ताबड़तोड़ चुनावी घोषणाएं करनेवाली भाजपा सरकार बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव घेषित करने के मामले पर चुप्पी साधे हुए है. भाकपा(माले) ने बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव बनाने के प्रस्ताव को विधानसभा से पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की मांग पर विगत 15 सितंबर को शहीद स्मारक, कार रोड, लालकुआं पर धरना दिया गया. धरने के माध्यम से बिन्दुखत्ता राजस्व गाव का प्रस्ताव उत्तराखण्ड राज्य विधानसभा से पारित कर केंद्र सरकार को भेजने का प्राथमिक कार्य पूरा कर राजस्व गांव बनाये जाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठायी गई. धरने के माध्यम से चेतावनी दी गई कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो भाकपा(माले) पूरे क्षेत्र में सरकार और विधायक के खिलाफ जन अभियान तेज करेगी.

माले के बिन्दुखत्ता सचिव ललित मटियाली के संचालन में हुए धरने को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार किसान विरोधी सरकार है और खेती में कंपनी राज लाना चाहती है. इसलिए भाजपा बिन्दुखत्ता राजस्व गांव से लेकर किसानों के हर सवाल पर बेरुखी अपनाये हुए है. खेत, खेती और किसानों के खिलाफ बनाये गए तीन काले कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दस महीने से दिल्ली में आंदोलन कर रहे हैं लेकिन केंद्र की मोदी सरकार अपना किसान विरोधी रवैया छोड़ने को तैयार नहीं है.

भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता बहादुर सिंह जंगी ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा और लालकुआं से भाजपा उम्मीदवार नवीन दुम्का ने यहां की जनता से भाजपा की डबल इंजन सरकार बनने पर बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव बनाने का वादा किया था. इसी मुद्दे पर मिले प्रचंड बहुमत से विधायक बनने के बाद उन्होंने और उनकी भाजपा सरकार ने न सिर्फ राजस्व गांव पर वादाखिलाफी की है बल्कि इस सवाल को ही दरकिनार कर दिया है. भाजपा ने ऐसा क्यों किया और बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव बनाने के वादे का क्या हुआ? सरकार को इस बात का जवाब जनता को देना चाहिए.

भाकपा(माले) जिला सचिव डाॅ. कैलाश पाण्डेय ने कहा कि लालकुआं विधायक न केवल बिन्दुखत्ता को राजस्व गाव बनाने में बल्कि गौला तटबंध, सेंचुरी मिल प्रदूषण, रोजगार, बिजली पोल, पानी की समस्या, कृषि उपज का उचित दाम, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन से लेकर छोटे बड़े मामलों में कुछ भी कर पाने में असफल रहे हैं. उनका रिपोर्ट कार्ड उनको जनता की कसौटी पर फेल साबित कर रहा है. एक भी सवाल को वह विधानसभा में ढंग से रख तक नहीं पाये, तब वे किस बात के विधायक हैं और किस आधार पर पुनः विधायक बनने का दावा कर रहे हैं. बिना कुछ किये समय काटने वाले अपने कार्यकाल के लिए उनको जनता से माफी मांगनी चाहिए.