वर्ष - 30
अंक - 6
06-02-2021


भाकपा(माले) महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा - देशव्यापी किसान आंदोलन के साथ खड़ा होने के लिए बिहार को धन्यवाद!

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ महात्मा गांधी के शहादत दिवस पर (30 जनवरी को) महागठबंधन के आह्वान पर आहूत मानव श्रृंखला में खेतिहर मजदूरों-गरीब किसानों-बटाईदार किसानों, महिलाओं, बुद्धिजीवियो ने अपनी जोरदार ताकत दिखलाई. बिहार के शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक 12.30 बजे से लेकर 1 बजे तक मानव श्रृंखला आयोजित की गई. पटना में 12 बजे से ही बुद्धा स्मृति पार्क से लाइन लगनी शुरू हो गई, जो डाकबंगला होते हुए रेडियो स्टेशन की ओर बढ़ती गई. पूरा प्रफेजर रोड कृषि कानून विरोधी नारों की तख्तियों व लाल झंडे के सैलाब से जैसे उमड़ पड़ा था. महागठबंधन के दलों भाकपा(माले), राजद, सीपीआई, सीपीआईएम, कांग्रेस के अलावा मजदूर, किसान, छात्र व महिला संगठनों ने भी आज के कार्यक्रम में अपनी भागीदारी निभाई. वहीं, भाकपा(माले) के विधायकों ने भी अपने-अपने क्षेत्र में मानव श्रृंखला का मोर्चा संभाला.

बुद्धा स्मृति पार्क के पास भाकपा(माले) महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य के साथ-साथ राजद व बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, सीपीआईएम के अवधेश कुमार, सीपीआई के रामबाबू कुमार व कांग्रेस के राज्यस्तरीय नेता मानव श्रृंखला में शामिल हुए. इसके साथ ही अखिल भारतीय किसान महासभा, ऐक्टू, खेग्रामस, आइसा, आरवाईए आदि संगठनों के नेता-कार्यकर्ता भी मानव श्रृंखला में शामिल हुए. भाकपा(माले) के राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो के सदस्य व पटना जिला सचिव अमर, अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र झा, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बिहार-झारखंड प्रभारी राजाराम सिंह, अखिल भारतीय किसान महासभा के वरिष्ठ नेता केडी यादव, शिवसागर शर्मा, राजेन्द्र पटेल, ऐपवा की मीना तिवारी, शशि यादव, सरोज चौबे, ऐक्टू के आरएन ठाकुर आदि नेताओं ने प्रमुख रूप से इस मानव श्रृंखला की अगुआई की. मौके पर राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह व प्रवक्ता मनोज झा भी मौजूद रहे.

ऐक्टू के रणविजय कुमार, आरवाईए के सुधीर कुमार, विनय कुमार, आइसा के विकास यादव, दानिश, प्रियंका प्रियदर्शनी, कार्तिक पासवान आदि ने भी जगह-जगह मानव श्रृंखला का नेतृत्व किया.

भाकपा(माले) महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य ने बिहार में खड़ी की गई मानव श्रृंखला के भारी महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि किसान आंदोलन देश में नई ऊंचाई ग्रहण कर रहा है. 26 जनवरी को आयोजित किसानों की परेड में हुई छिटपुट घटना की आड़ में मोदी सरकार आंदोलन को कुचलना चाहती थी. दिल्ली बाॅर्डर व यूपी में कुचलने की साजिशें आरंभ भी हो गई थीं. लेकिन, मोदी-योगी की तानाशाही के खिलाफ पूरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश उठ खड़ा हुआ और आज बिहार में मानव श्रृंखला लगाई जा रही है. भाजपा के लोग दुष्प्रचारित कर रहे थे कि बिहार में किसान आंदोलन नहीं है. आज वे अपनी आंखों से देख लें कि पंजाब-हरियाणा-यूपी-बिहार यानि पूरा देश मोदी सरकार के खिलाफ उठ खड़ा हो रहा है. बिहार में एमएसपी को कानूनी दर्जा देने और एपीएमसी एक्ट पुनर्बहाल करने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठ रही है.

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों की समझदारी थी कि बिहार में महागठबंधन केवल चुनाव भर का गठबंधन है. ऐसा बिल्कुल नहीं है. महागठबंधन आंदेालन का गठबंधन बनता जा रहा है. हम सब एक साथ खड़े हैं. बिहार में महागठबंधन किसानों व संविधान के साथ खड़ा है. जब तक कानून वापस नहीं होंगे, हम आंदोलन जारी रखेंगे.

पटना में इकनम टैक्स गोलबंर और समनपुरा के इलाके में भी मानव श्रृंखला लगी. समनपुरा की शृंखला में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी दिखी. फुलवारीशरीफ में भाकपा(माले) के विधायक व खेग्रामस नेता का. गोपाल रविदास तथा पालीगंज में युवा विधायक संदीप सौरभ ने दसियों किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला का नेतृत्व किया.

भोजपुर के पीरो, सहार, अगिआंव, आरा, जगदीशपुर आदि प्रखंड मुख्यालयों पर श्रृंखला लगाई गई. इन कार्यक्रमों में विधायक सुदामा प्रसाद व मनोज मंजिल तथा भाकपा(माले) के युवा नेता राजू यादव आदि शामिल हुए. राज्यव्यापी आह्वान के तहत चंपारण में बेतिया स्टेशन चौक पर भाकपा(माले) विधायक बीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में दसियों किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला आयोजित की गई. मधुबनी के जयनगर में महात्मा गांधी व बाबा साहेब अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण करने के बाद लंबी मानव श्रृंखला खड़ी की गई. बक्सर में एनएच-84 पर दो स्थानों ज्योति चौक व ब्रह्मपुर में श्रृंखला आयोजित हुई. जहानाबाद में मानव श्रृंखला का नेतृत्व विधायक रामबलि सिंह यादव ने किया. भाकपा(माले) विधायक दल नेता महबूब आलम ने बारसोई, विधायक अरूण सिंह ने काराकाट, महानंद सिंह ने अरवल और सत्यदेव राम ने सिवान में मानव श्रृंखला का नेतृत्व किया. सारण, गोपालगंज, भागलपुर, नवादा, पूर्णिया, गया, औरंगाबाद, कैमूर, समस्तीपुर आदि तमाम जिला मुख्यालयों पर लंबी कतारें दिखीं.

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जीटी रोड व सभी एनएच पर लगी मानव श्रृंखला
हिलसा (नालंदा) में वकीलों और दरभंगा में काॅलेज शिक्षकों ने दिया समर्थन, हर जगह महिलाओं की बड़ी भागीदारी

मानव श्रृंखला का पूरे बिहार में असर देखा गया. आम लोगों ने इस कार्यक्रम को अपना समर्थन देते हुए लंबी-लंबी कतारें लगाईं. जीटी रोड सहित सभी राष्ट्रीय पथों, राज पथों पर भाकपा(माले) व महागठबंधन के अन्य दलों ने अपनी ताकत दिखाई. गया जिले में जीटी रोड यानि एनएच-2 पर बाराचट्टी से शेरघाटी तक लंबी मानव श्रृंखला आयोजित की गई. गया-डोभी मार्ग एनएच-83 पर बोधगया में मानव श्रृंखला में सैंकड़ों की तादाद में किसानों की भागीदारी हुई.

अरवल में एनएच-139 व एनएच-110 पर मानव शृंखला आयोजित हुई. इसमें लगभग एक हजार किसानों की भागीदारी हुई. जहानाबाद शहर में पटना-गया मुख्य मार्ग पर सड़क के किनारे-किनारे लंबी कतारें लगीं. सिवान शहर में कचहरी ढाला से जेपी चौक होते हुए बबुनिया मोड़ तक एक लंबी कतार लगी. शहर में ही आंदर ढाला से ओवरब्रिज होते हुए सिवान रेलवे स्टेशन तक भी मानव शृंखला आयोजित की गई. मैरवां में मैरवा धाम से गुठनी मोड़ तक, गुठनी चौराहा से सिवान रोड तक और दरौली चौराहा तथा गोपालगंज शहर में मौनियां चौक से पोस्ट ऑफिस तक और भोरे प्रखंड मुख्यालय पर भी लंबी कतार लगी.

समस्तीपुर के ताजपुर में ढोल, मंजीरे, डफली लेकर भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं व महागठबंधन के समर्थकों ने मानव श्रृंखला लगाई और फिर शहर में गाते-बजाते, कृषि कानूनों को वापस करने के नारे लगाते हुए आकर्षक मार्च भी निकाला. मार्च में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय थी. समस्तीपुर शहर में कलेक्टेरियट के समीप कतार लगी. दरभंगा में एनएच-57 पर शिवधारा (बाजार समिति के समीप), जीवछ गाछ से मोरिया तक, जिला मुख्यालय में समाहरणालय के समक्ष और जाले-कमतौल पथ पर लंबी-लंबी मानव श्रृंखलायें खड़ी की गईं. लोहिया चरण सिंह काॅलेज के शिक्षक-कर्मचारियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर आज की मानव श्रृंखला के समर्थन में सड़क पर उतर कर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया. मब्बी में मनरेगा मजदूर सभा के बैनर से ग्रामीण मजदूरों ने भी आज की मानव श्रृंखला का समर्थन किया और अपनी भागीदारी निभाई.

मुजफ्फरपुर में जिला मुख्यालय सहित प्रखंड मुख्यालयों और कई गांव-पंचायतों में मानव श्रृंखला बनाई गई. एनएच-57 पर बोचहां से लेकर गायघाट तक लगभग 10 किलोमीटर लंबी श्रृंखला बनाई गई. शहर में इंसाफ मंच के कार्यकर्ताओं ने लंबी कतारें सृजित कीं. सकरा, मुरौल, औराई सहित सभी प्रखंड मुख्यालयों पर भी कतारें लगीं. मुजफ्फरपुर-हाजीपुर हाईवे पर तुर्की करहनी के पास लंबी श्रृंखला बनी. शहर को हर तरफ से घेरे में लेकर मानव श्रृंखला बनाई गइं. भगवानुपर, जीरो माइल, रामदयालू चौक, गोबरशाही आदि सभी चौराहों के इर्द-गिर्द लोग खड़े हुए और तीनों कृषि कानूनों को वापस करने की मांग की.

बेगूसराय में बेगूसराय व बलिया में एनएच-31 पर भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं ने कतारें लगाईं. तेघड़ा, नावकोठी आदि प्रखंड मुख्यालयों पर भी लोगों की लंबी कतारें देखी गईं. भागलपुर में एनच-80 और नवगछिया में एनएच-31 पर श्रृंखला बनाई गई. खगड़िया में भी यह कार्यक्रम बड़ी जन भागीदारी के साथ लागू हुआ.

भोजपुर में आरा शहर में स्टेशन गोलंबर से नवादा चौक तक और जगदीशपुर व पीरो अनुमंडल कार्यालयों पर लंबी कतारों का आयोजन हुआ. हिलसा में बड़ी संख्या में वकील समुदाय के लोग सड़क पर उतरे और मानव शृंखला का हिस्सा बनकर किसान आंदोलन का समर्थन किया. इंसाफ मंच के कार्यकर्ता भी आज के कार्यक्रम में पुरजोर तरीके से उतरे. हिलसा के अलावा कराय, इसलामपुर, एकंगर सराय, परवलपुर, थरथरी, नगरनौसा, चंडी, हरनौत प्रखंड मुख्यालयों पर बड़ी संख्या में लोग मानव श्रृंखला में शामिल हुए.

हाजीपुर में किसान नेताओं ने गांधी चौक पर एक दिवसीय उपवास व सत्याग्रह भी किया और त्रिमूर्ति चौक से समाहरणालय तक मानव श्रृंखला का भी आयोजन किया. सीतामढ़ी के परसौनी, बथनाहा, चुरौत और शहर में मेहसौली चौक से विशाल मानव श्रृंखला बनाई गई. चंपारण के सिकटा में मुस्लिम महिलाओं की व्यापक भागीदारी मानव श्रृंखला में देखी गई. पूर्णिया के रूपौली में कार्यकर्ताओं ने कतारें लगाईं.

पालीगंज में पटना-औरंगाबाद रोड और फतुहा, दुल्हिनाबाजार, मसौढ़ी आदि प्रखंड मुख्यालयों व रोहतास, कैमूर, जमुई, लखीसराय, कटिहार, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, सारण, सुपौल आदि जिलों में भी मानव श्रृंखला बनी.

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संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा

किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार द्वारा इंटरनेट सेवाओं को बाधित करने की कार्यवाही को असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास बताते हुए इसको तत्काल बहाल करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि इससे आंदोलनकारी किसानों के साथ-साथ मीडिया और स्थानीय लोगों में भी बहुत दिक्कत हो रही है. विशेषकर छात्रों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उनकी परीक्षाएं नजदीक हैं. एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है दूसरी तरफ देश की जनता को इंटरनेट से वंचित रखा जा रहा है.

आंदोलनों को सोशल मीडिया पर मिल रहे वैश्विक समर्थन का स्वागत करते हुए तथा बीजेपी द्वारा उसको देश के खिलाफ बता कर कुप्रचारित करने की निंदा करते हुए संयुक्त किसान मोर्चे ने कहा है कि देश-दुनिया से किसान आंदोलन को लगातार समर्थन मिल रहा है. शर्म की बात है कि सरकार इसे अंदरूनी मामला बताकर दबाना चाहती है. जो लोग किसानों को समर्थन कर रहे हैं उन्हें ट्रोल किया जा रहा है, जो कि निंदनीय है.

आज सयुंक्त किसान मोर्चा का एक प्रतिनिधि मंडल 26 जनवरी की पुलिस कार्रवाई में मारे गए उत्तराखंड के किसान नवरीत सिंह की अंतिम अरदास में शामिल हुआ और नवरीत को श्रद्धांजलि दी.

मोर्चे के मुताबिक अब तक संकलित जानकारी के अनुसार 125 किसानों पर एफआइआर दर्ज है व 21 किसान लापता हैं. किसान मोर्चा का कानूनी सहायता केंद्र हर बाॅर्डर पर लगाया जा चुका है जो इन सभी केसों से संबंधित कार्रवाई लगातार कर रहा है.

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