दुर्ग (छत्तीसगढ़) में विगत 24 फरवरी 2021 को वामपंथी पार्टियों – भाकपा(माले) लिबरेशन, माकपा, भाकपा व ट्रेड यूनियनों – एटक, सीटू, ऐक्टू, एचएमएस व इस्पात श्रमिक मंच द्वारा ‘दमन विरोधी दिवस’ का पालन करते हुए महामहिम राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर, दुर्ग को एक ज्ञापन सौंप कर किसान आंदोलन के दौरान जेलों में बंद निर्दाेष किसानों की बिना शर्त रिहाई और झूठे केसों की जारी की जा रही नोटिस रद्द करने की मांग की गई.

ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले छह महीनों से देश के किसान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ और एमएसपी की कानूनी गारंटी सहित कुछ अन्य मांगों के लिए विभिन्न तरीकों से और विभिन्न स्तरों पर आंदोलन कर रहे हैं. पिछले तीन महीनों से वे अनिश्चित काल के लिए दिल्ली के आसपास धरना लगाए हुए है, लेकिन सैकड़ों किसानों और आन्दोलन समर्थकों को भारत सरकार और कई राज्य सरकारों द्वारा जेलों में डाल दिया गया है और झूठे मामले बनाए गए हैं.

राष्ट्रपति से निम्नलिखित मांगों तत्काल कार्रवाई करने की अपील की गई – (1). जेलों में बंद निर्दाेष किसानों के खिलाफ दर्ज पुलिस मामलों को खारिज कर उन्हें तुरंत बिना शर्त रिहा किया जाए. (2). किसानों और उनके संघर्ष के समर्थक व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ दर्ज सभी झूठे पुलिस मामलों को खारिज किया जाए. (3). दिल्ली पुलिस, एनआईए और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा संघर्ष में शामिल किसानों को डराने-धमकाने के लिए भेजे जा रहे नोटिस को तुरंत रोका जाए और पहले के नोटिस को रद्द किया जाए. (4). दिल्ली की सीमाओं पर किसान मोर्चों की पुलिस की घेराबंदी के नाम पर, आम आदमी की बंद सड़कों को खोला जाए.

प्रतिनिधिमंडल मे बृजेन्द्र तिवारी, शांत कुमार, विनोद कुमार सोनी, अशोक खातरकर, बंसत उके, प्रेमसिंह चंदेल, मुक्तानंद साहू, गौतम साहू आदि शामिल थे.