आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरी नही देने की नीतीश सरकार के फरमान के खिलाफ छात्र संगठन आइसा ने अपने राज्यव्यापी प्रतिरोध दिवस के तहत बेगूसराय में आक्रोश मार्च निकाला और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला जलाया.

छात्रों का जत्था जिला सचिव अभिषेक आनंद व नगर अध्यक्ष सोनू फर्नाज के नेतृत्व में अंबेडकर चौक स्थित जिला कार्यालय से निकल कर कचहरी रोड, नगर थाना चौक, नगरपालिका चौक होते हुए समाहरणालय के उत्तरी द्वार पर पहुंचा जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंकने के बाद प्रदर्शन किया गया.

इस बीच ‘नीतीश सरकार होश में आओ, तानाशाही फरमान वापस लो’, ‘छात्र आंदोलनों पर बंदिशें लगाना बन्द करो’, ‘लोकतंत्र पर हमला बन्द करो’ जैसे गगन नारे लगाएं  गए. मौके पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए आइसा के राष्ट्रीय कार्यकरणी सदस्य वतन कुमार ने कहा कि छात्र आंदोलन और जेपी आंदोलन का वारिस होने का ढोंग रचने वाले नीतीश कुमार ने अपने शासन काल में लगातार कैम्पसों में लोकतांत्रिक छात्र आंदोलन को खत्म करने और छात्र आंदोलनों पर दमन करने का काम किया है. इसी दिशा में नीतीश सरकार का तानाशाही फरमान जारी हुआ है. यह पूरी तरह से गैर लोकतांत्रिक कदम है जिसके खिलाफ आज राज्य भर के छात्र-नौजवान आंदोलन कर रहे है .

मौके पर जिला अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि इससे पहले भी नीतीश सरकार ने जनविरोधी कानून लाया है जिसमें कहा गया है कि अगर कोई छात्र, नौजवान या आम नागरिक सरकार के किसी विधायक, मंत्री और किसी अधिकारी के खिलाफ सोशल मीडिया पर  कोई टिप्पणी करते हैं तो उनके ऊपर मुकदमा दर्ज किया जाएगा और उनपर कानूनी कार्यवाही की जाएगी. दरअसल नीतीश सरकार बिहार को भी यूपी के तर्ज पर आरएसएस की प्रयोगशाला बनाना चाहती है जिसे प्रदेश का छात्र-नौजवान बर्दास्त नही करेंगे.

कार्यक्रम में राहुल यदुवंशी, शिवम रजक, कुंदन शर्मा, पंकज कुमार, गोपाल कुमार, गोलू मिश्रा, रौशन कुमार, राजा पटेल, मो. अखलाख, अंकित कुमार, अंकुश कुमार भी शामिल थे. सरकार के तानाशाही फरमान के खिलाफ और शिक्षा-रोजगार की मांग को लेकर आइसा ने आगामी 1 मार्च 2021 को विधानसभा घेराव करने की योजना बनाई है.

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