भाकपा(माले) का 13वां उत्तर प्रदेश राज्य सम्मेलन 4-5 अक्टूबर को सीतापुर के हरगांव में संपन्न हुआ. पहले दिन यानी चार अक्टूबर को, शुरू होने के साथ ही माले राज्य सम्मेलन, लखीमपुर खीरी के तिकोनिया में तीन अक्टूबर को हुई चार किसानों की नृशंस हत्या के विरोध में प्रतिवाद दर्ज कराते हुए भूख हड़ताल में बदल गया.

सम्मेलन का उद्घाटन भाकपा(माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने किया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज हम ऐसे दौर में हैं, जहां सम्मेलन और आंदोलन में फर्क नहीं बचा है. यह बात हमारे आज के सम्मेलन का सन्दर्भ लेकर समझी जा सकती है. हमने अपने राज्य सम्मेलन को लखीमपुर खीरी में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देते हुए शुरू किया है तथा इस सम्मेलन को किसानों की हत्यारी इस सरकार के खिलाफ लड़ने के अपने जज्बे को मजबूत करने के लिए समर्पित किया है.

माले महासचिव ने कहा, आज हमारे देश में भिन्न-भिन्न आंदोलनों के बहुतेरे रूपों में बदलने और देश भर में फैल जाने की घटना घट रही है. इन व्यापक आंदोलनों को रोकने और उनका दमन करने के लिए सरकार हर तरह के हथकंडे अपना रही है, लेकिन इससे प्रतिरोध का तेवर धीमा होने के बजाय और तीव्र होता जा रहा है. सरकार ने किसान आंदोलन के खिलाफ भी तमाम दुष्प्रचार किये, इसे खालिस्तानी साजिश बताया. लेकिन ऐसी कोई भी तरकीब किसान आंदोलन को कमजोर करने में काम नहीं आयी.

का. दीपंकर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव का घटनाक्रम यह बताता है कि सरकार लोकतंत्रा का अपहरण करने की हद तक दमन करने की नीयत बना कर बैठी है. हमें यह संकल्प लेना होगा कि किसान आंदोलन के इस निर्णायक दौर में इसे जीत के मंज़िल तक पहुंचाने के लिए हम अपना सब कुछ झोंक दें. हमें यह बात पूरी शक्ति के साथ कहनी होगी कि अगर काले कृषि कानूनों को हटाना है, तो मोदी सरकार को भी हटाना होगा. इसकी शुरुआत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में योगी सरकार को हटाने से करनी होगी.

उद्घाटन सत्र को राज्य सम्मेलन के केंद्रीय पर्यवेक्षक व पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेंद्र झा (बिहार), राज्य सचिव सुधाकर यादव, सीतापुर के किसान नेता सुरजीत सिंह, पार्टी की राज्य स्थायी समिति के सदस्य ओमप्रकाश सिंह व अफरोज आलम ने भी सम्बोधित किया.

इससे पहले, सम्मेलन की शुरुआत वरिष्ठ माले नेता व अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड जयप्रकाश नारायण द्वारा झंडोत्तोलन से हुई. उद्घाटन सत्र में आए प्रतिनिधियों, पर्यवेक्षकों व अतिथियों का स्वागत भाकपा(माले) जिला सचिव व नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य अर्जुन लाल ने किया. लखीमपुर खीरी में किसान हत्या मामले में घटनास्थल पर गए भाकपा(माले) नेताओं की टीम की रिपोर्ट इस दल के सदस्य ओमप्रकाश सिंह ने रखी. सीपीआई की राज्य इकाई की ओर से आये उनकी राज्य कार्यकारिणी के सदस्य का. राजेश तिवारी ने सम्मेलन के लिए अपनी पार्टी का शुभकामना संदेश पढ़ा.

सत्र की अध्यक्षता कर रहे भाकपा(माले) नेता जयप्रकाश नारायण ने किसान आंदोलन के इतिहास को याद करते हुए कहा कि लखीमपुर खीरी की जमीन नक्सल आन्दोलन की जमीन रही है. शनिवार की घटना के बाद से किसान आंदोलन वहां पर अपनी एक पहचान के साथ उभर रहा है, जो कि ऐतिहासिक जज्बे को प्रदर्शित करता है. तीन कृषि कानून भारत के शासक वर्ग के अस्तित्व को बचाने की पहल है, इसीलिए इन्हें भारतीय किसानों पर जबरन थोपा जा रहा है. सत्र का संचालन इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष राकेश सिंह ने किया.

राज्य सम्मेलन के प्रतिनिधि सत्र की शुरुआत चार अक्टूबर की शाम को हुई और विदाई राज्य कमेटी के सचिव सुधाकर यादव ने 35 पृष्ठों की राजनीतिक-सांगठनिक व पिछले तीन साल के कामकाज की लिखित रिपोर्ट बहस-मुबाहिसे के लिए प्रस्तुत की. इस पर अगले दिन तक चले प्रतिनिधि सत्र में 50 से ऊपर वक्ताओं ने अपनी बात रखी. अंत में, कुछ सुझावों व संशोधनों के साथ उक्त रिपोर्ट को सम्मेलन ने पारित कर दिया.

समापन सत्र को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज पूरे देश में आंदोलन का उभार है. यह जो आंदोलन पूरे देश में दिखाई दे रहा है, यह भाजपा को सत्ता से बेदखल करेगा. उन्होंने विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए आंदोलन की ताकतों को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि भाकपा(माले) को उत्तर प्रदेश में सड़क पर मजबूत विपक्ष की भूमिका निभानी है.

सम्मेलन के केंद्रीय पर्यवेक्षक व पार्टी के  पोलित ब्यूरो के सदस्य धीरेंद्र झा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की विदाई पूरे देश को बचाने के लिए जरूरी है. इसके लिए व्यापक विपक्षी एकता समय की मांग है और भाकपा(माले) अपनी क्रांतिकारी भूमिका अदा करने के लिए तैयार है.

नव निर्वाचित राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि पूरे प्रदेश में किसानों, मजदूरों, महिलाओं और छात्रों-नौजवानों के सवाल पर चल रहे आंदोलन को व्यापक व तेज करते हुए सड़क पर और चुनाव में भाजपा को शिकस्त दी जा सकती है. इसके लिए हम लोग पूरी ताकत लगाएंगे.

सम्मेलन की अध्यक्षता पांच सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने की, जिसके सदस्य थे – ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा, कृष्णा अधिकारी, ओमप्रकाश सिंह, विजय विद्रोही और कुसुम वर्मा. सम्मेलन संचालन में सहयोग के लिए बनी स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य थे – शशिकांत कुशवाहा, रामप्यारे राम, अनिल पासवान, मीना व सुनील मौर्य.

सम्मेलन में राज्य के लगभग तीन दर्जन जिलों से 36 महिलाओं समेत 265 प्रतिनिधियों और एक महिला समेत 10 पर्यवेक्षकों ने भाग लिया.

सम्मेलन में प्रमुख रूप से भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो सदस्य व उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रभारी कामरेड रामजी राय, हिंदी मुखपत्र समकालीन लोकयुद्ध के कार्यकारी संपादक संतोष सहर (पटना), केंद्रीय कमेटी सदस्य मोहम्मद सलीम, आइसा प्रदेश अध्यक्ष शैलेश पासवान, विद्या रजवार, जीरा भारती और शंकर कोल आदि नेता उपस्थित रहे.

 

पारित हुए कई प्रस्ताव

सम्मेलन ने लखीमपुर खीरी में किसानों की हत्या के जिम्मेदार लोगों को तत्काल गिरफ्तार करनेे और हत्या की साजिश में शामिल केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी को मंत्री पद से बर्खास्त करने; किसान विरोधी तीनों कृषि कानून, चारों श्रम कोड व प्रस्तावित बिजली बिल रद्द करने; महिला-दलित-अल्पसंख्यक समुदायों पर जारी हमलों को तत्काल रोकने, असम के दरांग में मोइनुल की हत्या व बर्बरता की घोर निंदा करते हुए भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो इसकी गारंटी करने; उत्तर प्रदेश में अपराध खत्म करने के नाम पर ‘ठोक दो’ पालिसी के तहत चल रहे पुलिस राज की निंदा व फर्जी मुठभेड़ व पुलिस कस्टडी में हुई मौतों के जिम्मेदारों को दंडित करने व इस पर तत्काल रोक की मांग की.

सम्मेलन ने पूरे देश में विमुद्रीकरण के नाम पर सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने व निजीकरण करने की नीतियों को तत्काल रोकने, देश व प्रदेश में सभी नौजवानों को सम्मानजनक रोजगार की गारंटी करने, दलितों, आदिवासियों व पिछड़ों को मिलने वाले आरक्षण को सरकार द्वारा खत्म करने की लगातार की जा रही कोशिशों की निंदा करते हुए समुचित आरक्षण को लागू करने, नई शिक्षा नीति 2020 को शिक्षा का निजीकरण करने की योजना करार देते हुए इसको तत्काल रद्द करने तथा धर्मांतरण कानून एवं लव जिहाद के नाम पर अल्पसंख्यक मुस्लिम युवाओं पर हो रहे हमले की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाने, जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर वंचितों का अधिकार छीनने व विभाजनकारी राजनीतिक साजिश को तत्काल बंद करने की मांग की.

सम्मेलन ने दुद्धी को नया जिला बनाने के आंदोलन का समर्थन करते हुए तत्काल जिला घोषित करने, कोरोना काल में सरकारी कुप्रबंधन के चलते मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा देने, पूरे देश व प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने, पूरे प्रदेश में कोल, बियार, मुसहर समेत ऐसी अन्य जातियों को अनसूचित जनजाति का दर्जा देन, माइक्रो फाइनेंस कंपनियों द्वारा वसूले जा रहे कर्ज को माफ करने, फाजिल जमीनों पर दलितों-गरीबों को जमीन का पट्टा देने, गन्ने के बकाया 18 हजार करोड़ का भुगतान व गन्ने का रेट 450 रु. प्रति कुंतल करने, 2021 के प्रस्तावित जनगणना में जातीय गणना को अनिवार्य रूप से जोड़ने और हाथरस गैंग रेप दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने आदि मांगों के प्रस्ताव भी पारित किए.