अब नीतीश सरकार के ‘विकास’ की भेंट चढ़ेगी ऐतिहासिक धरोहर खुदाबख्श ओरियंटल लाइब्रेरी!

वर्ष - 30
अंक - 16
12-04-2021

 

बिहार की नीमीश कुमार सरकार ने पटना में कारगिल चौक से लेकर एनआइटी तक ‘फ्लाई ओवर निर्माण के लिए’ ऐतिहासिक धरोहर खुदाबख्श ओरियंटल लाइब्रेरी के गार्डेन व कुछ हिस्सों को तोड़ने का फसला लिया है.

खुदाबख्श ओरियंटल लाइब्रेरी कारगिल चौक से एनआइटी होकर गुजर रहे अशोक राजपथ पर पटना मेडिकल काॅलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) से आगे के बायीं तरफ स्थित है. बिहार के शैक्षणिक जगत में इस लाइब्रेरी का महत्वपूर्ण योगदान है, जिसकी न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति है. इतिहास को जानने-समझने का यह एक महत्वपूर्ण स्रोत है. इस लाइब्रेरी में महात्मा गांधी से लेकर कई राष्ट्रपति, राजनेता व विद्वान आ चुके हैं. यह ऐतिहासिक अध्ययनों का भी एक बड़ा केंद्र है.

यह लाइब्रेरी दक्षिण तथा मध्य एशिया की बौद्धिक तथा सांस्कृतिक विरासत का सबसे बड़ा भंडार है. इसमें लगभग 21000 पांडुलिपियां और 2.5 लाख मुद्रित पुस्तकों का अद्वितीय संगह है. इसके मूल्यवान संग्रह के असीम ऐतिहासिक व बौद्धिक महत्व को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने सन 1960 में इस लाइब्रेरी को एक संसद अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया था. इस लाइब्रेरी में कागज, ताड़पत्र, मृगचर्म, कपड़े और विविध सामग्रियों पर लिखित पांडुलिपियां हैं. जर्मन, फ्रेंच, पंजाबी, जापानी व रूसी पुस्तकों के अलावा अरबी, फारसी, उर्दू, हिंदी व अंग्रेजी में मुद्रित लाखों पुस्तकें हैं. प्राच्य अध्ययनों तथा अनुसंधान कार्यों के लिए छात्र-युवाओं व नागरिकों की आवश्यकताओं को पूरा करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. अनुसंधानकर्ताओं व स्काॅलरों तथा अनियमित पाठकों के लिए अलग-अलग दो अध्ययन कक्ष हैं. ऐसी स्थिति में इसकी एक इंच जमीन को भी नुकसान पहुंचाना पूरे शैक्षणिक जगत पर हमला है. हम देख रहे हैं कि भाजपा-जदयू सरकार द्वारा शैक्षणिक-अकादमिक संस्थानों पर लगातार हमला किया जा रहा है. यह उसकी ही अगली कड़ी है. हम सरकार से मांग करते हैं कि वह हेरिटेज घोषित किए गए भवनों से छेड़छाड़ और फ्लाई ओवर बनाने के नाम पर खुदाबख्श ओरियंट लाइब्रेरी को नुकसान पहुंचाना बंद करे.

राजधानी पटना के नागरिक समाज ने सरकार के इस फसले पर गहरी चिंता जाहिर की है. करीब सौ से अधिक पुरातत्वविदों व इतिहासकारों ने भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र भेजकर इस फसले पर रोक लगाने की अपील की है. भाकपा(माले) ने भी ऐतिहासिक धरोहर खुदाबख्श ओरियंटल लाइब्रेरी के हिस्से को तोड़ने के फसले को गलत बताते हुए नीतीश कुमार सरकार से ऐतिहासिक धरोहरों की हिफाजत करने की अपील की है. भाकपा(माले) के राज्य सचिव का. कुणाल ने सरकार. के इस फसले को पूरी तरह से गलत व शिक्षा विरोधी बताया है. कहा है कि एक तरफ जहां नीतीश कुमार विरासतों को बचाने का दंभ भरते हैं, वहीं दूसरी ओर इस अति महत्वपूर्ण शैक्षणिक व हेरिटेज बिल्डिंग को तोड़ने के काम में लगे हैं. भला बिहार और पूरे देश का बुद्धिजीवी समुदाय इसकी इजाजत कैसे दे सकता है? उन्होंने बिहार के तमाम प्रबुद्ध जनों व आम नागरिकों से इसके खिलाफ आगे आने की अपील की है.

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विधानसभा अध्यक्ष व मुख्यमंत्री को लिखा पत्र : खुदाबख्श लाइब्रेरी को नहीं तोड़ने की अपील की

बिहार विधानसभा की पुस्तकालय समिति के अध्यक्ष व भाकपा(माले) विधायक सुदामा प्रसाद ने ऐतिहासिक धरोहर खुदाबख्श ओरियंटल लाइब्रेरी के गार्डेन व उसके भवन के कुछ हिस्से को सरकार द्वारा तोड़ने के निर्णय के खिलाफ विगत 9 अप्रैल 2021 को बिहार विधानसभा के अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र दिया और इस फसले पर तत्काल रोक लगाने की मांग की. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से इस अतिसंवेदनशील मसले पर अपने स्तर से हस्तक्षेप करने की भी अपील भी की है जिसका जवाब देते हुए विधानसभा के अध्यक्ष ने कहा कि पुस्तकालय समिति की अगली बैठक में पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों को बुलाकर इस विषय पर बातचीत की जा सकती है.

इसके पूर्व बिहार विधानसभा की पुस्तकालय समिति की बैठक में इस विषय पर गहन विचार-विमर्श किया गया. बैठक में राय बनी कि लाइब्रेरी को तोड़ने का फसला गलत है और इसका विरोध किया जाएगा.

पुस्तकालय समिति के अध्यक्ष व माले विधायक सुदामा प्रसाद ने कहा है कि यदि सरकार को “फ्लाई ओवर” बनाना ही है, तो वह विशेषज्ञों की राय ले और लाइब्रेरी को बिना किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाए उसके निर्माण के बारे में प्लानिंग करे. आज सिविल इंजीनियरिंग जब इतनी डेवलप हो चुकी है, तो ऐसा करना क्यों नहीं संभव हो सकता है?

उन्होंने कहा कि बिहार के शैक्षणिक जगत में इस लाइब्रेरी का महत्वपूर्ण योगदान है और यह ऐतिहासिक अध्ययनों का भी एक बड़ा केंद्र है. इसलिए इसकी एक इंच जमीन को भी नुकसान पहुंचाना विधानसभा की पुस्तकालय समिति और बिहार के नागरिकों को मान्य नहीं है. इस अनमोल व बिहार के ऐतिहासिक पहचान व गौरव को आखिर कैसे नष्ट होने दिया जा सकता है?

भाकपा(माले) ने जल्द ही इस मसले पर बिहार के बुद्धिजीवियों व शिक्षा प्रेमियों की एक बैठक बुलाने की योजना बनाई है. यदि सरकार नहीं मानती है तो इस मुद्दे पर आंदोलनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जाएगी.