लखीमपुर खीरी में किसानों का कत्लेआम नेताओं और सरकारों द्वारा किसानों के प्रति बरती जा रही बर्बरता का ताजा उदाहरण है. एक स्थानीय मुजरिम से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बने अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर लौट रहे किसानों के खिलाफ सोची-समझी क्रूरतापूर्ण साजिश रची और उन पर पीछे से गाड़ी चढ़ा जानलेवा हमला कर कुचलने में शामिल वाहनों के काफिले का नेतृत्व किया. इस भीषण हिंसा में चार किसानों, एक पत्रकार और एक ड्राइवर समेत आठ लोगों की मौत हो गई. रिपोर्टों से पता चलता है कि आशीष मिश्रा और उनके गुर्गों ने न केवल किसानों को गाड़ी से कुचला, बल्कि उन्हें मारने के लिए पिस्तौल से गोलियां भी दागी. लखीमपुर खीरी में यह हिंसा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ हिंसक भड़काऊ बयानों के बाद घटी.

जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ है, तब से भाजपा ने इसको कुचलने के लिए हर हथकंडा अपनाया है. फिर भी, भाजपा द्वारा किसान आंदोलन को कुचल कर खत्म कर देने का हर कदम उलटा पड़ता जा रहा है और आंदोलन के दायरे का विस्तार होता जा रहा है. सबसे पहले, भाजपा ने किसान आंदोलन को राजनीति से प्रेरित और पंजाब तक ही सीमित बता कर खारिज करने की कोशिश की. दिल्ली की ओर मार्च कर रहे किसानों को कंटीले तारों और हिंसा पर उतारू पुलिसकर्मियों द्वारा दिल्ली की सरहदों पर रोक दिया गया. इसके परिणामस्वरूप दिल्ली के सरहदों की किसानों द्वारा की गयी घेराबंदी ने हरियाणा और पंजाब के किसानों की एकता को ठोस किया तथा हरियाणा के किसानों ने दिल्ली की सरहदों पर मोर्चा संभाले किसानों के शिविरों को हर संभव मदद कर भोजन और जरूरत की अन्य वस्तुओं को मुहैया कराया. 26 जनवरी को दिल्ली की सरहदों को किसानों से सख्ती से खाली करवाने की कार्रवाई की भाजपा सरकार की कोशिश के परिणामस्वरूप पश्चिमी यूपी के किसान दिल्ली सरहद स्थित धरना-स्थल पर उमड़ पड़े व साथ-साथ अपने इलाकों में किसान रैलियां आयोजित करने को भी आमादा हो गये. लखीमपुर खीरी नरसंहार के बाद पूरे उत्तरप्रदेश में इन क्रूर हत्याओं के खिलाफ जनाक्रोश की लहर फैल रही है और किसान आंदोलन के एक नये इंकलाबी दौर से गुजरने की उम्मीद है.

जब किसानों के आंदोलन को पीछे धकेलने या कुचल कर खत्म करने में भाजपा में नाकाम रही, तो उसने बढ़ती हताशा में आंदोलन को कुचलने के लिए बार-बार हिंसा भड़काई. हमने करनाल में देखा कि किस तरह से उप-प्रभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) ने अपने लोगों को प्रदर्शन कर रहे किसानों के ‘सिर फोड़ने’ का आदेश दिया और इसके बाद किसानों पर रक्तरंजित हमले हुए. इससे भी बुरी बात यह कि अब हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से यह कहते हुए पाया गया कि 500, 700, 1,000 लोगों के जत्थे को  स्वयंसेवक के रूप में तैयार करो और  फिर किसानों को  हर जगह ‘जैसा को तैसा’ जबाब दो व बाकी चिंता न करो... जब एक महीने, तीन महीने या छह महीने वहां  जेल में रहोगे तो इतिहास में नाम दर्ज  करा बड़े नेता बन जाओगे. असम के  धौलपुर में गरीब मुस्लिम किसानों को ‘बांग्लादेशी’ कहकर बेदखल करने के भाजपा शासन के जानलेवा अभियान ने एक आदमी और एक बच्चे की हत्या कर दी और उनके मृत शरीर के साथ वहशियाना हरकतों को अंजाम दिया गया. अजय मिश्रा की धमकियों के बाद उनके बेटे द्वारा किसानों पर गाड़ी चढ़ा ताबड़तोड़ हत्याओं को अंजाम देना भाजपा के हिंसा और डरा-धमका कर दहशत फैलाने के व्यापक एजेंडे का हिस्सा है.

किसानों के विरोध ने पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार को लखीमपुर खीरी नरसंहार पर घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया है. पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने और आशीष मिश्रा पर हत्या करने के लिए व अजय मिश्रा टेनी को साजिश रचने के लिए प्राथमिकी में उनके नाम दर्ज करने करने लिए सहमत होना पड़ा. भाजपा द्वारा दी जा रही धमकियों और उनकी प्रचारक मीडिया द्वारा हिंसा के लिए किसानों को ही दोषी ठहराने की कोशिशों के बावजूद, यूपी सरकार को सच्चाई के प्रमुख पहलुओं को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

हिंसक अपराधों के लंबे ट्रैक रिकाॅर्ड वाले अजय मिश्रा टेनी को गृह मंत्री अमित शाह जो खुद भी इसी तरह की उपलब्धियों का दावा कर सकते हैं, के डिप्टी के रूप में नुमाइंदगी करने को चुनना अपने आप मे काफी कुछ बयान कर जाता है. अब जबकि किसानों पर जानलेवा हमले की साजिश रचने के मामले में टेनी का नाम प्राथमिकी में दर्ज हो गया है, तो ऐसे में उन्हें मंत्री पद पर रहने की इजाजत कैसे दी जा सकती है?  हर गुजरते दिन के साथ उनकी बर्खास्तगी की मांग जोर पकड़ रही है.

मोदी, योगी और खट्टर सरकार जितनी चाहे उतनी हिंसा कर ले, पर यह केवल उनकी अपनी हताशा और किसानों के दृढ़ संकल्प को रेखांकित करता है. अजय मिश्रा की बर्खास्तगी, मारे गए किसानों के लिये न्याय, असम से लेकर यूपी तक व हरियाणा से दिल्ली तक की भाजपा की हत्यारी हुकूमत को सजा देने और कृषि कानूनों को निरस्त करने की किसानों की मांगों के साथ पूरे आवाम को अवश्य ही एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए.