भुवनेश्वर में ऐक्टू की कार्यशाला

ऐक्टू ने 31 अगस्त - 1 सितंबर 2019 को मजदूर वर्ग पर मोदी-नीत भाजपा सरकार के ताजातरीन फासिस्ट हमलों तथा उसकी फूटपरस्त रणनीति को समझने और इसका मुकाबला करने की समझ बनाने के मकसद से नए उभरते कार्यकर्ताओं को लेकर भुवनेश्वर में एक कार्यशाला आयोजित की. इस कार्यशाला में मजदूर वर्ग आंदोलन में आ रहे बदलावों और चुनौतियों पर विचार किया गया. इसमें चार विषय थे: भारतीय मजदूर वर्ग आंदोलन के इतिहास की प्रमुख घटनाएं, मजदूर वर्ग आंदोलन की वर्तमान चुनौतियां (श्रम की बदलती संरचना, नीतियां और ट्रेड यूनियन रुख), मौजूदा ट्रेड यूनियन कानून और प्रस्तावित चार कोड, तथा मजदूर वर्ग की सामाजिक भूमिका व उसका राजनीतिकरण. मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय से डा. प्रभु महापात्र ने इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की.

इस कार्यशाला ने औपचारिक व अनौपचारिक क्षेत्रों के असंगठित श्रमिकों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया. इसमें मजदूर वर्ग के बीच उथल-पुथल के दौर से गुजर रहे नए तबकों को चिह्नित करने के तरीकों पर भी चर्चा की गई. पार्टी की वर्गीय दिशा को बुलंद रखते हुए कामगारों की विशाल बहुसंख्या को आकर्षित करने के लिए किए जा रहे नए प्रयोगों पर भी चर्चा हुई. इसे आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न किस्म के मंच बनाने तथा मजदूर वर्ग के राजनीतिकरण के लिए नई भूमिकाएं अपनाने पर भी विचार किया गया.

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पहले सत्र में प्रो. महापात्र ने मजदूर वर्ग आंदोलन में राष्ट्रवाद की ऐतिहासिक भूमिका पर रोशनी डाली. उन्होंने बताया कि मजदूर वर्ग के सिद्धांत को ‘कारखाना’ आधारित ‘पुरुष’ मजदूर की अवधारणा से आगे जाना होगा. कामरेड राजीव डिमरी ने इस सत्र को संबोधित करते हुए मजदूर वर्ग के नए संघर्ष सृजित करने के लिहाज से ट्रेड यूनियन आंदोलन में ऐक्टू की ऐतिहासिक भूमिका पर चर्चा की. दूसरे सत्र को श्रम शोधकर्ता व चेन्नै के अर्थशास्त्री डा. विजय भास्कर और का. विद्यासागर ने संबोधित किया. भास्कर ने मजदूर वर्ग की बदलती संरचना, नए उभरते तबके, मजदूरी के मुद्दे, बढ़ती बेरोजगारी आदि पर चर्चा की. कामरेड विद्यासागर ने नेहरूवादी जमाने से लेकर नव-उदारवादी सुधारों के मौजूदा दौर तक सरकारी नीतियों में आए बदलावों को विस्तार से बताया और मजदूर वर्ग की बदलती संरचना तथा नए उभरते मुद्दों के साथ इन नीतियों के संबंध के बारे में चर्चा की. तीसरे सत्र में का. क्लिफ्टन डी’ रोजारियो ने मोदी-नीत भाजपा सरकार द्वारा काॅरपोरेटों के हक में किए जा रहे बदलावों और आज के नए कानूनों का तुलनात्मक विश्लेषण किया. अंतिम सत्र में कार्यशाला में शामिल कार्यकर्ताओं को सेक्टर के आधार पर आठ ग्रुपों में बांटा गया और मजदूर वर्ग की गोलबंदी से जुड़े अलग-अलग सवालों पर बहस करने को कहा गया. प्रतिनिधियों ने खुलकर इन बहसों में हिस्सा लिया.

कार्यशाला का समाहार करते हुए का. शंकर ने इन बहसों में उभरे मुद्दों और मजदूर वर्ग के राजनीतिकरण पर जोर देते हुए कामगारों के विभिन्न तबकों व श्रेणियों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि हमारे संघर्षों के दौरान बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक मर्यादा से जुड़े मुद्दों को भी उठाया जाना चाहिए. वर्ग संघर्ष को आगे ले जाने के लिए जरूरी हो तो सामाजिक किस्म के नए आंदोलनों के साथ भी प्रयोग किया जाना चाहिये. कार्यशाला में फैसला लिया गया कि अभियान की समाप्ति पर मोदी सरकार के नए हमलों के खिलाफ राज्य स्तर पर प्रतिवाद और रैलियां संगठित की जाएंगी.

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वर्ष28
अंक39