंह व सुनील सिंह काउप पंचायत की मुखिया का. कलावती देवी और बड़गांव पंचायत के मुखिया का. बिनोद चौधरी भी मौजूद थे.

विगत 5 अगस्त 2019 को अपराधियों ने का. अरूण सिंह की उनके अपने ही गांव सहंगी में दिनदहाड़े गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी. गांव-पंचायत के गरीब लोगों को उनकी हत्या की सूचना मिली तो वे आक्रोश व दुख में डूब गये. इसमें समाज के हर वर्ग व तबके – गरीब, दलित, मजदूर, बटाईदार किसान, पिछड़े और ऊंची जातियों के भी न्यायपसंद लोग शामिल थे. तुरत ही 500 से ज्यादा लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और उन्होंने हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग पर सड़क जाम कर दिया. प्रखंड के कई  पंचायतों के मुखिया भी इस सड़क जाम में शामिल हुए.

 वे सबके दुःख-सुख में साथ रहते थे. किसी से भेदभाव नहीं करते थे. जनता से गहरा जुड़ाव के कारण ही वे  दो बार मुखिया चुने गये थे. उन्होंने जनता के मुद्दों को लेकर कई आंदोलनों के नेतृत्व किया था। सहज-दोस्ताना संबंध की वजह से वे अपने साथियों और आम जनता – सबके प्रिय थे. उनकी इसी लोकप्रयिता से घबराकर उनकी हत्या की गई.

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वर्ष28
अंक38