विगत 3 जनवरी 2022 को झारखंड के विभिन्न हिस्सों में ऐपवा द्वारा भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की 191वीं जयंती मनाई गई. ऐपवा ने 3-9 जनवरी 2022 के बीच (सावित्रीबाई फुले-शेख फातिमा जयंती) सप्ताह भर तक चलनेवाले बहनापा अभियान की शुरूआत की और इसके दौरान जगह-जगह महिलाओं की शिक्षा व अन्य अधिकारों पर संघर्ष करने और कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया.

इस अवसर पर आयोजित विविध कार्यक्रमों के दौरान महिला नेताओं ने लोगों को, खासतौर पर महिलाओं को बीच भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सेविका सावित्रीबाई फुले और उनकी सहयोगी फातिमा शेख के जीवन संघर्ष की जानकरी दी और यह बताया कि बरसों पहले किस तरह से इन दोनों ने कुंठित समाज में लड़कियों-महिलाओं को पढ़ाने और उनके जीवन में बदलाव लाने का वीड़ा उठाया और इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ीआज महिलाएं पढ़-लिख कर जो इतना आगे बढ़ीं हैं इसमें दोनों का बहुत बड़ा योगदान है.

उन्होंने कहा कि आज केन्द्र की मोदी सरकार जिसतरह से शिक्षा का निजीकरण करने पर अमादा है, लड़कियों ही नहीं, बल्कि गरीब परिवार के सभी बच्चों को शिक्षा से वंचित होना पड़ेगा. कोरोना काल में विगत 2 वर्षों से सारे शिक्षण संस्थान बंद हेैं. गरीब बच्चों को मध्यान्ह भोजन भी नहीं मिल रहा है. ऐसे में उनके योगदान का महत्व और भी बढ़ जाता है.

कार्यक्रमों के जरिए लड़कियों को शिक्षा के अधिकार के किे दायरे को बढ़ाकर 14 से 18 वर्ष करने, उन्के लिए प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक को निशुल्क करने तथा बंद पड़े स्कूलों को तत्काल खोलने की गई.

गिरिडीह से जयंती चौधरी व सरिता साव, हजारीबाग में सविता सिंह, रामगढ़ से नीता बेदिया, बोकारो में शोभा देवी, गढ़वा में सुषमा मेहता, पलामू में अनीता देवी, रांची में नंदिता भट्टाचार्य, देवघर में गीता मंडल व आदि ऐपवा नेताओं ने सावित्रीबाई फुले जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों का नेतृत्व किया.

हजारीबाग में चलकुशा प्रखंड में ऐपवा नेत्री सविता सिंह के नेतृत्व में कार्यक्रम किया गया. गढ़वा में ऐपवा, आइसा व आरवाईए ने संयुक्त रूप से सुषमा मेहता के नेतृत्व में सावित्री बाई फुले का जन्मदिन मनाया. डाल्टनगंज में अनिता देवी के नेतृत्व में कार्यक्रम किया गया.

गढ़वा जिले के गढ़वा, मेराल व डंडा में ऐपवा, भाकपा(माले), आइसा और आरवाईए की ओर से सावित्रीबाई फुले और जयपाल सिंह मुंडा की जयंती मनाई गई. ऐपवा नेत्री सुषमा मेहता, भाकपा(माले) नेता एडवोकेट जितेंद्र कुमार, भाकपा(माले) के जिला सचिव कालीचरण मेहता व आइसा नेत्री संजना मेहता ने गढ़वा, आरवाईए नेता कुंदन मेहता, आइसा नेत्री शालिनी मेहता, ऐपवा नेत्री रहिना बीबी व भाकपा(माले) नेता संन्तोष चौधरी ने डंडा तथा भाकपा(माले) नेताओं सत्येंद्र मेहता व जितेंद्र यादव ने मेराल के भीमखाढ़ में आयोजित समारोह को संबोधित किया.

Phule-Fatima Sheikh Jayanti in bokaro

बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड स्थित साडम राय मुहल्ला में भी सावित्री बाई फूले की जयंती मनाई गई. ऐपवा जिला अध्यक्ष शोभा देवी ने कहा कि सावित्री बाई फुले व फातिमा शेख की जोड़ी समाज में महिलाओं के शिक्षा अधिकार का प्रेरणा है. आज भी महिलाओं में शिक्षा की कमी है. उनको अपने तमाम हक-अधिकार हासिल करने के लिए संघर्ष करना होगा. मौके पर बकरीदन खातून, चलेश्वरी देवी, फुलवा देवी, नगीना खातून, ममता देवी, चमेली देवी, सीता देवी, गुडिया खातून, रूबी खातून, हिना परवीन, जुलेखा बीबी, निकहत परवीन आदि सैकड़ों महिलाएं उपस्थित थीं.

गरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड अंतर्गत दोन्दलो पंचायत में ऐपवा की ओर से देश की पहली महिला शिक्षक सावित्री बाई फुले का जन्म दिन मनाया गया. इस मौके पर महिलाओं के लिए केजी से लेकर पीजी तक की शिक्षा मुफ्त करने की मांग दोहराई गयी. कार्यक्रम में बगोदर मध्य व बगोदर पश्चिमी जिला परिषद की सदस्य क्रमशः सरिता महतो व पूनम महतो, मुखिया गीता देवी, वार्ड सदस्या सारो देवी, संजू देवी, सोनिया देवी, सावित्री देवी, मालती देवी, गीता देवी, सीता देवी सहित अन्य महिलाएं मौजूद थीं. बगोदर के तिरला गांव में ऐपवा राज्य कमिटी सदस्य सरिता साव के नेतृत्व में दर्जनों महिलाओं की भागीदारी के साथ सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई. गांवा प्रखंड में कौशल्या दास व जयंती चौधरी और जमुआ में मीना दास के नेतृत्व में इस मौके पर कार्यक्रम आयोजित किया गया.

रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड के वुमरी पंचायत भवन प्रांगण में ऐपवा जिला अध्यक्ष कांति देवी व जिला सचिव नीता बेदिया के नेतृत्व में सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई. शबाना नाज ने कार्यक्रम का संचालन किया. इस कार्यक्रम में चुम्बा, कंजमी, चपरी, पड़रिया, जोबला और तिलैया पंचायत की सैकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया.

राजधानी रांची स्थित महेंद्र सिंह भवन में ऐपवा नेत्री नंदिता भट्टाचार्य, ऐती तिर्की और शिनगी खलखो के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया.

देवघर के मोहनपुर प्रखंड मुख्यालय पर ऐपवा जिला अध्यक्ष मुंगी देवी की अध्यक्षता में दिवसीय धरना-प्रदर्शन के जरिए राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर पहली से पांचवी कक्षा तक के बच्चों की पढ़ाई शुरू करने, सभी स्कूल-काॅलेजों को खोलने, लड़कियों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करने, कन्या उच्च विद्यालय चकरमा में छात्राओं की पढ़ाई अविलंब शुरू करने, झारखंड के सभी प्रखंडों में डिग्री और मेडिकल की पढ़ाई की व्यवस्था करने तथा जन प्रतिनिधियों व नौकरी करने वालों के बच्चों की पढ़ाई सरकारी विद्यालय में करने के लिए कानून बनाने की मांग की गई. कार्यक्रम में सैकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया.

पलामू जिले के तरहसी प्रखंड अंतर्गत सोनपुरा में सावित्रीबाई फुले और जयपाल सिंह मुंडा के जन्म दिवस को संयुक्त रूप से मनाया गया.

मौके पर उपस्थित भाकपा(माले) के प्रखंड सचिव बिराज सिंह ने कहा कि सावित्रीबाई फुले व फातिमा शेख ने महिलाओं को शिक्षित करने व समाज में उनकी दशा सुधारने तथा जयपाल सिंह मुंडा ने आदिवासियों को अधिकार दिलाने के लिए अथक संघर्ष किया. आज हमें उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए.

आइसा नेता गुड्डू भुईयां ने कहा कि संघर्षों को तेज करने के लिए हमें संगठन को मजबूत बनाना होगा.

भाकपा(माले) के पांकी प्रखंड सचिव अविनाश रंजन ने कहा कि भाकपा(माले) इस क्षेत्र में गरीबों व दलित-वंचितों के आंदोलन की अगुआ ताकत है. बदलाव की लड़ाई तेज करने के लिए हमें उसे मजबूत बनाने की जरूरत है. इस अवसर पर 50 लोगों ने भाकपा(माले) की सदस्यता के लिए आवेदन देकर भाकपा(माले) में शामिल हाने की घोषणा की. बैठक में मुखदेव दांगी, नागवंशी भुईयां, प्रदीप शर्मा, बीरू भुईयां, उपेंद्र प्रजापति, रमेश मांझी, प्रतिमा कुंवर, निर्मला देवी के साथ ही सैकड़ों लोग उपस्थित थे.

sabitri-fatima


रामगढ़ में सावित्री-फातिमा जयंती

6 जनवरी 2022 को रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित मुंडा टोली में ऐपवा नेत्री सरस्वती देवी व जयंती की अगआई में बहनापा समारोह आयोजित किया गया.
समारोह की शुरूआत ऐपवा की रामगढ़ जिला सचिव नीता बेदिया व अध्यक्ष कांति देवी द्वारा सावित्रीबाई फुले व फातिमा शेख के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई. इसके बाद जयंती देवी, सरस्वती देवी, रूबी देवी, संतोषी देवी, अकली देवी, लखनी देवी, सीता देवी, रुक्मिणी देवी, उर्मिला देवी, नेहा देवी, भीमा देवी, तिजनी देवी, कमलाबाला, कौशल्या देवी, कुंती देवी, नेहा देवी, समेत सभी उपस्थित सभी महिलाओं ने पुष्पांजलि अर्पित की.
नीता बेदिया ने समारोह को संबोधित करते हुए भारत की पहली महिला अध्यापिका सावित्रीबाई फुले व उनकी साथी फातिमा शेख के संघर्षमय जीवन पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आज से 200 वर्ष पूर्व समाज में महिलाओं को किसी भी तरह की शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नहीं था. उनको बहुतेरे जुल्म, अत्याचार व शोषण का शिकार होना पड़ता था. पितृसत्तात्मक व्यवस्था के तहत बाल विवाह व सती प्रथा का प्रचलन था.
सावित्रीबाई फुले का भी बाल विवाह (9 वर्ष की आयु में) हुआ था. उनके पति ज्योतिबा फुले ने उनको शिक्षित करने में काफी योगदान किया. सावित्रीबाई फुले ने दलित, वंचित व उपेक्षित समुदाय की महिलाओं व लड़कियों को पढ़ाने संकल्प लिया और उनके लिए पाठशालायें खोलींपढ़ाने के लिए आते-जाते समय सवर्णों ने उन्हें अपशब्द सुनाए और उनके शरीर पर गोबर, कीचड़ व पत्थर तक फेंके. इन सारी यातनाओं व कठिनाइयों को झेलने हुए अपने संकल्प के बल पर वे निरंतर बच्चियों को निरंतर पढ़ाने का काम करती रहीं. उपने साथी फातिमा शेख के सहयोग से उन्होंने शिक्षा की ज्योति जलाने का काम किया, दर्जनों स्कूलों की स्थापना की और अंतिम समय तक समाज की सेवा करती रहीं.