बिहार के पटना जिले के पुनपुन प्रखंड के खैरा ग्राम में किसान पंचायत में दर्जनों किसान जुटे और मोदी सरकार द्वारा पास कराए गए तीनों कृषि कानूनों को किसानों को गुलाम बनाने वाली कानून बताते हुए किसान आंदोलनों को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया.

किसान पंचायत को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य सहसचिव काॅ. उमेश सिंह किसानों का यह आंदोलन सिर्फ कृषि कानूनों के खिलाफ ही नहीं, लोकतंत्र, संविधान और देश बचाने के साथ-साथ अस्तित्व बचाने का संघर्ष है. आपदा की घड़ी में मोदी सरकार ने देश के सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को पूंजीपतियों के हाथों बेचना शुरू कर दिया. हद तो तब हो गई जब रेल, एयरपोर्ट, अस्पताल आदि का निजीकरण करने के बाद खेती-किसानी को भी मोदी सरकार ने अंबानी-अडानी जैसे काॅरपोरेट घरानों को बेचने की तैयारी कर ली और जैसे-तैसे संसद से नया कृषि कानून पारित करवा दिया. इसके खिलाफ देश के किसान जीने-मरने की हद तक आंदोलन कर रहे हैं क्योंकि जब अनाज ऊजाने वाला ही नहीं बचेगा तो कैसे बचेगा देश.

किसान पंचायत का संचालन करते हुए किसान नेता मुन्ना चौहान ने किसान आंदोलन को आज के समय में दुनिया का सबसे बड़ा आंदोलन बताते हुए दो-टूक शब्दों में कहा कि यह लड़ाई खाना देने वालों और खाना लूटने वालों के बीच की लड़ाई है जिसमें हमें अपना पक्ष तय करना है.

वहीं भाकपा(माले) नेता व पूर्व जिला पार्षद मुन्ना चौहान ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए सीधे शब्दों में कहा कि जनता के द्वारा चुनकर आई यह सरकार जैसी नीतियां ले आई है उसने साफ कर दिया है कि यह जनतांत्रिक नहीं, जन विरोधी सरकार है. किसान पंचायत को स्थानीय किसान विजय सिंह, तार सिंह, बाल युगेश्वर प्रसाद सिंह, उपेन्द्र सिंह आदि ने भी संबोधित किया. किसान पंचायत में कई दर्जन किसानों ने  शामिल होकर किसान संघर्ष में शामिल होने की घोषणा की. किसानों द्वारा जन गीत भी गाए गए.