मजदूर-किसानों को गुलाम बनाने वाले 4 श्रम कोड और 3 कृषि कानूनों को रद्द करने, 12 घंटे के कार्य दिवस और 50 वर्ष में जबरन सेवानिवृति आदेश को वापस लेने, असंगठित मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने, सभी मजदूरों को समुचित लाॅकडाउन राहत देने, चौतरफा बेरोजगारी और छंटनी पर रोक लगाने, हर हाथ को काम व काम का पूरा दाम देने की मांग पर विगत 3 जनवरी को केन्द्रीय श्रम संगठनों द्वारा देशव्यापी विरोध कार्यक्रम के आह्वान का पालन करते हुए विगत 3 फरवरी 2021 को ऐक्टू, व अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) ने राजधानी पटना समेत बिहार के कई शहरों में प्रदर्शन आयोजित किए. इन प्रदर्शनों के दौरान 4 श्रम कोड व जबरन सेवानिवृत्ति आदेश की प्रतियां भी जलायी गईं और इन काले आदेशों की रदद् करने की मांग की गई.

विदित हो कि ‘भारत को अंबानी-अडानी कंपनी राज से मुक्त करो’ के नारे के साथ ऑल इंडिया सेंट्रल कौंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) ने 1 फरवरी से 15 फरवरी तक देशव्यापी अभियान चलाने की योजना बनाई है जिसके तहत विगत 3 फरवरी 2021 को 4 श्रम कोड के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन आयोजित हुए.

पटना के बुद्ध स्मृति पार्क के समक्ष ऐक्टू व अन्य ट्रेड यूनियनों द्वारा सयुंक्त रूप से मजदूरों को गुलाम बनाने वाले 4 श्रम कोड की प्रतियां जलाते हुए सभा आयोजित हुई. ऐक्टू महासचिव आरएन ठाकुर की अध्यक्षता में हुई सभा को ऐक्टू के नेता रणविजय कुमार, बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ की नेता सरोज चौबे, सीटू के नेता गणेश शंकर सिंह, इंटक के नेता चन्द्रप्रकाश सिंह, ऐटक के नेता कौशलेंद्र कुमार वर्मा, एआईयूटीयूसी नेता सूर्यकर जितेंद्र आदि ने संबोधित किया.

राजधानी पटना के ही कंकड़बाग में ऐक्टू से जुड़े निर्माण मजदूरों ने ऐक्टू राज्य सचिव रणविजय कुमार, भाकपा(माले) नेता पन्नालाल सिंह, अरविंद प्रसाद व शयाम प्रसाद साव के नेतृत्व में 4 श्रम कोड की प्रतियां जलाईं. फुलवारीशरीफ स्थित सुधा डेयरी के मजदूर यूनियन के नेतृत्व में सैकड़ों सुधा डेयरी मजदूरों ने डेयरी गेट से जुलूस निकाल कर फुलवारी शरीफ मुख्य सड़क पर 4 श्रम कोड आदेश की प्रतियों को जलाया और मोदी-नीतीश सरकार के विरोध में नारे लगाये. यूनियन के अध्यक्ष रणविजय कुमार, महासचिव मनीष कुमार निनी, रंजीत कुमार, सुनील कुमार आदि मजदूर नेताओं ने प्रतिवाद प्रदर्शन का नेतृत्व किया.

ऐक्टू से सम्बद्ध वैंकोस कर्मचारी यूनियन के सैकड़ों कर्मचारियों ने दोपहर में फैक्ट्री गेट के समक्ष 4 श्रम कोड कानून, 3 कृषि कानून और 12 घंटे के कार्य दिवस आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए केंद्र व राज्य की मोदी-नीतीश सरकारों के विरोध में नारेबाजी की. न्यू सचिवालय के सामने महासंघ (गोप गुट) के महासचिव प्रेमचंद कुमार सिन्हा, जिला सचिव शत्रुध्न प्रसाद सिंह, विद्यालय रसोइया संघ की राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे आदि अन्य नेताओं व इनसे जुड़े सैकड़ों कर्मियों ने 50 वर्ष में सरकारी कर्मियों को जबरन सेवानिवृति करने सम्बन्धी नीतीश-भाजपा सरकार के आदेश व 4 श्रम कोड कानून की प्रतियों को जलाया.

नेताओं ने उक्त मांगों पर 20 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर ऐक्टू द्वारा धरना-प्रदर्शन के आयोजन की घोषणा की. ऐक्टू नेताओं ने केन्द्रीय बजट को थोक भाव में विदेशी विनिवेश, निजीकरण और कम्पनी राज को बढावा देने तथा रोजगार सृजन, आम आदमी के आमदनी में बढ़ोतरी और आम आदमी की क्रय शक्ति में इजाफा करने की दिशा में पूरी तरह से विफल साबित होने वाला बजट बताया.

मुजफ्फरपुर के औराई प्रखंड अंतर्गत जोंकी गांव में ऐक्टू की ओर से मजदूर विरोधी 4 श्रम कोड, किसान विरोधी तीन कृषि कानून और बिजली बिल 2020 की प्रतियां जलाई गईं. नेताओं ने कहा कि 4 श्रम कोड के जरिये मजदूरी के निर्धारण के मानदंड मजदूर विरोधी हैं, यूनियन बनाने के नियमों को कठोर बनाया गया है तथा निबंधन के नियम मालिकपक्षीय है. इनकी प्रतियां जलाते हुए लोगों ने इन तीनों अलग कानूनों को निरस्त करने की मांग की.

इस कार्यक्रम में ऐक्टू के जिला संयोजक मनोज कुमार यादव, बिट्टू, रामसोहाग, दिनेश मंडल, पृथ्वी शर्मा, अगनू मंडल, शंकर मंडल, रामउद्देश्य, जयमंगल, मोहन पासवान, रामलखन पासवान, चंदेश्वर साह, बल्ली, कौशल, रामसंयोग मंडल, सीताराम, मुंद्रिका, लक्ष्मी राय, जितेंद्र राय, धर्मवीर महतो, रामसंयोग, रामनरेश पासवान, पहाड़ी राम सहित करीब तीन दर्जन लोग शामिल थे.

रांची में ऐक्टू की स्थानीय कमिटी ने अलबर्ट एक्का चौक पर इनकी प्रतियां जलाई. मजदूरों को संबोधित करते हुए ऐक्टू के प्रदेश महासचिव कामरेड शुभेंदु सेन ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार मजदूर और किसान विरोधी फैसले ले रही है. लेबर कोड और कृषि कानून मजदूरों और किसानो को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय आर्थिक गुलामी की ओर ले जाएंगे. केन्द्रीय बजट देश में पूरी तरह से कंपनी राज कायम करने की तैयारी है. निर्माण मजदूरों के नेता का. भुवनेश्वर केवट ने कहा कि लेबर कोड और कृषि कानून के बाद अब जो केन्द्रीय बजट आया है उससे साफ हो चला है कि सरकार देश की आर्थिक संसाधनों को बेचने कीं तैयारी में है. कोयला मजदूरों के नेता जगरनाथ उरांव ने कहा कि सरकार काॅरपोरेट कंपनियों के समक्ष नतमस्तक हो गई है. श्रम कोड मजदूरों के गुलामी की दस्तावेज हैं जिनके खिलाफ व्यापक स्तर पर आंदोलन होगा. कार्यक्रम में भीम साहू, एनामुल हक, छात्र नेता त्रिलोकी नाथ, नौरीन अख्तर, तरुण कुमार, सीमा कोरिया, विश्वनाथ दास, शांति सेन, अल्मा खलखो, राजू महतो समेत कई मजदूर उपस्थित थे.

धनबाद जिला के मुगमा एरिया ईसीएल के लखीमाता कोलियरी में मजदूरों की सभा की गयी और चारों श्रम कोड की प्रतियों को जलाया गया.

इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) में भी अपने अखिल भारतीय आह्वान के तहत ट्रेड यूनियनों ने श्रमिक संहिताओं और कृषि कानूनों की प्रतियां फूंकी. संयुक्त ट्रेड यूनियन इलाहाबाद ने सिविल लाइन्स के पत्थर गिरजा के पास स्थित धरना स्थल पर मज़दूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं, किसान विरोधी चार कृषि कानूनों और जनविरोधी बजट के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा. श्रमिक नेताओं ने श्रम सहिताओं, कृषि कानूनों, बजट तथा नये बिजली कानून की प्रतियां भी जलाईं.

आल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू), आल इण्डिया सेण्ट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एक्टू), आल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेण्टर (एआईयूटीयूसी) तथा इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन सेंटर (इंटक) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस विरोध कार्यक्रम के दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार काॅरपोरेट परस्त नीतियां अपनाते हुए जनता के विभिन्न हिस्सों के खिलाफ एकतरफा तरीके से कानून थोप रही है. कोरोना काल की आड़ लेकर सरकार ने बिना किसान संगठनों से बात किये कृषि कानून पारित किये तो बिना श्रमिकों की बात सुने श्रमिक संहिताएं पारित कर दीं तथा बिना छात्रों-शिक्षकों से बात किये नई शिक्षा नीति उन पर थोप दी. इनको पारित करते समय न्यूनतम संसदीय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया.

उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानूनों से देश में खेती तथा खाद्य सुरक्षा दोनों पर ही असर पड़ेगा. साथ ही, किसानों की जमीनें छिनने का भी खतरा बना रहेगा. उन्होंने पुलिस के दमन, झूठे दुष्प्रचार, भाजपाई गुंडों से लड़ते हुए देश के किसानों के बहादुराना संघर्ष को सलाम करते हुए उनके साथ एकजुटता प्रदर्शित की और कहा कि कृषि कानूनों की तरह ही चारों श्रम संहिताएं भी देश के मजदूरों को बर्बाद कर देंगी. देश के श्रमिकों की क्या हालत है और सरकार का उनके प्रति क्या रूख है? यह कोरोना के समय में प्रवासी मजदूरों की स्थिति से ही स्पष्ट हो गया था. करोड़ों मजदूरों को भूखे-प्यासे, सैकड़ों मील पैदल चलने के लिए छोड़ दिया गया था. मज़दूरों को विभिन्न श्रम कानूनों के चलते जो थोड़ी-बहुत सहूलियतें मिलती थीं, वे भी जब इन श्रम कानूनों को समाप्त कर जब नई श्रमिक संहिताएं लागू कर दी जायेंगी, तब समाप्त हो जायेंगी. इन श्रमिक संहिताओं के बाद एक मजदूर दिन भर मेहनत करने के बाद भी सम्मान के साथ नहीं जी पायेगा.

वक्ताओं ने केन्द्र सरकार के जनविरोधी बजट पर भी जम कर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार विनिवेश के नाम पर देश की बहुमूल्य सम्पदाओं को बेच रही है. आत्मनिर्भरता का नारा देने वाले सब कुछ काॅरपोरेट घरानों के हाथों में सौंप रहे हैं. सरकार ने तमाम काॅरपोरेट घरानों को कर में अनाप-शनाप छूट दे रखी है. बैंकों के अरबों का कर्ज डकार कर तमाम पूंजीपति सरकार की नाक के नीचे से भाग जाते हैं पर सरकार जनता पर बोझ बढ़ाते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम को आसमान पर पंहुचा देती है.

उन्होंने कहा कि कोरोना काल, बिना तैयारी के लाॅकडाउन तथा उसके चलते बेतहाशा बढ़ी हुई बेरोजगारी के समय शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार निर्माण के क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की जरूरत थी, परन्तु सरकार ने ऐसा नहीं किया. बैंक, बीमा, रेल आदि के निजीकरण से न केवल बेरोजगारी बढ़ेगी बल्कि देश की वित्तीय आत्मनिर्भरता भी संकट में आ जायेगी. वक्ताओं ने कहा कि देश का मजदूर-किसान, छात्रा-युवा मिलकर इन जनविरोधी नीतियों के खिलाफ अपने संघर्षों को तेज करेगा.

कार्यक्रम की अध्यक्षता राम सागर तथा संचालन डाॅ. कमल उसरी ने किया. कार्यक्रम में पूर्व सांसद धर्मराज पटेल, सभासद शिव सेवक, एससी बहादुर, रवि मिश्रा, नसीम अंसारी, माता प्रसाद, अविनाश मिश्रा, आनंद मालवीय, सुनील मौर्या, हरिश्चन्द्र द्विवेदी, अनिल वर्मा, बाबूलाल, माताप्रसाद, मुस्तकीम अहमद, शैलेश पासवान, मुन्नी लाल यादव, अंतस सर्वानन्द, गायत्री गांगुली, भूपेन्द्र पांडेय, अखिल विकल्प, सीताराम विद्रोही, आशुतोष तिवारी भी उपस्थित रहे.

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