(28 सितम्बर 1907 - 23 मार्च 1931)

"देश को एक आमूल परिवर्तन की आवश्यकता हैऔर जो लोग इस बात को महसूस करते हैं उनका कर्तव्य है कि साम्यवादी सिद्धातों पर समाज का पुनर्निर्माण करेंजब तक यह नहीं किया जाता और मनुष्य द्वारा मनुष्य का शोषण तथा एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र के शोषण को, जिसे साम्राज्यवाद कहते हैं, समाप्त नहीं कर दिया जाता, तब तक मानवजाति को उसके क्लेशों से छुटकारा मिलना असंभव है, और तब तक युद्धों को समाप्त कर विश्व शांति के युग का प्रादुर्भाव करने की सारी बातें महज ढोंग के अतिरिक्त कुछ नहीं है.”