आजादी के दौर से देश के मजदूरों को हासिल 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर पहली अप्रैल से पूरे देश मे 4 श्रम कोड को मोदी सरकार द्वारा लागू करने की घोषणा के विरोध में और इन 4 श्रम कोड को मजदूरों की दासता का काला कानून बताते हुए ऑल इंडिया सेंट्रल काॅउन्सिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) ने देशव्यापी विरोध संगठित किया.

रेलवे कर्मचारियों ने जलाया श्रमिक कोड बिल

केंद्रीय ट्रेड यूनियन ऐक्टू व इंडियन रेलवे इम्पलाइज फडरेशन के राष्ट्रीय आह्नान पर 1 अप्रैल 2021 को नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के नेतृत्व में सैकड़ों रेलवे कर्मचारियों ने प्रयागराज जंक्शन प्लेटफाॅर्म नम्बर-1 पर लाइन शाह बाबा के मजार के पास चारों श्रमिक कोड बिल की प्रतियों को जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.

विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय महामंत्री काॅ. मनोज पांडेय ने कहा कि चारों श्रमिक कोड बिल आधुनिक ग़ुलामी के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि वर्षों के संघर्ष और शहादत के बाद जो कानून मजदूरों के हित में बनाए गए थे उन्हें देश बेचू सरकार ने काॅरपोरेट घरानों के पक्ष में खत्म करके चार श्रमिक कोड बिल 2020 बनाया है. इन चारों श्रम संहिताओं –

1. औद्योगिक संबंध संहिता 2020,
2. व्यवसायिक संरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2020,
3. सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020,
4. वेतन संहिता  2020 – का हम विरोध करते है,

विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ऐक्टू के राष्ट्रीय सचिव डाॅ. कमल उसरी ने कहा कि पूर्व में मजदूरों-कर्मचारियों के हित के लिए जो कानून बनाए गए थे उनमें से 29 केंद्रीय कानूनों का स्वतंत्र अस्तित्व स्वतः समाप्त हो जायेगा. शेष 15 कानूनों में भी बदलाव किया गया है. यानी कि अब तक जो 44 श्रमिक कानून लागू थे, अब खत्म हो गए हैं. अब मजदूरों के सामान्य कार्य दिवस 10 घंटे या 12 घंटे अथवा कुछ भी हो सकते हैं. अब श्रम विभाग के निरीक्षक की भूमिका सिर्फ मददकर्ता अथवा फसिलेटर तक सीमित कर दी गई है. सामाजिक सुरक्षा में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में योगदान को 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है. कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) में मालिक के योगदान को 4.75 प्रतिशत से घटाकर 3.25 प्रतिशत कर दिया गया है. मजदूर-कर्मचारी अब बिना इजाजत के हड़ताल नही कर सकते हैं. अब श्रमिक न्यायालय खत्म कर दिए जाएंगे और ब्यूरोक्रेसी प्रबंधन का ही मनमानापन चलेगा. लेकिन हम लोग सरकार के इस तानाशाही रवैये के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे.

विरोध प्रदर्शन का संचालन नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय सहायक महामंत्री काॅ. सैयद इरफात अली और अध्यक्षता नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय कोषाध्यक्ष काॅ. संजय तिवारी ने किया. विरोध प्रदर्शन में एटक जिला सचिव राम सागर, अन्नू सिंह, सुनील, संरक्षक रामकिशोर, राजकुमार, आफताब अहमद, संतोष, गुलाब आदि मौजूद रहे.

श्रम कोड जलाओ/फाड़ो दिवस मनाया गया

संयुक्त ट्रेड यूनियन के आह्वान पर ऑल इंडिया सेन्ट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) भिलाई द्वारा कोविड के नियमों का पालन करते हुए 1 अप्रैल 2021 को श्रम कोड जलाओ/फाड़ो दिवस मनाया गया. इस दौरान यूनियन कार्यालय, सेक्टर-6, भिलाई में श्रम कोडों की प्रतियों को जलाया गया और फाड़ा गया. 4 श्रम कोडों को लाकर केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा 12 घंटे के कार्य दिवस को कानूनी जामा पहनाया जा रहा है. ‘हायर एंड फायर’ को संस्थाबद्ध किया जा रहा है. मनमर्जी से छंटनी करना, नौकरी से निकालना, फक्टरी बंद करना, हड़ताल के अधिकार को सीमित करना, सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी मजदूरों के कंधों पर डालना इत्यादि.

इस मौके पर कहा गया कि मोदी सरकार की नीतियों के कारण बेरोजगारी व मंहगाई बेतहाशा बढ़ रही है, वेतन कम होता जा रहा है और सामाजिक सुरक्षा को खत्म किया जा रहा है. केन्द्र सरकार द्वारा बड़ी संख्या में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को किसी भी तरह की सुविधा व लाभ देने के बजाय उन्हें सभी ट्रेड यूनियन अधिकारों और लाभों से वंचित किया जा रहा है. ऐक्टू ने छत्तीसगढ़ सरकार से मांग की है कि राज्य में 4 लेबर कोडों को लागू नहीं किया जाये. कार्यक्रम में बृजेन्द्र तिवारी, ए. शेखर राव, श्यामलाल साहू, अशोक मिरी, रूपेश कोसरे मुख्य रूप से शामिल थे.

Burns copies of 4 labor codes

बिहार में भी हुआ विरोध कार्यक्रम

बिहार की राजधानी पटना में जीपीओ गोलम्बर पर 4 श्रम संहिताओं की प्रतियों को जलाया गया. ऐक्टू से संबद्धें ऑटो रिक्शा (टेम्पो) चालक संघ, निर्माण मजदूर यूनियन, कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) से जुड़े सैकड़ों सदस्यों ने अपने हाथों में 4 श्रम कोड के गजट की प्रतियां लहराते हुए तथा मजदूरों की दासता के 4 श्रम कोड का काला कानून रद्द करो, मजदूरों को गुलाम बनाना नही चलेगा, देश पर काॅर्पाेरेट कम्पनी राज थोपना बन्द करो, देश बेचना बन्द करो, सार्वजनिक संपत्तियों को अडानी-अंबानी के हवाले  करना नहीं चलेगा, 3 कृषि कानून रद्द करो आदि सरकार विरोधी नारे लगाये. मोदी व नीतीश सरकार विरोधी नारेबाजी के बाद ऐक्टू से जुड़े सदस्यों ने 4 श्रम कोड की प्रतियों को जलाया.

कार्यक्रम का नेतृत्व ऐक्टू राष्ट्रीय सचिव रणविजय कुमार, महासंघ (गोप गुट) के सम्मानित अध्यक्ष रामबली प्रसाद, रेल कर्मचारियों के नेता जितेंद्र कुमार, ऑटो रिक्शा (टेम्पो) चालक संघ क महासचिव मुर्तजा अली, निर्माण मजदूर यूनियन के नेता श्याम प्रसाद साव, पप्पू शर्मा सहित छट्ठू लाल, कृष्ण कुमार सिंहा आदि नेता कर रहे थे.

जीपीओ गोलंबर हुए सभा को सम्बोधित करते हुए नेताओं ने मोदी राज द्वारा लाए गए मजदूर-किसानों की दासता के 4 श्रम कोड व 3 कृषि कानूनों को रद्द करने सहित नीतीश सरकार द्वारा लाए गए विशेष सशस्त्र पुलिस कानून व निजीकरण की नीतियों के खिलाफ सभी लोगों से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया और कहा कि उक्त काले कानूनों व निजीकरण के खात्मे तक ऐक्टू अनवरत संघर्ष जारी रखेगा.

सुपौल जिला के सुपौल प्रखंड के अमठो गांव (पिपरा खुर्द पंचायत) में ऐक्टू के जिलाध्यक्ष जितेंद्र चौधरी की अध्यक्षता में चार लेबर कोड की प्रतियां जलाई गई. उसके बाद हुई सभा को ऐक्टू के जिला सचिव अरविंद कुमार शर्मा, फूलदेव पासवान, मन्नान, ब्रह्मदेव सदा, उपेंद्र सदा, चंदेश्वरी शर्मा, लीला देवी, मीरा देवी, नागिया देवी, सीता देवी, अरहुलिया देवी, अमेरिका देवी, आदि ने संबोधित किया.

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