बिहार में सत्ता के संरक्षण व पुलिस तंत्र के सहयोग से चल रहे शराब के गैरकानूनी तंत्र से मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. केवल इस साल लगभग 100 जानें जा चुकी हैं. बिहार में शराबबंदी लागू है लेकिन भोजपुर, अरवल, गया, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, सिवान, गोपालगंज और पश्चिम चंपारण के देवराज क्षेत्रा और नौतन में दिवाली पर जहरीली शराब से 62 लोगों की मौत हो गई.

जहरीली शराब पीने से हुई मौत की घटनाओं को हत्याकांड बताते हुए भाकपा(माले) ने विगत 7 नवंबर को पूरे राज्य में प्रतिवाद मार्च निकालकर सरकार का पुतला दहन किया.

फतुहा, पटना में भाकपा(माले) के प्रखंड कार्यालय से प्रतिवाद मार्च निकाला गया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला दहन किया गया. प्रतिवाद मार्च के दौरान इस जनसंहार के दोषी मद्य निषेध मंत्री को बर्खास्त करने, शराब माफिया-राजनेता-प्रशासन गठजोड़ पर कारवाई करने, जहरीली शराब हत्याकांड की विस्तृत जांच कराने और और मृतकों के परिजनों को 20 लाख रु. का मुआवजा देने की मांग की गई. प्रतिवाद मार्च के बाद फतुहा चौराहे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंका गया और सभा आयोजित की गई जिसे भाकपा(माले) के प्रखंड सचिव का. शैलेन्द्र यादव ने संबोधित किया. मार्च और पुतला दहन में रामप्रवेश रविदास, रविंद्र पासवान, दीनानाथ केसरी, विकास दास, नरेश दास, सत्येंद्र रविदास रविंद्र यादव, सुग्रीव ठाकुर भी शामिल रहे.

नासरीगंज, रोहतास में भी भाकपा(माले) प्रखंड कार्यालय से प्रतिवाद मार्च निकाल कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला दहन किया गया. प्रतिवाद मार्च में भाकपा(माले) जिला सचिव नंदकिशोर पासवान, बृजबिहारी पासवान, रामबचन पासवान, नंदकुमार सिंह, रिंकू बैठा, सुभाष राम, बीरबल राम आदि भाकपा(माले) नेता शामिल रहे.

हिलसा, नालंदा में भाकपा(माले) के जिला सचिव सुरेंद्र राम और प्रखंड सचिव अरुण यादव के नेतृत्व में काजी बाजार स्थित भाकपा(माले) के प्रखंड कार्यालय से जोगीपुर मोड़ तक प्रतिवाद मार्च निकाल कर आक्रोश पूर्ण नारे लगाते हुए नीतीश कुमार का पुतला दहन किया गया. प्रतिवाद मार्च में भाकपा(माले) के कार्यालय सचिव दिनेश कुमार यादव, प्रखंड कमेटी सदस्य शंभू राम, शिव शंकर प्रसाद, अशोक पासवान, इंदल बिंद, राजेश रविदास और किसान नेता कामेश्वर प्रसाद आदि ने हिस्सा लिया. अरवल, डुमरांव (बक्सर) और बेगूसराय में भी प्रतिवाद मार्च निकाल कर मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया.

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परिजनों से माले विधायक मिले

प. चंपारण जिले के नौतन थाना क्षेत्र के दक्षिणी तेलहुआ गांव में दिवाली के दिन जहरीली शराब पीने से 15 लोगों की मौत हो गई. भाकपा(माले) केन्द्रीय कमेटी सदस्य व सिकटा विधायक का. वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में सुनील राव, सुरेन्द्र चौधरी, हारून गद्दी, जोखू चौधरी आदि नेताओं के जांच दल ने 5 नवंबर को इस गांव का दौरा किया और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की.

परिजनों ने बताया कि दिवाली के दिन जहरीली शराब पीने से नौतन थाना क्षेत्र के दक्षिणी तेलहुआ पंचायत के वार्ड नंबर 2, 3 और 4 के 15 लोगों की मौत हो गई. 3 नवंबर की देर शाम में लोगों ने शराब पी थी. शराब पीने के कुछ समय बाद ही सभी लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी. उनको आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया. मृतकों में बच्चा यादव, महाराज यादव, हनुमंत सिंह, मुकेश पासवान, जवाहर सहनी, उमाशंकर साह, रमेश सहनी रामप्रकाश राम, ठग पासवान, सिकंदर राम, हाशिम खां, मंगनी राम, धनीलाल राम, मदन राम, विकास कुमार आदि शामिल हैं. कई लोग अभी भी गंभीर रूप से बीमार हैं.

जांच दल ने कहा कि बिहार सरकार के मंत्री का यह बयान कि सरकार शराब बंदी कानून बना चुकी है, फिर भी लोग शराब पीते और मरते हैं तो सरकार क्या करे? – गैर जिम्मेदाराना है, सरकार सिर्फ कानून बनाकर चुप्पी नहीं साध सकती. कानून को लागू करने की जबाबदेही भी सरकार की ही है, जिससे वह भाग नहीं सकती.

जांच दल ने निकम्मे मद्य निषेध एवं उत्पाद मंत्री सुनील कुमार को बर्खास्त करने की मांग करते हुए कहा कि नीतीश सरकार और मद्य निषेध एवं उत्पाद मंत्री सुनील कुमार जहरीली शराब और स्प्रिट कारोबारियों पर अंकुश लगाने और कार्रवाई करने में फेल हो चुके हैं. सरकार ने जिस तत्परता से शराब बंदी कानून बनाया है, उसी तत्परता से स्प्रिट माफियाओं और कारोबारियों पर कार्रवाई करे.

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वाम दलों ने गहरी चिंता जतायी

भाकपा(माले) समेत बिहार के पांच वाम दलों ने बिहार में जहरीली शराब से लगातार हो रही मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसके प्रति सरकार के असवंदेशील व गैर जिम्मेदार रवैये की कड़ी भत्र्सना की है. वाम दलों ने कहा कि सत्ता के संरक्षण व पुलिस तंत्रा के सहयोग से ही राज्य में शराब का गैरकानूनी तंत्र फला-फूला है. ऐसा नहीं है कि नीतीश कुमार को इसकी खबर नहीं है, लेकिन न जाने कितनी मौतों के बाद उनकी नींद खुलेगी?

माले राज्य सचिव कुणाल, माकपा के राज्य सचिव अवधेश कुमार, भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय, फारवर्ड ब्लाॅक के अमरीका महतो और आरएसपी के वीरेंद्र ठाकुर ने कहा कि नीतीश कुमार शराबबंदी पर वाहवाहियां लूटने में कभी नहीं चूकते लेकिन हकीकत यह है कि वे राज्य में जहरीली शराब का कारोबार अबाध गति से फलने-फूलने के मौके दे रहे हैं. शराब माफियाओं की चांदी है और लोग मौत के मुंह में जाने को विवश हैं. सरकार में तनिक भी इमानदारी है तो वह प्रशासन-राजनेता व शराब माफियाओं के उस गठजोड़ की जांच करे, जो इस जहरीली शराब का उत्पादन व वितरण कर भारी मुनाफा कमा रहा है.

 

liquor in Bihar

जहरीली शराब से मृतकों के गांव भाकपा(माले)-इंसाफ मंच की टीम पहुंची

मुजफ्फरपुर के कांटी प्रखंड के सिरिसिया व बरियारपुर गांव में जहरीली शराब पीने से अबतक 6 लोगों की मौत हो चुकी है और 5 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं. भाकपा(माले) और इंसाफ मंच की टीम ने 11 नवंबर 2021 को गांव में पहुंच कर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की. जांच टीम में भाकपा(माले) राज्य कमिटी सदस्य शत्रुघ्न सहनी, इनौस नेता आफताब आलम, इंसाफ मंच के नेता असलम रहमानी, जफर आजम, फहद जमां और आइसा नेता मयंक कुमार शामिल थे. जांच टीम ने अशोक राय, दिलीप कुमार, सुमित कुमार राय, रामसकल और शाहजाद अली आदि मृतकों के परिजनों तथा बीमार हुए लालू दास और श्याम किशोर दास से मुलाकात किया.

मृतक सुमित राय के पिता लक्ष्मण राय, माता आशा देवी और चाचा नरेंद्र राय आदि ने बताया कि सोमवार 8 नवंबर को शाम में सुमित राय की तबीयत खराब हुई. उसे पीएचसी, कांटी ले जाया गया. डाक्टर ने ने उसे तीन इंजेक्शन दिये. उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई. हाॅस्पीटल के ही एम्बुलेंस से सुमित को लेकर वे मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल हाॅस्पीटल पहुंचे. वहां सीटी स्केन हुआ. उसके तुरत बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया. डाॅक्टरों ने पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया और यहां तक कि शव को घर तक लाने के लिए एंबुलेंस की भी व्यवस्था नहीं की. दो हजार में निजी एम्बुलेंस के माध्यम से शव को घर लाया गया. 28 वर्षीय सुमित की पत्नी व छोटे-छोटे चार बच्चे हैं. जिस को देखने वाला कोई नही है.

जहरीली शराब के शिकार बरियारपुर गांव के मृतक दिलीप राय (50 वर्ष) के भाई संजीव कुमार ने बताया कि 8 नवंबर को 6 बजे दिलीप राय को उल्टी शुरू हुई. उसी समय उसे जुरन छपरा स्थित प्रशांत हाॅस्पीटल में भर्ती कराया गया जहां 24 घंटे बाद उसकी मौत हो गई. उनका पोस्टमार्टम श्रीकृष्ण मेडिकल हाॅस्पीटल में हुआ. संजीव कुमार ने साफ साफ कहा कि उनको जहरीली शराब पिलाकर मारा गया है. सरकार को शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए तथा मृतक के परिवार सहायता देनी चाहिए.

इसी गांव के तीसरे मृतक अशोक राय (55 वर्ष) के पुत्र राहुल कुमार ने बताया कि 8 नवंबर को एक बजे रात में उनके पिता को बेचैनी शुरू हुई. हम लोग उन्हें लेकर मेडिकल हाॅस्पीटल गये. वहां इसीजी करने के बाद डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उनका पोस्टमार्टम भी नही किया गया, मृतक के भाई विनय कुमार ने कहा कि अगर हम लोग शराब कारोबारियों के खिलाफ आवाज उठायेंगे तो पुलिस द्वारा हम लोगों का चलना-फिरना और जीना मुश्किल कर दिया जाएगा.

मृतक रामबाबू राय के पुत्र चुनचुन राय ने भी यही बताया कि 9 नवंबर की शाम को पिता को दवा लेकर दिये लेकिन कुछ देर के बाद बेचैनी और ज्यादा बढ़ गई, पसीना चलने लगा, आंख की रौशनी चली गई और फिर मौत हो गई. अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है.

शराब पीने के कारण आंख की रौशनी गंवाने वाले बरियारपुर निवासी श्याम किशोर राम ने बताया कि उन्होंने सिरसिया चौक पर गुड्डू की दूकान पर एक ग्लास दारू पिया था. उसके बाद ही आंख की रौशनी चली गई. लालू दास ने बताया कि उसी दूकान से शराब पीने के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई.

लोगों के अनुसार तारकेश्वर पटेल, किशोर राम, लालबाबू दास, मनोज सिंह व हरि सिंह अस्पताल में भर्ती हैं.

Deaths due to liquor in Bihar