वर्ष - 31
अंक - 43
22-10-2022

विगत 18 अक्टूबर 2022 को किसानों के खेतों से फसल सहित जबरन काटी गई मिट्टी को अविलम्ब भरवाने और मुआवजा देने, सड़क निर्माण में हो रही घटिया काम की जांच कराने, किसान नेता सुनील कुमार राव को धमकाने व हत्या करने की धमकी देने वाले ठेकेदार-दलालों पर कार्रवाई करने, ठेकेदार-प्रशासन-अपराधी-सामंत गठजोड़ पर कार्रवाई करने आदि मांगों को लेकर अखिल भारतीय किसान महासभा ने प. चंपारण के जिला पदाधिकारी के सामने प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम मांग पत्र सौपा.

केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (फेज -3) में प. चंपारण के बैरिया प्रखंड के गदियानी से बलुआ टोला तक करीब 6 किलोमीटर सड़क (मंगलपुर उप वितरणी) पर निर्माण चल रहा है. सड़क निर्माण में सड़क निर्माण स्थल से 2 किलोमीटर दूर से 100घ् मिट्टी लाने का प्रावधान है.  इसके लिए 1 करोड़ 50 लाख रुपये आवंटित हैं. लेकिन पैसा बचाने के लिए ठीकेदार ने किसानों के खेतों में लगी फसल को बर्बाद करते हुए सड़क के किनारे से ही जबरन 15-16 फुट चौड़ा और 5-6 फुट गहरा मिट्टी काट लिया. 19 जुलाई 2022 को कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य विभाग से जब इसकी लिखित शिकायत की गई तो उसने कहा कि किसानों का मिट्टी भरवाने का आदेश ठीकेदार को दे दिया गया है और बरसात बीतते ही 15 अक्टूबर तक यह हो जायेगा और तब तक काम स्थगित रहेगा. किंतु 9 सितंबर 2022 से ठीकेदार ने फिर से निर्माण कार्य शुरू करा दिया और वह भी निहायत ही घटिया. कार्य शुरू करने के साथ ही, ठीकेदार ने कुछ दलालों को खड़ा कर किसानों को डराने-धमकाने और भरमाने, किसानों के बीच फूट डालने व किसान महासभा को बदनाम करने का प्रयास शुरू किया गया. कुछ किसानों से फुसलाकर हस्ताक्षर करवाया और बाकी फर्जी व जिनके खेतों से मिट्टी कटी ही नहीं थी वैसे किसानों से हस्ताक्षर करा कर विभाग में जमा करवाया गया. जबकि करीब 95» किसानों ने हस्ताक्षर नही किया और दलालों को भागा दिया. किसान महासभा के नेतृत्व में किसानों ने बैठक कर सिरिसिया-मठिया चौक पर कार्यपालक अभियंता का पुतला दहन किया, टेका चौक पर किसानों ने बैठक कर 18 अक्टूबर 2022 को जिला पदाधिकारी के समक्ष प्रदर्शन का ऐलान किया.

किसानों के आंदोलन से बौखलाये ठेकेदार-अपराधी-सामंती गठजोड़ व अधिकारियों ने किसानों के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले किसान महासभा के जिला अध्यक्ष व भाकपा(माले) नेता सुनील कुमार राव व अन्य को रंगदारी मांगने के फर्जी मामले में फंसाने व उनकी हत्या करवाने आदि की धमकी चौक चौराहों पर देना शुरू किया. ग्रामीण कार्य विभाग के कनीय अभियंता से लेकर कार्यपालक अभियंता तक ठेकेदार के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं. यह सारा हथकंडा अपनाने के बाद भी किसान डटे हुए हैं और आंदोलन में भागीदारी कर रहे हैं. वे न्याय न मिलने तक आंदोलन जारी रखने को तैयार हैं.

गन्ना किसानों का हाल तो और भी बदतर है. बगैर किसी वैज्ञानिक अनुसंधान व अनुशंसा के सीओ-0238 व सीओ-118 को उन पर थोपा जा रहा है. हर साल की तरह इस साल भी गन्ने की यह फसल रोग का शिकार हो रहा है. पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी इसमें सुखने की बिमारी देखने को मिल रही है – खासकर सिकटा व मैनाटांड वाले इलाके में. सरकार ने सर्वे करा कर इसका मुआवजा देने का अब तक कोई प्रावधान नहीं किया है. दूसरी नया पेराई सत्र शुरू होने को है, लेकिन सरकार ने अब तक गन्ने का नया रेट तक तय नहीं किया है. घाटे में चल रही खेती को सहारा देने के लिए फिलहाल गन्ना मूल्य 400 रु. प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग भी की गई.

– सुनील यादव

demand of compensation