विगत 24 सितंबर को मोदी राज की स्कीम वर्कर्स विरोधी नीतियों के खिलाफ पूरे देश में स्कीम वर्करों की एकदिवसीय संयुक्त राष्ट्रीय हड़ताल हुई जो ऐतिहासिक रूप से सफल रही. इस हड़ताल में लाखों स्कीम वर्कर्स की भागीदारी रही. स्कीम वर्कर्स की राष्ट्रीय हड़ताल में आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी, विद्यालय रसोईया, ममता सहित अन्य स्कीम वर्कर्स ने सरकारी धमकियों को धत्ता बताते हुए बड़े पैमाने पर सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के पक्ष में आम लोगों का समर्थन जुटाया. यह हड़ताल मुख्यतः सम्मानजनक मासिक मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन की मांग पर थी. ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन (ऐक्टू) सहित संयुक्त प्लेटफार्म (मंच) ने हउ़ताल का आह्वान किया था. बिहार, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, असम, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा, बंगाल, असम, झारखंड, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में हड़ताल के दौरान विविध कार्यक्रम हुए. देशव्यापी हड़ताल का नेतृत्व स्कीम वर्कर्स की नेता शशि यादव, सरोज चौबे, श्वेता राज, गीता मंडल, स्वर्णा तालेकर, कमला कुंजवाल, रीता कश्यप, जयश्री दास, उमा नेताम, शैव्या पांडे, ऐक्टू नेता कैलाश पांडे, विजय व ऐपवा नेत्री आरती राय ने किया.

मोदी के फूल हमारे किसी काम नहीं आए

देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली आशा कामगार यूनियन (ऐक्टू) ने राजधानी के मंडी हाउस गोल चक्कर से सैकड़ों आशाओं की भागीदारी के साथ ‘आशा अधिकार मार्च’ निकाला. आशा कर्मियों ने केंद्रीय श्रम मंत्री को ज्ञापन सौंप कर सरकारी कर्मचारी के दर्जा देने और प्रतिमाह 21,000 रुपए वेतन की मांग उठाई. प्रदर्शन में दिल्ली के जहांगीरपुरी, आदर्श नगर, वज़ीरपुर, साद नगर, पालम, महिपालपुर, छत्तरपुर, संगम विहार, गौतम नगर, त्रिलोकपुरी, मुस्तफाबाद, भजनपुरा आदि इलाकों से आशा कर्मियों ने हिस्सा लिया.

प्रदर्शन के बाद आशाओं का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव से मिला और आशा कर्मियों के तरफ से ज्ञापन भी सौंपा. आशाओं ने सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, 21000 रुपए प्रतिमाह वेतन लागू करने, 10,000 रुपए प्रतिमाह कोरोना भत्ता देने, सवेतन मातृत्व अवकाश जैसी कई मांगें उठाई. कोरोना के दौरान मारी गई आशाओं को एक करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग की गई और यूनियन बनाने के अधिकार पर हमले को रोकने आदि मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज किया गया. दिल्ली आशा कामगार यूनियन ने साफ शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार को आशाओं के मुद्दों को गम्भीरता से लेते हुए तुंरत कार्यवाही करनी होगी. अगर ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में और मजबूती से आशाओं का प्रदर्शन होगा और सरकार को आशाओं की मांगों के आगे झुकना होगा.

दिल्ली आशा कामगार यूनियन की महासचिव श्वेता राज ने आशाओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश के तमाम राज्यों में सेवा के नाम पर स्कीम कर्मचारियों का शोषण जारी है. सरकार ने कोरोना महामारी के सबसे भयानक दौर में भी आशा कर्मियों को दस्ताने, मास्क और सैनिटाइजर नही दिया. जो आशाएं महामारी की चपेट में आ गईं, उनके परिवार को मुआवजा नही दिया गया. ‘पाॅइंट सिस्टम’ के जरिए मनमाने तरीके से आशाओं का इंसेंटिव काट लिया जाता है. प्रदर्शन में मौजूद एक आशा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मोदी सरकार द्वारा बरसाये गए फूल हमारे किसी काम के नहीं, इतनी भयंकर महंगाई में भी हमें 33 रुपए रोजाना पर काम करना पड़ता है. ऐक्टू के राष्ट्रीय महासचिव राजीव डिमरी ने देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के लिए सभी स्कीम वर्कर्स को बधाई देते हुए कहा कि स्कीम वर्कर्स को नजरअंदाज करना सरकार को भारी पड़ेगा.

नीतीश सरकार की धोखाध्ड़ी के खिलाफ गुस्सा

बिहार में बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ (गोप गुट-ऐक्टू) के बैनर तले आशाओं ने राष्ट्रीय मांगों के साथ-साथ नीतीश सरकार की बेरुखी को मुद्दा बनाते हुए राज्य के अधिकांश पीएचसी को ठप कर उसके मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन किया. आशाओं ने कहा कि नीतीश राज में कोरोना काल के पारिश्रमिक का भुगतान नही हुआ है जो एक अक्षम्य अपराध है. अर्जित बकाये के साथ राज्य सरकार द्वारा तय 1000 रुपये की मासिक पारितोषिक राशि का भुगतान लम्बे समय से नहीं हुआ है.आशाओं से सभी तरह का काम सरकार लेती है, उनको चुनावी ड्यूटी में भी लगाती है, लेकिन उन्हें विभागीय कर्मचारी घोषित करने और मासिक मानदेय देने से सरकार भाग रही है. बिहार में कोरोना काल की तय और अर्जित राशि भी नीतीश सरकार ने भुगतान नहीं किया है. उन्होंने सरकार से अपनी लंबित मांगों को पूरा करने की मांग की.

बिहार के पटना, रोहतास, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, मुंगेर, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सिवान, गोपालगंज, चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, समस्तीपुर, खगड़िया, भभुआ, कटिहार, शिवहर, भोजपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण,नवादा आदि जिलों में बहुत ही प्रभावी हड़ताल हुई. नौबतपुर पीएचसी और बिक्रम पीएचसी पर हड़ताली आशाओं को सम्बोधित करते हुए स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय संयोजन टीम की सदस्य और बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ की अध्यक्ष शशि यादव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें हमारे न्यायपूर्ण सवालों पर चुप्पी साधी हुई है. हमें अपने धारावाहिक आंदोलन और एकता से उसकी चुप्पी को तोड़ना है. हम सभी स्कीम वर्कर्स अगर एकताबद्ध हो जाएं तो सरकारों की नींद हराम हो जाएगी. एक दिन की हड़ताल से हमने सरकार को अल्टीमेटम दिया है. अगर सरकार हमें न्यूनतम मजदूरी आधारित मासिक मानदेय नही देती है और हमारी सेवा का नियमितीकरण नही करती है तो हम आगे और भी बड़े संघर्ष में उतरेंगे. इसके लिए हम सबों को अभी से ही तैयारी शुरू कर देनी है.

विगत 16 अगस्त से सभी विद्यालय खुल जाने के बावजूद बिहार में मध्यान्ह भोजन नहीं बन रहा है. राज्य के शिक्षा मंत्री के उस बयान पर रसोइयों में भारी प्रतिक्रिया हुइ ळैं जिसमें उन्होंने मध्यान्ह भोजन योजना को एनजीओ के हवाले कर देने को कहा है. रसोइयों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने, मानदेय का नियमित भुगतान करने, 10 के बजाय 12 महीने का मानदेय देने व इसकी राशि 21 हजार रुपये करने आदि तमाम पुरानी मांगों के अलावा मध्यान्ह भोजन योजना को एनजीओ के हवाले न करने की मांग भी पुरजोर ढंग से उठाई गई. पंचायत चुनाव होने के बावजूद पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, मुंगेर, नालंदा, जमुई, सिवान, वैशाली और गया में जिला मुख्यालयों और पटना, भागलपुर, दरभंगा और जहानाबाद में प्रखंडों पर कार्यक्रम आयोजित किये गये. पटना में संघ की महासचिव सरोज चौबे, सिवान में अध्यक्ष सोहिला गुप्ता, पूर्वी चंपारण में कुमारी देवी, मुंगेर में सुनीता देवी, गया में विभा भारती, बेगूसराय  में किरण देवी, भागलपुर में पूनम देवी, दरभंगा में संतरा देवी, मुजफ्रफरपुर में सुधा सिंह, जमुई में मो. हैदर और जहानाबाद में पूनम देवी ने हड़ताल का नेतृत्व किया.

उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में जंग जारी है

स्कीम वर्कर्स की राष्ट्रीय हडताल मे ऐक्टू उत्तर प्रदेश से सम्बद्ध आंगनबाड़ी, आशा व रसोइया कर्मियो के संगठनो ने रायबरेली, कानपुर, जालौन, इलाहाबाद, जौनपुर, मऊ, चंदौली, लखनऊ, देवरिया, बिजनौर, लखीमपुर (पलिया) में प्रदर्शंन किया. ‘उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन’ व ‘उत्तर प्रदेश मिड डे मील वर्कर्स यूनियन’ के बैनर तले 200 से ज्यादा स्कीम वर्कर्स ने ने रायबरेली में भारी बारिश के बीच जुलूस निकालकर सभा की और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा. अनीता मिश्रा, राधा राजपूत, गीता मिश्रा, सुशीला ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया. मंजू देवी, पुष्पा, गेना, गुड़िया देवी आदि के नेतृत्व में इलाहाबाद में पत्थर गिरजाघर चौराहा (सिविल लाइन्स) पर दर्जनों आशा व रसोइया कर्मियो ने धरना देकर जिलाधिकारी को मांग पत्र दिया.

कानपुर के विकास खंड शिवराजपुर में उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में 50 से अधिक आशा कर्मियो ने हिस्सा लिया. आशा वर्कर्स गोल चौराहे पर श्रमायुक्त कार्यालय के समक्ष आयोजित संयुक्त कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया. लखीमपुर खीरी (पलिया) में आरती राय के नेतृत्च में आशा वर्कर्स ने प्रदर्शन किया. देवरिया में प्रेमलता पांडेय के नेतृत्व मे आशा, रसोइया तथा ग्राम प्रहरियों का प्रदर्शन हुआ. जालौन में ऐक्टू नेता का. राम सिंह की अगुआई में आशा व आंगनबाड़ी कर्मियों का प्रदर्शन हुआ. जौनपुर मे ऐक्टू नेता का. गौरव सिंह आगंनबाड़ी कर्मियो के प्रदर्शन में शामिल हुए. मऊ में भी ऐक्टू जिला संयोजक शिवमूरत के नेतृत्व में रसोईया कर्मियो ने प्रदर्शन किया और आगनबाड़ी कर्मियो के साथ संयुक्त रुप से धरना देकर साझा मांगपत्र दिया. लखनऊ मे अपनी मांगो के पोस्टर प्रदर्शित कर आशा कर्मियो ने राष्ट्रीय हड़ताल के साथ एकजुटता प्रदर्शित की. बिजनौर के दो उप केन्द्रों मे 50 की संख्या मे सोनिया व बासू के नेतृत्व में प्रदर्शन कर मांगपत्र दिया गया. आशा कार्यकर्ता, विद्यालय रसोइया व अन्य स्कीम वर्कर्स ने विपरीत मौसम में भी अच्छी संख्या में हड़ताल में भाग ले कर इसे सफल बनाया. उत्तराखंड में नैनीताल और बाजपट्टी में आशा कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री पर  वादा खिलाफी का आरोप लगाया.

झारखंड के कई जिलों में सफल हड़ताल हुई जिसमें बड़ी संख्या में रसोइयों ने इसमें हिस्सा लिया. प. बंगाल के 24 परगना जिले में भी विद्यालय रशोइया ने सफल हड़ताल आयोजित किया. असम में  आशा कार्यकर्ताओं ने पीएचसी को ठप कर हड़ताल को सफल बनाया. महाराष्ट्र में कोल्हापुर में आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका ने बड़ी संख्या में जुट कर  प्रभावकारी प्रदर्शन किया. जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र ठप रहे. अन्य जिलों में भी आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं ने काम बंद कर हड़ताल को सफल बनाया.

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