दिल्ली की सीमाओं पर विगत दो माह से जारी किसान आंदोलन में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2021) के घटनाक्रम के बाद से एक नया उभार आया है. अब गाजीपुर बाॅर्डर और वहां पर धरना में डटे उत्तर प्रदेश के आंदोलनकारी किसानों व उनके संगठनों की भूमिका मुख्य चर्चा में है. लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन और आंदोलनों के दमन के लिए कुख्यात योगी राज वाले उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का इस नए उभार ने नई राजनीतिक संभावनाओं को जन्म दिया है.

गौरतलब है कि दिल्ली की सीमा पर मौजूद किसानों के संयुक्त मोर्चे ‘किसान एकता मोर्चा’ के द्वारा यह आह्वान किया गया था कि 30 जनवरी 2021 के दिन देश भर में भूख-हड़ताल का आयोजन किया जाए. इस आह्वान का पालन करते हुए पूरे उत्तर प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित हुए.

30 जनवरी को किसान आंदोलन के समर्थन में इलाहाबाद में किसान एकजुटता मंच ने उपवास रखा. जिले में एक अन्य जगह ग्राम वीर काजी में भी किसानों ने उपवास रखा. कार्यक्रम में देवानंद ने कहा कि केंद्र की सरकार जो कृषि कानून ले आई है उन कानूनों से देश के बड़े पैमाने पर किसानों-मजदूरों व गरीबों के हक खत्म करने की साजिश है और यह कानून अडानी-अंबानी एवं कारपोरेट घरानों को बढ़ाने के पक्ष में साबित होगा. इसीलिए देश का किसान समझदारी से यह कह रहा है कि देश की सत्ता में बैठी हुई केंद्र की सरकार इस कानून को जितनी से जितनी जल्दी हो सके वापस करे.मोदी जी किसानों के आंदोलन को दबाना चाहते हैं लेकिन गोली और बंदूक की ताकत पर इस देश के किसान दबेंगे नहीं और यह आंदोलन कानून के वापस होने तक जारी रहेगा.

उन्होंने कहा कि लाल किले पर जो धार्मिक झंडा फहराया गया उसमें भाजपा की साजिश खुल चुकी है और वह व्यक्ति दीप सिद्धू जिसने झंडा फहराया भाजपा का एजेंट है. हम मांग करते हैं जिन लोगों ने भी हमारे देश की विरासत व ऐतिहासिक धरोहर पर अवैध रूप से झंडा फहराया है और जो भी लोग दोषी हैं, उनको सरकार सख्त सजा दे और जो किसान वैधानिक रूप से और लोकतांत्रिक तरीके से कार्यक्रम कर रहे हैं उनको झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश बंद की जाए. कार्यक्रम में मुख्य रूप से राजेश पटेल, बद्री प्रसाद, रवि प्रकाश, मंजूदेवी, गुड़िया देवी आदि लोग शामिल रहे.

फैजाबाद में वाम दलों ने संयुक्त रूप से उपवास किया. जालौन और सोनभद्र जिले के कोंगा, झोझवा व घघरी में किसान महासभा के कायकर्ताओं ने उपवास रखा.

उधर, अखिल भारतीय किसान महासभा मथुरा के नेताओं ने गाजीपुर बाॅर्डर पर 29 जनवरी को अपने कैम्प पर पहुंच कर किसानों की एकजुटता में हिस्सा लिया. 30 जनवरी को बाजना क्षेत्र के आसपास के गावों की किसान पंचायत ने जिसमें किसानों की भारी संख्या जुटी थी, कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली बाॅर्डर पर आंदोलनरत किसानों का समर्थन किया तथा समस्या का बिना हल किये, साजिश कर वहां से बलपूर्वक हटाने की योगी-मोदी सरकार की साजिशों की घोर निंदा की. हजारों किसानों की भीड़ में महासभा के राज्य उपाध्यक्ष नत्थीलाल पाठक, राज्य कमेटी सदस्य मनोज वर्मा, जिला अध्यक्ष गेंदा लाल, जिला मंत्री राकेश चौधरी, जिला सयुक्त मंत्री तारा सिंह, चौधरी लक्ष्मी नारायण, मास्टर सलीम खान, डाॅ. चंद्रभान सिंह, कप्तान खान, तेरे सिंह, प्रताप सिंह, होसियार सिंह, एजेन्द्र सिंह, चंद्रपाल सिंह, नेपाल सिंह. दिनेश, विष्णु पाठक, दिगम्बर सिंह, उदयवीर सिंह, प्रेमपाल सिंह, आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे. किसानों ने काले कानून रद्द करो, एमएसपी की गारंटी का नया कानून बनाओ, दमनकारी तानाशाह सरकार मुर्दाबाद, किसान एकता जिंदाबाद, आदि गगनभेदी नारे लगाये.

लखनऊ में लालकुआं स्थित भाकपा(माले) जिला कार्यालय पर किसान एकता मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर भाकपा(माले) के बैनर तले एक दिवसीय भूख हड़ताल का आयोजन किया गया. भूख-हड़ताल के माध्यम सेे किसान आंदोलन से अपना समर्थन एवं संवेदना जाहिर करते हुए तीनों कृषि कानूनों को तत्काल बिना शर्त वापस लेने की मांग भी की गई. इस दौरान सरकार द्वारा कार्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल की भी तैनाती की गई थी. पुलिस बल की इस तैनाती को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की गई.

मौके पर मौजूद पार्टी के राज्य सचिव कामरेड सुधाकर यादव ने कहा कि आज महात्मा गांधी के शहादत दिवस को याद करने का सबसे बेहतर तरीका किसान आंदोलन के साथ एकता बनाते हुए उसकी मांगों को मजबूत करना ही हो सकता है. सिंघु बाॅर्डर पर 29 जनवरी को भाजपाई गुंडों द्वारा किसानों पर हुए हमले की निंदा-भर्त्सना करते हुए उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब सिर्फ कृषि बचाने का नहीं बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का भी बन गया है. देश के बड़े जनमानस को सक्रिय रूप से इसमें भागीदारी बढ़ानी चाहिए. भूख-हड़ताल में शामिल भाकपा(माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य का. रामजी राय ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर डटा किसान ही अब इस देश में लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई का अगुआ है. किसानों के साथ देश भर की जनता को एकजुटता दिखानी होगी. यह आंदोलन भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता संग्राम के बरक्श दूसरी मिसाल पेश करेगा.

भूख-हड़ताल में मुख्य रूप से भाकपा(माले) राज्य स्थायी समिति के सदस्य का. राधेश्याम मौर्य, जिला प्रभारी का. रमेश सिंह सेंगर, आरबी सिंह, मधुसूदन मगन, चंद्रभान गुप्ता, शिवदास, नौमी लाल, रामसेवक रावत, रमेश शर्मा, ऐपवा नेता मीना सिंह, इनौस के राजीव गुप्ता, आइसा के शिवम सफीर, राॅबिन सिंह आदि समेत सैकड़ों लोग शामिल रहे.

– अरूण कुमार

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गाजीपुर बाॅर्डर पर हर दिन बढ़ती भागीदारी

बाजना क्षेत्र के गांव सद्दीकपुर से 3 जनवरी को एक जत्था पुनः कुछ रसद लेकर किसानों के आंदोलन गाजीपुर बाॅर्डर पर स्थित अखिल भारतीय किसान महासभा के कैम्प में पंहुचा. जत्था ने लंगर में रसद सौपा और रात को रहकर अगले दिन शाम को गाजीपुर बाॅर्डर से वापस होगा. उक्त जत्था में महासभा के राज्य उपाध्यक्ष साथी नत्थीलाल पाठक, डाक्टर ज्ञानेंद्र सिंह, फूलचंद, राम नायब, बजरंग, शिवराज सिंह, विष्णु पाठक, नेपाल सिंह, श्यामवीर सिंह, गोपाल सिंह, रामेश्वर तिवारी एवं शिवकुमार सिंह आदि मुख्य रूप से शामिल थे. किसान आंदोलन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न गावों से प्रतिदिन दूनी, रात चौगुनी की तादाद में किसानों और मजदूरों की संख्या में इजाफा हो रहा है. गावों और इलकों में हर रोज कहीं न कंही किसान पंचायतों का लगना जारी है. किसानों का यह उबाल और जागरूकता दर्शाती है कि किसान आने वाले समय में भाजपा सरकार की घंटी बजाने के मूड में है. उन्होंने तय कर लिया है कि जव तक कृषि कानून वापस नहीं होंगे तव तक वे किसान आंदोलन को जारी रखेंगे.

4 फरवरी 2021 को दिल्ली-उत्तरप्रदेश सीमा पर भारी सुरक्षा वाले प्रदर्शन स्थल गाजीपुर में सैकड़ों किसान सर्द रात और बृहस्पतिवार की सुबह हो रही बूंदा बांदी के बीच भी नए कृषि कानूनों को निरस्त करवाने की अपनी मांग को लेकर डटे रहे .

कई किसानों ने दिल्ली-मेरठ राजमार्ग के एक हिस्से में अस्थायी तंबू लगा रखे हैं. वहीं कई किसान ट्रैक्टर की ट्राॅलियों में ही आराम करते हैं. कुछ किसान खुले आसमान के नीचे सड़क पर बिछायी गई दरियों पर भी डटे रहते हैं.

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने के विरोध के बाद प्रदर्शन स्थल के आसपास की सड़कों से कीलें हटा दी गई है. वहीं दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि कीलों का स्थान बदला गया है.

हालांकि दिल्ली पुलिस के उपायुक्त (पूर्व) दीपक यादव ने कहा कि सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह कायम रहेगी. उन्होंने कहा, “ऐसी तस्वीरें और वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं, जिसमें दिख रहा है कि गाजीपुर में कीलें निकाली जा रही हैं. लेकिन, इनका स्थान बदला जा रहा है और सीमा पर सुरक्षा इंतजाम यथावत रहेंगे.” प्रदर्शनकारियों ने कहा, “जिस तरह वे कीलें हटा रहे हैं, उसी तरह कानून भी वापस लेंगे.”

इसी तरह दिल्ली के अन्य बाॅर्डर सिंघु और टिकरी पर भी किसान विपरीत हालत में पिछले 72 दिनों से दिन-रात सड़कों पर डटे हुए हैं. उनके हौसलें को न भीषण ठंड हिला सकी और न ही बिना मौसम की बरसात. वे लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं.

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