भाकपा(माले) की उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी ने दो अलग अलग बयान जारी कर कासगंज जिले के थाना कोतवाली की हिरासत में 22 वर्षीय युवक अल्ताफ की मौत मामले में पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर घटना की न्यायिक जांच करने तथा डाॅ. कपफील खान की बर्खास्तगी को अन्यायपूर्ण बताते हुए उसे रद्द कर उन्हें चिकित्सक पद पर बहाल करने की मांग की है.

पार्टी ने कहा कि कासगंज मामले में मृतक के पिता के बयान से यह हिरासत में हत्या की घटना लगती है, जिसकी त्वरित व निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पुलिस वालों को सख्त सजा दी जानी चाहिए.

माले ने कहा कि योगी के नेतृत्व में यूपी पुलिस हिरासत में हत्या करने में देश में नंबर एक है और पुलिस, योगी और भाजपा के नेताओं ने मिल कर यूपी को हत्या प्रदेश बना दिया है. लखीमपुर खीरी में केंद्र सरकार में मंत्री की शह पर उनके बेटे द्वारा चार किसानों की कुचलकर हत्या और गोरखपुर में होटल में कारोबारी की हाल में पुलिस द्वारा की गई हत्या इसकी बानगी है.

एक अन्य बयान में भाकपा(माले) ने कहा कि डाॅ. कफील खान को चार साल पूर्व हुए गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज ऑक्सीजन कांड की जांच में न सिर्फ क्लीन चिट मिली थी, बल्कि बच्चों की जान बचाने के लिए उन्हें हर तरह से संघर्ष करते हुए पाया गया था. उन्हें निशाने पर लेकर हर तरह से प्रताड़ित किया गया, ताकि 60 बच्चों की जान लेने वाले ऑक्सीजन कांड में फंस रही योगी सरकार अपना गला बचा सके. उनका अल्पसंख्यक समुदाय और मुख्यमंत्री के शहर से होना उनकी अन्य ‘अयोग्यताएं’ थीं, जो योगी सरकार के असहिष्णु और साम्प्रदायिक एजेंडे में फिट नहीं बैठ रही थीं.