27 मार्च 2021 को इफको फुलपुर ठेका मजदूर संघ सम्बद्ध ऐक्टू से जुड़े सैकड़ों मजदूरों ने फुलपुर तहसील में लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से धरना-प्रदर्शन किया और इफको फुलपुर में प्रबंधन की लापरवाही से हो रही मजदूरों-कर्मचारियों की मौत की उच्च स्तरीय न्यायिक समिति बनाकर जांच कराने और इसके दोषी लोगों पर कानूनी कार्यवाही करने की मांग की.

धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इफको कारखाने का निर्माण क्षेत्र के विकास के लिए किया गया था लेकिन प्रबंधन की बदनीयती से लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं. कभी अमोनिया गैस लीक होती है, तो कभी ब्वायलर फट जाता है. मजदूरों-कर्मचारियों की मौत के बाद केंद्र व राज्य सरकार के साथ इफको प्रबंधन भी मुवावजे में भेदभाव करता है. किसी मजदूर कर्मचारी की मौत के बाद मृतक के आश्रित परिजनों को शव के साथ घंटों और कभी-कभी तो एक-दो दिन तक विरोध प्रदर्शन करना पड़ता है, तब जाकर थोड़ी-बहुत आर्थिक मदद मिल पाती है. जबकि, इस तरह की घटनाओं पर मुआवजा देना कानूनन बाध्यकारी है.

वक्ताओं ने कहा कि यदि शासन-प्रशासन इफको में हो रही लगातार दुर्घटनाओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए कार्यवाही नहीं करता है तो कभी भी कोई भी बड़ी अप्रिय घटना हो सकती है. इसीलिए, हम सब मांग करते हैं कि जब उत्तर प्रदेश सरकार अधिकारियों को लाखों का मुवावजा दे सकती है तो फिर 23 मार्च को हुई मृतक मजदूर प्रदीप यादव व विजय यादव के आश्रितों को भी मुआवजा क्यों नहीं दे रही? अधिकारियों और मजदूरों की मौत के बाद भेदभाव के मामले में केंद्र व राज्य सरकार के साथ ही इफको प्रबंधन का व्यवहार भी दोषपूर्ण और गलत है. अंत में मजदूरों ने एसडी एम, फुलपुर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यदि प्रशासन उचित करवाई नहीं करता है तो इफको ठेका मजदूर संघ के साथी क्षेत्रीय जनता के साथ गोलबंदी करते हुए बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगें.

धरना-प्रदर्शन में मुख्य रूप से इलाहाबाद के ऐक्टू जिला सचिव डाॅ. कमल उसरी, इफको फुलपुर ठेका मजदूर संघ मंत्री कामरेड देवानंद, अधिवक्ता वीरेन्द्र प्रताप सिंह, मोहम्मद फारुख व विमलेश प्रजापति, रामचंद्र यादव, राजनाथ यादव, वीरेन्द्र मिश्रा, लल्लू प्रसाद पटेल, फूलचंद प्रजापति, नानहू दास, मनोज इत्यादि शामिल रहे. इसकी अध्यक्षता इफको ठेका मजदूर संघ के अध्यक्ष काॅमरेड जयप्रकाश ने की.