बिहार सरकार द्वारा सरकारी सेवकों को 50 वर्ष की आयु पूरी होने पर कार्यदक्षता की समीक्षा के नाम पर जबरन सेवानिवृत्त करने के बिल्कुल ही अनुचित और मनमाने पूर्ण आदेश का विरोध बढ़ता ही जा रहा है.

सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के ज्ञापांक-6832 दिनांक 23-07-2020 द्वारा निर्गत आदेश में हर छमाही 50 वर्ष या उससे ऊपर आयु के सरकारी सेवकों को कार्य दक्षता, आचरण व निष्ठा की समीक्षा के आधार पर सेवानिवृत्त करने का प्रावधान कर दिया गया है. विदित हो कि बिहार सेवा संहिता के नियम 74 (क) और (ख) में अपवाद और विशेष परिस्थिति में अनिवार्य सेवानिवृत्ति और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के प्रावधान हैं जिसे उक्त आदेश द्वारा सामान्य और दैनन्दिन प्रक्रिया बना दिया गया है. इससे अफसरशाही व निरंकुशता बढ़ेगी और कर्मियों को आतंक के साये में काम करने को मजबूर होना पड़ेगा.

बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) ने इस सरकारी आदेश के विरोध में विगत 3 फरवरी को राज्य भर में प्रदर्शन आयोजित किए. पटना के नया सचिवालय सहित पूरे बिहार में सभी जिला मुख्यालयों पर उक्त सरकारी आदेश की प्रतियों को जलाया गया. साथ ही, संविदा कर्मियों को सरकारी कर्मी घोषित नहीं करने से संविदा कर्मियों में व्याप्त भारी आक्रोश को संगठित करने हेतु उन्हें बंधुआ मजदूर बनने को बाध्य करनेवाले 22 जनवरी 2021 को निर्गत सरकारी आदेश की प्रतियों को भी जलाया गया.

महासंघ (गोप गुट) ने मांग किया है कि सरकार कर्मियों की जबरिया सेवानिवृत्ति आदेश को अविलंब रद्द करे और सभी संविदा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने और उनको नियमित करने का आदेश जारी करे. आने वाले दिनों में सभी सरकारी संवर्ग के कर्मचारी-शिक्षक चाहे वे नियमित या संविदा पर हो, एकजुट होकर इसके खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन  करने की योजना भी बना रहे हैं.

पटना में यह प्रतिवाद कार्यक्रम नया सचिवालय स्थित विकास भवन के सामने आयोजित किया गया जिसका नेतृत्व  महासचिव प्रेमचंद कुमार सिन्हा, राज्य सचिव निरंजन कुमार सिन्हा व जिला सचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने किया.

उक्त सरकारी संकल्प की प्रति को जलाने के बाद एक संक्षिप्त सभा हुई जिसको एक्टू के राज्य सचिव रणविजय कुमार, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शंभू नाथ सिंह, पीएमसीएच कर्मचारी यूनियन के महासचिव कृष्णनंदन सिंह, पुलिस चतुर्थवर्गीय कर्मचारी संघ के महासचिव मोहन शंकर तिवारी व अध्यक्ष रामानुज राय, ग्रामीण कार्य विभाग कर्मचारी यूनियन के महासचिव सूर्यवंशी सिह, पथ एवं भवन निर्माण विभाग कर्मचारी संघ के राज्य कोषाध्यक्ष छठुलाल आदि ने संबोधित किया. इस प्रतिवाद कार्यक्रम मे सैकड़ों लोग उपस्थित रहे.

इसके अलावा गया में जियालाल प्रसाद व रामचंद्र प्रसाद, औरंगाबाद में राम इशरेस सिंह, नागेंद्र सिंह व सत्येंद्र कुमार अरवल में बच्चु कुमार व रघुवर रजक, कैमूर में विद्यासागर प्रभाकर, रोहतास में उमेश शर्मा, सईद आलम व ललन सिंह, बक्सर में महेंद्र प्रसाद व लवकुश सिंह, भोजपुर में उमेश कुमार सुमन, वैशाली में चंद्र भूषण चौधरी व सहदेव पंडित, नालंदा में अनिल कुमार, मुंगेर में रंजन कुमार व सतीश कुमार सतीश, भागलपुर में श्याम नंदन सिंह, मुजफ्फरपुर में अरुण कुमार सिंह, महेंद्र महतो व महेंद्र राय, मोतिहारी में भाग्य नारायण चौधरी व भूपेंद्र कुमार लाल, बेतिया में राज किशोर सिंह, दरभंगा में नंदन कुमार सिंह व संतोष पासवान, समस्तीपुर में अजय कुमार, मधुबनी में सुधिष्ठ नारायण झा व संजय झा, सुपौल में देव कुमार, सहरसा में माधव प्रसाद सिंह एवं अमरेंद्र कुमार सिंह, पूर्णिया में अरविंद कुमार सिंह व अशोक कुमार मिश्र, कटिहार में धीरेंद्र कुमार साह एवं सुदामा सिह, मुंगेर में सतीश प्रसाद व रंजन कुमार, खगड़िया में चंद्रशेखर मंडल, छपरा में सैयद मो. नज्मी व अर्जुन सिंह, अररिया में मणि भूषण झा, किशनगंज में तारिक सईद आदि ने विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया.