चारु मजुमदार और भारतीय कम्युनिस्ट आन्दोलन की गौरवशाली विरासत

कोलकाता के लालबाजार पुलिस लाॅकअप में कामरेड चारु मजुमदार की मृत्यु के बाद पचास वर्ष बीत चुके हैं. उस समय, भारतीय राज्य ने राहत की बड़ी सांस जरूर ली होगी – यह सोचते हुए कि उनकी मौत से नक्सलबाड़ी के बाद पूरे भारत में फैल जाने वाली क्रांतिकारी लहर का अंत हो जाएगा. लेकिन पांच दशक के बाद, जब मोदी हुकूमत विरोध की हर आवाज को दबा देने का प्रयास कर रही है, तब उसे इस विरोध को दंडित करने के लिए ‘अरबन नक्सल’ शब्द को गढ़ना पड़ा है. स्पष्ट है कि नक्सलबाड़ी और चारु मजुमदार का हौवा उनकी मृत्यु के पांच दशक बाद भी भारतीय शासकों का पीछा नहीं छोड़ रहा है.

भारत के लिए श्रीलंका से सबक: बढ़ती कीमतों को रोको, रोजगार दो, सांप्रदायिक साजिशें बंद करो!

भारत का दक्षिणी पड़ोसी देश श्रीलंका भयानक आर्थिक संकट से कराह रहा है. इस द्वीपीय राष्ट्र पर कर्ज के भारी बोझ ने उसे अभूतपूर्व अस्तव्यस्तता में धकेल दिया है जिसके दो प्रमुख लक्षण हैं: आसमान छूती कीमतें और बुनियादी जरूरत की सामग्रियों की घोर किल्लत. श्रीलंका की जनता विद्रोह में उतर पड़ी है. वे राजपक्षे भाइयों के शासन को खत्म करना चाहते हैं, जो एक दशक से भी ज्यादा अरसे से राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री के बतौर श्रीलंका की सत्ता पर काबिज हैं.

पश्चिम बंगाल में पुलिस मनमानी और राजनीतिक आतंक के खतरनाक संकेत

कोलकाता के आलिया विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता तथा कोलकाता में सीएए प्रतिवादों और कई अन्य एकजुटता मुहिमों के जाने-पहचाने कार्यकर्ता अनीस खान को आधी रात में हावड़ा जिला में आमटा स्थित उसके अपने तिमंजिले मकान की छत से नीचे धकेलकर की गई खौफनाक हत्या ने वाजिबन पश्चिम बंगाल में व्यापक जनाक्रोश को जन्म दिया है. उसके पिता के अनुसार, 18 फरवरी को लगभग आधी रात में पुलिस वर्दीधारी एक गिरोह उनके घर में घुस आया और उसमें से एक ने उन्हें बंदूक की नोंक पर रोके रखा, जबकि बाकी लोग उफपर चले गए और उन्होंने अनीस को छत से नीचे धकेल दिया.

कर्नाटक का हिजाब हंगामा: भाजपा की दक्षिणी प्रयोगस्थली से चेतावनी

उत्तर प्रदेश और चार अन्य राज्यों में विधानसभा के लिए हो रहे चुनावों के दौरान ही भाजपा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पैदा करने की जी-तोड़ कोशि कर रही है. हमने हरिद्वार में धर्म संसद के नाम पर नफरती सभा को देखा जहां जनसंहार का खुला आह्वान जारी किया गया था. जल्द ही अन्य सार्वजनिक जुटानों में भी ऐसे ही आह्वान जारी किए गए. इसी बीच संघ-भाजपा गिरोह की दक्षिणी प्रयोगस्थली कर्नाटक में मुस्लिम महिलाओं द्वारा हिजाब पहनने को लेकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का एक नया जरिया खोज लिया गया है.

यहां गांधी के लिए जुबानी जमाखर्च – उनके हत्यारे के लिए प्रशंसा भारत के पहले आतंकी गोडसे के प्रति भाजपा के समर्थन को बेनकाब करें

30 जनवरी मोहनदास करमचंद गांधी के शहादत दिवस के बतौर मनाया जाता है. निहत्थे गांधी पर गोलियां चलाकर उनकी हत्या करने वाला नाथूराम गोडसे भारत का पहला आतंकी था. आज हम भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर और भाजपा नेता साक्षी महाराज एवं तथाकथित ‘धर्म संसदों’ में नफरती भाषण देने वालों को उस आतंकी गोडसे का महिमामंडन करते देख रहे हैं. हम आरएसएस के सिद्धांतकारों को यह कहते भी सुन रहे हैं कि सावरकर और गोडसे नहीं, बल्कि खुद नेहरू गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार थे.

75 साल का भारत : अंदरूनी घेरेबंदी में जकड़ा हुआ

वर्ष 2022 भारत की आजादी की 75वीं सालगिरह और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती है. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक पुरुषों को हड़पने की हताशा-भरी कोशिशों में मोदी सरकार ने 23 जनवरी, सुभाष चंद्र बोस की जयंती, को भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह की आधिकारिक शुरूआत का दिन घोषित कर दिया है और यह फैसला सुनाया है कि इंडिया गेट पर इस प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाएगी.

“ऑक्शन” (नीलामी) ऐप ‘संघ’ के सांप्रदायिक और महिला-विरोधी चरित्र को बेनकाब करता है

भारत में मुस्लिम महिलाओं के लिए यह नया साल हिंदू वर्चस्ववादी ताकतों द्वारा एक नए रूप में पुरानी गालियों के साथ शुरू हुआ है. एक ऐप में मुस्लिम महिलाओं के सोशल मीडिया प्रोफाइल से उनके नाम और तस्वीरें चुराकर उन्हें ऑनलाइन “नीलामी” के लिए पेश किया जा रहा है. इनमें से कई मुस्लिम महिलाएं पत्रकार और कार्यकर्ता हैं. यह एक नए किस्म का ऐप है जो पिछले साल सामने आया है और वह मुस्लिम महिलओं की ऑनलाइन “नीलामी” कर रहा है. ऐप का नाम हिंदू वर्चस्ववादियों द्वारा मुस्लिम महिलाओं को दी जाने वाली अपमानजनक गालियों पर रखा गया, जिन्हें हम यहां बोल भी नहीं सकते हैं.

धर्म संसद के नाम पर नफरती जुटानों के खिलाफ आवज बुलंद करें

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में, हरिद्वार (उत्तराखंड) में और रायपुर (छत्तीसगढ़) में ऐसी जुटानें की गईं जिसमें भगवाधारी नेताओं ने मुस्लिमों के जनसंहार का आह्वान किया और भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बना देने की शपथ दिलाई. धर्म संसद के नाम पर आयोजित इन जुटानों की अगुवाई हिंसक आतंकवादियों का एक संगठन कर रहा है. धर्म की आड़ में वे लोग खुलेआम हिंदू बच्चों को कट्टर आतंकी विचारधारा और हथियारों से लैस कर रहे हैं.

‘आधार’ को वोटिंग से जोड़ना मताधिकार पर हमला है

लोकसभा में निर्वाचन कानून (संशोधन) बिल 2021 को पारित करवाना भारत के लोकतंत्र को खत्म करने की दिशा में एक खतरनाक कदम है. इस प्रस्तावित संशोधन के जरिये मताधिकार को ‘आधार’ जांच से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. अनेक जन-विरोधी कानूनों की तरह इस संशोधन को भी ध्वनि मत से लोकसभा में पारित करवा लिया गया; और कई विपक्षी नेताओं की इस मांग को नजरअंदाज कर दिया गया कि इस बिल को संसदीय समिति के पास भेजा जाए जो इसके फलाफल पर विचार करेगी और विशेषज्ञों से सलाह लेगी.

भारत के ऐतिहासिक किसान आंदोलन की पहली वर्षगांठ पर


26 नवंबर, 2021 को ऐतिहासिक किसान आंदोलन का एक साल पूरा हो जाएगा. अपने लगभग एक साल के जीवन काल में इस आंदोलन ने अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में जनता की अपार ताकत की विलक्षण क्षमता को दिखाया है. व्यापक सामाजिक और विविध वैचारिकी की विस्तृत  श्रेणियों  का प्रतिनिधित्व करने वाले सैकड़ों किसान संगठन लगातार उकसावे, दुष्प्रचार और योजनाबद्ध हिंसक हमलों के बाबजूद अभूतपूर्व एकता, अदम्य साहस और सामूहिक अनुशासन के साथ संघर्षरत हैं.