1. बिहार के मुख्यमंत्री इस बात की गारंटी करें कि समय-समय पर इस तरह की सर्वदलीय बैठकें राज्य से लेकर जिला स्तर पर आयोजित की जाएं. कोरोना से निपटने में जिला स्तर पर इस तरह की आपसी समझदारी काफी मददगार साबित हो सकती है. भाकपा(माले) कोरोना व लाॅकडाउन के पहले दौर से ही इस प्रकार की बैठकों की मांग करते रही है.

2. नेतृत्वकारी पदों पर बैठे लोगों को अपना व्यवहार जिम्मेवाराना बनाना चाहिए. बंगाल चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री अमित शाह मास्क तक का उपयोग नहीं कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए किए जा रहे उपाय जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता ही खो देंगे.

3. सबके लिए वैक्सीन का प्रावधान होना चाहिए. 45 की उम्र सीमा तत्काल खत्म की जाए.

4. कोराना संक्रमित लोगों के लिए अभी तक उच्चतर स्वास्थ्य सेवाओं में ही इलाज की व्यवस्था है, जिसके कारण काफी अफरा-तफरी का माहौल रहता है. प्रखंड/अनुमंडल व जिला स्तर पर कोविड के इलाज की व्यवस्था की जाए. सभी जिला अस्पतालों में आईसीयू व बेडों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए और उसे कम से कम दुगुनी की जाए.

5. सभी अस्पतालों में एंबुलेंस सेवाओं की संख्या बढ़ाई जाए.

6. अभी आरटी-पीसीआर की रिपोर्ट काफी देर से आ रही है. 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने की व्यवस्था की जाए और टेस्टिंग की संख्या बढ़ाई जाए ताकि संक्रमितों की सही समय पर पहचान व उनका इलाज हो सके और संक्रमण का फैलाव रोका जा सके.

7. निजी अस्पतालों में भी कोविड के इलाज की व्यवस्था की जाए, जिसका खर्च सरकार वहन करे.

8. ऑक्सीजन व रेमडेसीविर की पर्याप्त व्यवस्था की जाए.

9. जिला स्तर के निजी अस्पतालों में भी कोविड के इलाज की व्यवस्था की जाए.

10. बाहर से आ रहे मजदूरों के ससम्मान घर पहुंचाने की गारंटी की जाए. विगत साल की तरह यातनागृह बन गए क्वारंटीन सेंटरों के बजाय सभी सुविधाओं से युक्त क्वारंटीन सेंटर बनाए जाएं.

11. बाहर से आ रहे मजदूरों के लिए बड़े शहरों में केंद्र बनाए जाएं.

12. रोजगार सृजन की गारंटी की जाए.

13. मनरेगा में काम सृजित किया जाए और उसी तर्ज पर शहरों में भी काम की व्यवस्था हो.

14. प्रवासी मजदूरों सहित सभी गरीबों को अगले तीन महीने तक एकमुश्त 10,000 रु. तथा 6 माह का राशन उपलब्ध करवाया जाए. पीडीएस सिस्टम को ठीक किया जाए.

15. महंगाई व जमाखोरी पर सरकार कठोरता से कार्रवाई करे.

16. बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप्प है, यह कत्तई उचित नहीं है. न्यूनतम पढ़ाई की व्यवस्था की जाए. सभी बच्चों को प्राथमिकता के साथ कोविड का टीका दिया जाए. गरीब टोलों में स्मार्ट टीवी के जरिए पढ़ाई हो.

17. कोरोना रोकने के नाम पर पिछली बार किया गया लाॅकडाउन का अनुभव बहुत ही कड़वा है. वह अपने आप में एक आपदा साबित हुआ. इसलिए लाॅकडाउन लगाने के बजाय सामाजिक जागरूकता व लोगों को समझाने-बुझाने की प्रक्रिया पर जोर देना चाहिए. इसे आतंक का पर्याय नहीं बनाना चाहिए.

18. अगले 6 माह तक पंचायत चुनाव टाल दिए जाएं और काम काज के सुचारु संचालन के लिए उनके अधिकार भी 6 महीने तक बढ़ा दिया जाएं.

(नोट: चूंकि पूरे देश में हालात गंभीर हैं, इसलिए इन सुझावों की रौशनी में हर राज्य में इंतजमात सुनिश्चित किए जाने चाहिए)