पंचायतों को जनता के हक-अधिकारों के संघर्ष का केन्द्र बनाओ!

पंचायतों पर जनता की दावेदारी व वर्चस्व को मजबूत करो!

1. परिप्रेक्ष्य व दिशा:  बिहार में पंचायत चुनाव निर्दलीय आधार पर होता है जो चुनाव में हर तरह के अवसरवादी व सिद्धांतहीन विचार व व्यवहार को बढ़ावा देता है. निर्दलीयता की आड़ में सत्ताधारी पार्टी पंचायत चुनाव में जनता के आक्रोश का निशाना बनने से भी बच जाती है. चुनाव अगर दलीय होता तो पार्टी के नीति, सिद्धांत व व्यवहार पर बात होती.

भाकपा(माले) शुरू से ही दलीय आधार पर चुनाव की मांग करती आई है और चुनाव में हर प्रकार के अवसरवादी व्यवहार – धनबल, बाहुबल, जातिवाद, सांप्रदायिकता आदि का विरोध करती है. वह पंचायतों को जनता के हक-अधिकार के संघर्षों का केंद्र बनाना, ग्रामीण शासक वर्ग के खिलाफ जनता की दावेदारी व वर्चस्व को मजबूत करना, पंचायतों पर भ्रष्ट ठेकेदार और नौकरशाही के वर्चस्व का विरोध करना, योजना बनाने से लेकर उसके क्रियान्वयन तक पंचायतों पर जनता की निगरानी व नियंत्रण स्थापित करना और सर्वाेपरि, केंद्र व राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध करना, आदि उद्देश्यों के तहत पंचायत चुनाव में भागीदारी करती है. इसलिए पार्टी संगठन को अपनी स्वतंत्रत और पहलकदमी बरकरार रखनी होगी तथा उसे पंचायत के क्रियाकलाप व प्रतिनिधि पर निर्भर बन जाने के प्रति सचेत रहना होगा. साथ ही, उसे पंचायतों में पार्टी की दिशा लागू करने की गारंटी भी करनी होगी और पंचायत संस्था का इस्तेमाल जनता के अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करने और उसे आगे बढ़ाने में करना चाहिए.

2. उम्मीदवार की योग्यता: (क) बदनाम, भ्रष्ट व पतित पंचायत प्रतिनिधियों को किसी भी हालत में फिर से खड़ा नहीं किया जाएगा. पार्टी निर्देशों का गंभीर उल्लंघन करने वाले प्रतिनिधियों को भी फिर से उम्मीदवार बनाने से परहेज करना चाहिए. गलती स्वीकार करने वाले और पार्टी द्वारा तय अनुशासनिक कार्रवाई का पालन करने वाले प्रतिनिधि को फिर से उम्मीदवार बनाने पर विचार किया जा सकता है. (ख) उम्मीदवार का पार्टी सदस्य (पूर्ण या उम्मीदवार) होना अनिवार्य है और जन संघर्षों में उनकी सक्रियता व भागीदारी का रिकार्ड होना चाहिए. महज किसी नेता के परिवार का सदस्य होने या निकट संबंधी होने के आधार पर महिला उम्मीदवार खड़ा नहीं किया जा सकता. जनसंघर्षों में उनकी खुद की भागीदारी व सक्रियता जरूर होनी चाहिए, चाहे वह न्यूनतम ही क्यों न हो. (ग) उम्मीदवार को लोकप्रिय व अनुशासित होना चाहिए. पदलोलुप नहीं होना चाहिए. (घ) उम्मीदवार के चयन में योग्यता प्रमुख बात है, लेकिन एक ही परिवार से कई पदों पर खड़ा करने से परहेज करना चाहिए.

3. उम्मीदवारों के चयन की प्रणाली: (क) वार्ड सदस्य एवं पंच के लिए उम्मीदवार का चयन पार्टी समर्थक जनता की ग्राम बैठकों में किया जाएगा. उम्मीदवार चयन में पार्टी शाखा और लोकल कमेटी को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. ग्राम बैठक से प्राप्त नामों का अनुमोदन पार्टी की प्रखंड/एरिया कमेटी करेगी. (ख) मुखिया, सरपंच व पंचायत समिति के लिए उम्मीदवारों का चयन पार्टी सदस्यों की पंचायत स्तरीय जीबी में किया जाएगा. वे तीनों पद के लिए तीन-तीन नामों का प्रस्ताव प्रखंड/एरिया कमेटी को भेजेंगे. इन बैठकों में उम्मीदवारों का प्राथमिकता क्रम तय नहीं किया जाएगा. प्रखंड/एरिया कमेटी प्राथमिकता क्रम तय कर जिला कमेटी के पास अनुमोदन के लिए भेजेगी. प्रखंड/एरिया कमिटी किसी नाम में संशोधन भी कर सकती है. पार्टी जिला कमेटी का निर्णय अंतिम होगा. (ग) जिला परिषद के लिए प्रत्येक सीट पर तीन-तीन उम्मीदवारों का नाम प्राथमिकता क्रम में तय कर प्रखंड/एरिया कमेटी जिला कमेटी के पास भेजेगी. उम्मीदवार का चयन जिला कमेटी करेगी. जिला परिषद के लिए उम्मीदवार का चयन पंचायत के पार्टी सदस्यों की जीबी में नहीं किया जाएगा. (घ) वार्ड सदस्य, पंच, मुखिया, सरपंच व पंचायत समिति के लिए उम्मीदवार के चयन के लिए आयोजित पार्टी समर्थक जनता की ग्राम बैठक और पार्टी सदस्यों की पंचायत स्तरीय जीबी प्रखंड/एरिया कमिटी या निकट की उच्चतर कमिटी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक की उपस्थिति में होगी. (च) उम्मीदवारों के चयन में इस बात पर खास ध्यान रखना होगा कि पार्टी आधार विभाजित न हो. इसलिए उम्मीदवारों के चयन में सदस्यों के साथ ज्यादा से ज्यादा राय-विचार और उनकी व्यापक भागीदारी व सहमति की गारंटी करनी होगी. फिर भी, किसी कारणवश अगर सहमति न बन पाए तो मामले को जिला कमेटी को सौंप देना चाहिए. (छ) उम्मीदवार के चयन में जीबी से किसी पद पर प्राप्त सर्वसम्मत राय को गंभीरता से लेना चाहिए. आम तौरपर नीचे की राय का सम्मान करना चाहिए. लेकिन इसे शर्त नहीं बनाया जा सकता. किसी खास स्थिति में जिला कमिटी कोई दूसरी राय भी बना सकती है. (ज) सघन काम के इलाके में जिला परिषद के अध्यक्ष/प्रखंड प्रमुख पद हासिल करने को ध्यान में रखकर संपूर्ण योजना बनानी चाहिए और उम्मीदवारों का चयन करना चाहिए. आरक्षण को ध्यान में रखते हुए जीत की गारंटी वाली सीट पर अध्यक्ष व प्रमुख पद के उम्मीदवार को खड़ा करना चाहिए. (झ) उम्मीदवार चयन के समय यह ध्यान जरूर रखना चाहिए कि पार्टी की प्रखंड या जिला कमेटी के अधिकांश या तमाम सदस्य उम्मीदवार न बन जाएं. ऐसा होने पर चुनाव का स्वतंत्र संचालन मुश्किल हो जाएगा. जहां तक संभव हो पार्टी के जिला व प्रखंड सचिव को उम्मीदवार नहीं बनाया जाना चाहिए.

4. शपथ पत्र: पंचायत चुनाव के जरिए ग्रामीण क्षेत्र में पार्टी के राजनीतिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने, पंचायत के जरिए जनता को मिलनेवाला तमाम लाभ जनता तक पहुंचाने, विधान परिषद चुनाव में भाकपा(माले) के उम्मीदवार को वोट देने, उपमुखिया, उपसरपंच, प्रखंड प्रमुख, उपप्रमुख तथा जिला परिषद के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव में या अविश्वास प्रस्ताव आने पर पार्टी द्वारा लिए गए फैसले के मुताबिक मतदान करने, पंचायत संस्थाओं पर नौकरशाही के दबदबे और राज्य सरकार के गैर जरूरी हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज उठाने, जनता के प्रति जवाबदेह बने रहने और साल में कम-से-कम एक बार अपने काम की रिपोर्ट जनता के समक्ष पेश करने का शपक्ष लेंगे. चयनित उम्मीदवार पंचायत स्तर पर आयोजित पार्टी सदस्यों की जीबी और जिला परिषद के उम्मीदवार किसी एक पंचायत में यह शपथ ले सकते हैं.

5. चुनाव प्रचार अभियान: (क) निर्दलीयता की आड़ में चुनाव को अराजनीतिक व सिद्धांतहीन बनाने की शासक वर्गीय साजिश का भंडाफोड़ करते हुए तमाम समसामयिक राजनीतिक मुद्दों और ग्रामीण गरीबों व किसानों से जुड़े मुद्दों को भी चुनाव प्रचार में उठाना चाहिए. विधानसभा चुनाव में राज्य सरकार को मिले जनादेश के आलोक में भी प्रचार चलाना चाहिए. (ख) जनता की बैठक बुलाकर क्षेत्र की समस्याओं को संग्रहित व सूचीबद्ध कर घोषणा पत्र-/संकल्प पत्र जारी करना चाहिए. क्षेत्र के पूर्व उम्मीदवार की आलोचना भी इसमें देनी चाहिए. जीती हुई सीटों परं अपनी उपलब्धियां दर्शानी चाहिए. (ग) पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में पार्टी की ओर से पर्चा देना चाहिए. गैर दलीय होने के कारण हम सीधे पार्टीे उम्मीदवार कह कर प्रचार नहीं कर सकते. (घ) क्षेत्र की ठोस स्थिति के अनुसार पार्टी के तमाम उम्मीदवारों को संयुक्त या स्वतंत्र प्रचार में उतरना चाहिए. इस संदर्भ में पार्टी का निर्देश मानना चाहिए. (च) किसी तरह जीत हासिल कर लेने के लिए तिकड़मबाजी, गैरउसूली व अवसरवादी व्यवहार व गठजोड़ का कड़ा विरोध करना होगा.

6. समर्थन व तालमेल: (क) तालमेल का भी हमारा उद्देश्य गरीबों की दावेदारी को बढ़ाना है. अंधाधुंध तरीके से तालमेल नहीं किया जाना चाहिए. (ख) जहां हमारे उम्मीदवार खड़े न हों वहां जिला कमेटी के अनुमोदन से जनपक्षीय व स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवार का समर्थन किया जा सकता है. वामपंथी उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी. (ग) तालमेल से हासिल होनेवाले लाभ का ठोस मूल्यांकन करते हुए जिला कमेटी के अनुमोदन से जनपक्षीय व स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवार के साथ तालमेल किया जा सकता है. (घ) राजद व कांग्रेस पार्टियां दलीय आधार पर पंचायत चुनाव में नहीं उतरती हैं. इसलिए उनके साथ पार्टी स्तर पर कोई तालमेल नहीं हो सकता. फिर भी, महागठबंधन की पार्टियों से जुड़े उम्मीदवार विधानसभा की हमारी जीती हुई सीटों पर समर्थन के लिए विशेष दबाव बना सकते हैं. इस संदर्भ में गुण-दोष व लाभ-हानि का ठोस मूल्यांकन कर जिला कमेटी फैसला करेगी. (च) जन विरोधी व प्रतिक्रियावादी भूमिका वाले उम्मीदवारों और भाजपा गठजोड़ समर्थित उम्मीदवारों के साथ किसी भी हालत में तालमेल नहीं किया जाएगा.

7. प्रमुख एवं जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव: (क) प्रखंड प्रमुख एवं जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव सीधे पार्टी की जिला कमेटी के नेतृत्व में संचालित होगा. (ख) अच्छी-खासी संख्या में सीट जीतने पर ही प्रमुख या जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव में भाग लिया जाएगा. अन्यथा, आमतौर पर हम उससे दूर रहेंगे. (ग) अगर हम प्रमुख या जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव लड़ते हैं तो जन पक्षीय व स्वच्छ छवि वाले पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्यों से समर्थन लिया जा सकता है या उनके साथ कोई तालमेल किया जा सकता है. महागठबंधन से जुड़े उम्मीदवारों के साथ हम आंख मूंदकर तालमेल नहीं कर सकते. हमें गुण-दोष और लाभ-हानि का मूल्यांकन करके ही कोई कदम उठाना चाहिए. प्रमुख या जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव में महागठबंधन की पार्टियां हस्तक्षेप करती हैं. हम भी इन चुनावों में महागठबंधन की पार्टियों से बात कर सकते हैं. (घ) प्रमुख या जिला परिषद अध्यक्ष पर लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव या गिराने-बनाने की गतिविधि से आमतौर पर हम दूर रहेंगे. इस संबंध में सीधे जिला कमेटी के आदेश का पालन करना होगा.

8. ग्राम पंचायत, पंचायत समिति व जिला परिषद में हमारी भूमिका: (क) पंचायतों में हमारी भूमिका विपक्ष की होगी. विपक्ष की हमारी भूमिका पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम बहुमत में हैं या अल्पमत में. हमारी विपक्षी भूमिका केंद्र व राज्य सरकारों की जनविरोधी नीतियों, उनकी राजनीति तथा शक्तिशाली स्थानीय शासक वर्ग के प्रभुत्व के खिलाफ होगी. हमें भ्रष्टाचार और अफसरशाही मुक्त माॅडल पंचायत बनाने का प्रयास करना होगा. (ख) पार्टी के विजयी उम्मीदवारों को पंचायतों पर जनता की निगरानी व नियंत्रण स्थापित करने के लिए हरेक योजना का चुनाव ग्राम सभा के जरिए करना होगा और साल में कम से कम एक बार जनता के बीच अपने कामकाज की रिपोर्ट पेश करनी होगी. सरकारी योजना को लागू करने वाले एजेंट की बजाय हमारे पंचायत प्रतिनिधियों को सरकार व स्थानीय शासक वर्ग के खिलाफ विपक्ष की भूमिका निभानी होगी और जन संघर्षों का नेता बने रहना होगा. उन्हें नए सामाजिक आधार में पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए. (ग) पंचायत समिति व जिला परिषद में हमें जनपक्षीय एवं स्वच्छ छवि वाले प्रतिनिधियों के साथ मिलकर विपक्षी ग्रुप बनाने का प्रयास करना चाहिए.

9. विधान परिषद चुनाव: पहले हम विधान परिषद चुनाव का वहिष्कार करते थे. लेकिन बड़ी संख्या में विभिन्न पदों पर पंचायत प्रतिनिधि जीतने के बाद हमारी पार्टी ने विधान परिषद चुनाव में भाग लेना शुरू किया है. ग्राम पंचायत कोटे के विधान परिषद चुनाव में पार्टी द्वारा तय उम्मीदवार के पक्ष में तमाम पंचायत प्रतिनिधियों को मतदान करना होगा. किसी भी खरीद-फरोख्त की प्रवृत्ति से सख्ती से निपटा जाएगा.

10. भत्ता के बारे में: पंचायत प्रतिनिधियों को सरकार से प्राप्त होने वाली भत्ते की राशि को जिला कमेटी का कोष माना जाएगा. जिला कमेटी जरूरत के आधार पर उन्हें भत्ते की राशि प्रदान करेगी. शेष बची राशि का 20 प्रतिशत राज्य कमेटी तथा 80 प्रतिशत  जिला कमेटी के पास रहेगा.

11. बागी उम्मीदवार, प्रतिनिधि वापसी व इस्तीफा: (क) कई बार पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ कोई पार्टी सदस्य बागी उम्मीदवार बनकर खड़ा हो जाते हैं. ऐसी हालत में सर्वप्रथम संबंधित बागी उम्मीदवार को समझाने-बुझाने का प्रयास करना चाहिए. नहीं मानने पर संबंधित क्षेत्र के पार्टी सदस्यों व कार्यकर्ताओं को एकताबद्ध कर ऐसे सदस्य पर अनुशासनिक कार्रवाई करनी चाहिए. (ख) जिला कमेटी के निर्देश पर हमारे पंचायत प्रतिनिधियों को राजनीतिक जरूरत के आधार पर पद से इस्तीफा देने के लिए हमेशा तैयार रहना होगा. (ग) पार्टी नीति व अनुशासन का घोर उल्लंघन करने और भ्रष्ट, पतित व जन विरोधी बन जाने पर संबंधित पंचायत प्रतिनिधि के खिलाफ प्रतिनिधि वापसी का आंदोलन चलाया जाएगा और उन्हें इस्तीफा देने के लिए बाध्य किया जाएगा.

पंचायत संबंधी नीतियों में संशोधन का अधिकार सिर्फ राज्य कमेटी को है. पार्टी के तमाम ढांचे – पार्टी शाखा, लोकल कमिटी और प्रखंड-एरिया-जिला कमेटी को चाहिए कि उपरोक्त नीतियों का पार्टी सदस्यों और जनता के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार करें.

बिहार राज्य कमिटी, भाकपा(माले)  
24 फरवरी, 2021