उत्तर प्रदेश में वामदलों के संयुक्त आह्वान पर विगत 9 नवंबर को रसोई गैस, डीजल-पेट्रोल, खाद्य-पदार्थों की महंगाई व कालाबाजारी के खिलाफ प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रतिवाद करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिये गये.

विगत 31 अक्टूबर 2021 को राजधानी लखनऊ में हुई वामपंथी दलों की एक बैठक में इन सवालों पर 9 नवंबर को प्रदेश भर में खाद बिक्री केन्द्रों, धान खरीद केन्द्रों, तहसीलों अथवा जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया था.

बैठक में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश, माकपा के राज्य सचिव डा. हीरालाल यादव, भाकपा(माले) के राज्य सचिव का. सुधाकर यादव, आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के प्रदेश संयोजक का. अभिनव कुशवाहा एवं लोकतांत्रिक जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष जुबेर अहमद कुरैशी आदि शामिल थे.

बैठक में आगरा में भाजपाइयों द्वारा लगाये गये झूठे आरोपों के आधार पर 3 होनहार कश्मीरी छात्रों की गिरफ्तारी, उन पर देशद्रोह के आरोप लगाने तथा उनका भविष्य उजाड़ने की करतूत की कठोरनिंदा करते हुए उनकी तत्काल रिहाई और साथ ही त्रिपुरा में संघ गिरोह द्वारा अल्पसंख्यकों के खिलाफ चलाये जा रहे हिंसक अभियान की तीव्र भर्त्सना करते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई.

प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान इलाहाबाद में भाकपा, माकपा, भाकपा(माले), लोक जनतांत्रिक दल ने पत्थर गिरजा के पास स्थित धरनास्थल पर मंहगाई के खिलाफ धरना दिया. धरने के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से 7 सूत्रीय मांगपत्र राष्ट्रपति को भेजा गया. सभा की अध्यक्षता भाकपा के जिला मंत्री नसीम अंसारी तथा संचालन माकपा के विकास स्वरूप ने किया. सभा को माकपा जिला मंत्री अखिल विकल्प, भाकपा के रामसागर, भाकपा(माले) के जिला प्रभारी सुनील मौर्य, डाॅ. कमल उसरी, ऐक्टू के राज्य सचिव अनिल वर्मा, आइसा नेता प्रदीप ओबामा, लोक जनतांत्रिक दल के जुबैर आदि लोगों ने संबोधित किया.

आजमगढ़ जिले की निजामाबाद तहसील पर वामपंथी दलों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में भाकपा(माले) राज्य स्थाई समिति के सदस्य ओमप्रकाश सिंह व किसान महासभा के नेता विनोद सिंह शामिल थे. मऊ में वामदलों की तरफ से प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया गया. गाजीपुर में वामदलों ने सरयू पार्क में धरना देकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया. जौनपुर, जालौन, देवरिया, गोरखपुर, बनारस, भदोही, चंदौली, अयोध्या, सोनभद्र आदि जिलों में धरना-प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भेजे गए.

धरने के दौरान आयोजित सभा में वक्ताओं ने पेट्रोल, डीज़ल तथा रसोई गैस के दाम तत्काल कम करने, मंहगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने, जमाखोरी-कालाबाज़ारी पर रोक लगाने, बिजली की दरों को कम करने और उसके निजीकरण पर रोक लगाने, राशनिंग व्यवस्था को मजबूत करने, सभी गरीबों को सस्ता राशन देने, तीनों कृषि कानून रद्द करने, बेमौसम बारिश और आंधी की वजह से बर्बाद हुई फसल का मुआवजा देने, गृहकर और जलकर की वृद्धि को वापस लेने की मांग की. कहा कि केन्द्र व राज्य सरकारों की पूंजीपति परस्त नीतियों के कारण बेतहाशा बढ़ती मंहगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है. पेट्रोल-डीजल, बिजली, रसोई गैस, सरसों तेल, दाल, आटा, चावल सबके दाम बेलगाम तरीके से न बढ़ रहे हैं.

नेताओं ने कहा कि राशनिंग प्रणाली की दुर्दशा के कारण तमाम गरीबों को बाजार से मंहगा राशन लेना पड़ता है. महंगी बिजली और मनमाने बिलों से जनता त्रास्त है. बुनकरों के लिए भी संकट गहरा गया है. खाद के दामों व कृषि लागत में भी भारी वृद्धि हुई है. डीएपी की भयानक किल्लत से ललितपुर जिले में खाद के लिए लाइन में लगे किसान की मौत हो गई. जमाखोर खाद को बढ़े हुए मूल्य पर बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं. वर्षा और बाढ़ से किसान बर्बाद हो गये हैं, जिसका मुआवजा भी सरकार नहीं दे रही है.

नेताओं ने भयानक संकट के इस दौर में नगर निगम द्वारा गृह कर में 5 गुना वृद्धि और जलकर को भी बढ़ाने की तैयारी पर कड़ा विरोध जताया.