भाकपा(माले) की एक उच्चस्तरीय जांच टीम ने विगत 21-22 अप्रैल को राजधानी पटना के दो प्रमुख अस्पतालों एनएमसीएच और पीएमसीएच का दौरा करके कोविड के दूसरे संक्रमण से उपजी स्थितियों का जायजा लिया. जांच टीम में विधायक दल के नेता महबूब आलम, पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, पफुलवारी विधायक गोपाल रविदास, केंद्रीय कमिटी के सदस्य अभ्युदय तथा राज्य कमिटी के सदस्य रणविजय कुमार व कुमार परवेज शामिल थे

पीएमसीएच जाकर कोविड संक्रमितों के लिए सरकार की ओर से की गई व्यवस्था और आ रही परेशानियों का विस्तार से जायजा लिया गया तथा अस्पताल प्रबंधन, डाॅक्टरों व अन्य कर्मियों से बातचीत करके बेड, दवाई, ऑक्सीजन, वेंटीलेटर व अन्य आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता की जानाकरी ली गई. एनएमसीएच के अधीक्षक से पफोन पर वार्ता हुई क्योंकि वे उस वक्त अन्यत्र किसी बैठक में थे.

विधायक दल नेता का. महबूब आलम ने कहा कि सरकार को कोविड से लड़ने की तैयारी में तेजी से गति लानी चाहिए. जिला स्तर पर भी प्रशासन, विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों आदि की संयुक्त बैठक होनी चाहिए ताकि कोविड के खिलाफ लड़ाई को मजबूती प्रदान की जा सके. लेकिन अभी तक इस मामले में सरकार या जिला प्रशासन की ओर से कोई भी पहलकदमी नहीं हुई है.

दूसरे दिन माले के विधायक दल के नेता महबूब आलम, केंद्रीय कमिटी के सदस्य अभ्युदय, राज्य कमिटी के सदस्य रणविजय कुमार व कुमार परवेज की चार सदस्यों की टीम ने एनएमसीएच, पटना एम्स, पारस अस्पताल व आईजीआईएमएस का दौरा किया. वहीं पालीगंज विधायक संदीप सौरभ ने 23 अप्रैल से शुरू होने वाले आइसोलेशन सेंटर के साथ-साथ दुल्हिनबाजार, विक्रम व बिहटा के विभिन्न अस्पतालों व आइसोलेशन सेंटर का निरीक्षण किया. फुलवारी विधायक गोपाल रविदास ने मसौढ़ी व धनरूआ में कई अस्पतालों का दौरा करके कोविड संक्रमितों के इलाज में आ रही दिक्कतों का जायजा लिया.

जांच दल ने अस्पतालों का दौरा करने के बाद कहा कि इन अस्पतालों में आधारभूत संरचनाओं से लेकर मानव संसाधनों का घोर अभाव है. एनएमसीएच में कोरोना मरीजों के 500 बेड और एम्स में 270 बेड ही उपलब्ध हैं. आईजीआईएमएस में अभी तैयारी चल ही रही है. पीएमसीएच में भी महज 120 बेड ही हैं. कुल मिलाकर पटना शहर में कोविड स्पेशलिस्ट 1000 बेड भी नहीं हैं. डाॅक्टरों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ दवाइयों का भी अभाव है. ऐसी स्थिति में इस महामारी का मुकाबला कैसे किया जा सकता है? यह बिहार सरकार को बताना चाहिए कि विगत एक साल में उसने इस दिशा में कौन से ठोस प्रयास किए हैं?

अस्पताल प्रबंधकों से बात करने पर यह बात उभरकर सामने आई कि नीचे के अस्पतालों की खराब स्थिति के कारण माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है. नीचे के अस्पतालों में अभी तक सरकार कोरोना संक्रमितों के इलाज के काम को आरंभ नहीं कर सकी है. इन अस्पतालों की जर्जर व दयनीय स्थिति देखकर मरीज सीधे पटना लाये जाते है. ऐसे में पटना के अस्पतालों पर भारी दबाव पड़ रहा है. सही समय पर इलाज अथवा ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण पटना आते-आते रोगियों की स्थिति गंभीर हो जाती है और उन्हें बचाना कठित हो जा रहा है. यदि नीचे के अस्पतालों की व्यवस्था को सरकार सुधारे और दवाइयों व ऑक्सीजन की न्यूनतम व्यवस्था भी कर दे तो स्थिति को तत्काल नियंत्रण में लाया जा सकता है.

कई प्राइवेट अस्पतालों में भी कोविड संक्रिमतों का इलाज हो रहा है. लेकिन स्थिति बिगड़ने पर ये अस्पताल भी मरीजों को एनएमसीएच अथवा एम्स को रेफर कर दे रहे हैं. प्राइवेट अस्पतालों में रोगियों को भारी पैसा खर्चा करना पड़ रहा है. और जब उनका पैसा खत्म हो जाता है, तो उन्हें अस्पताल प्रबंधन रेफर कर देता है. जांच दल की मांग है कि सरकार प्राइवेट अस्पताल में कोरोना मरीजों पर आ रहे खर्च का वहन खुद करे ताकि प्राइवेट अस्पताल मरीजों पर कोई दबाव न बना सकें.

विधायक संदीप सौरभ ने बताया कि पालीगंज में खिरी मोड़ स्थित आईटीआई में 100 बेड का आइसोलेशन सेंटर अभी शुरू ही होने वाला है. इसमें महज 10 बेड पर ही ऑक्सीजन की उपलब्धता रहेगी. नीचे के स्तर पर ऑक्सीजन की कमी सबसे बड़ी समस्या है. यदि इसे दूर नहीं किया गया तो मामला और बिगड़ जाएगा. इस मामले को लेकर अधिकारियों से बातचीत भी की गई, लेकिन सभी अधिकारी एक दूसरे को जवाबदेह बताकर अपना पिंड छुड़ाने की ही कोशिश करते रहे. गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए इन जगहों पर कोई व्यवस्था नहीं है और वे उन्हें पटना रेफर कर देते हैं. दुल्हिनबाजार के आर्यभट्ट टीचर ट्रेनिंग काॅलेज में आइसोलेशन सेंटर अभी तक शुरू नहीं हो सका है. तीनों जगहों पर ऑक्सीजन की मांग है. अस्पतालों में कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण कोविड पेसेंट भर्ती ही नहीं हो रहे हैं.

कोविड की जांच का मामला बहुत ही धीमा है, जिसके कारण स्थिति और गंभीर होते जा रही है. एनएमसीएच में कोविड जांच केंद्र के ही संक्रमित हो जाने के बाद वहां जांच बंद है और इस कारण इलाज की प्रक्रिया में कई प्रकार की समस्यायें आ रही हैं. सरकार को चाहिए कि कोविड की जांच की रफ्रतार को बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाये और इस बात की गांरटी करे कि 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट आ सके ताकि सही समय पर रोगियों का इलाज शुरू हो सके और कोरोना संक्रमण की दर को रोका जा सकेमाले जांच दल इन मामलों को लेकर अपनी एक रिपोर्ट तैयार करेगा, और उसे हेल्थ विभाग, बिहार सरकार के प्रधान सचिव व पटना के डीएम को सुपुर्द करेगा ताकि इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा सके.