लोकसभा चुनाव -2024 में मोदी सरकार की रणनीति बनाम जनता का मुद्दा

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी संसद सत्र 10 फरवरी को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए खुद को मुबारकबाद देने के ‘प्रस्ताव’ को पारित करने के साथ समाप्त हो गया.  इसके पहले यूपी की योगी सरकार ने 5 फरवरी को वहां के विधानसभा में मंदिर निर्माण के लिए खुद को और मोदी को मुबारकबाद देते हुए इसी तरह के ‘प्रस्ताव’ पारित किया था. निश्चित तौर पर योगी आदित्यनाथ सिर्फ अयोध्या का श्रेय लेने से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि न्यायपालिका के समर्थन से उनकी सरकार अब काशी और मथुरा को नया रणभूमि बनाने पर जोर दे रही है.

चंडीगढ़ के महापौर चुनाव में लोकतंत्र की हत्या

नरेंद्र मोदी ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ नारे के साथ 10 साल पहले सत्ता में आए थे. अपने वजूद के इन दस सालों में मोदी सरकार ने हर तरीके अपनाकर सारी शक्तियों का केंद्रीयकरण अपने पास कर लिया है. मोदी निजाम अब ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे से आगे ‘विपक्ष मुक्त लोकतंत्र’ के अपने एजेंडे को आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रहा है. गैर-भाजपा सरकारों को गिरा दिया जा रहा है, और इच्छानुसार पार्टियों और गठबंधनों को तोड़कर, दलबदल करा भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों को उनकी जगह बिठा दिया गया है. कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गोवा, और अब बिहार में हमने यही देखा है. हमने भाजपा को चुनाव हारने के बाद भी बार-बार सत्ता हथियाते देखा है.

मतदाता दिवस 2024 : सार्विक वयस्क मताधिकार के ढांचे और भावना की रक्षा करें

25 जनवरी 2024 को भारत का निर्वाचन आयोग अपनी स्थापना की 74वीं सालगिरह मनाएगा. निर्वाचन आयोग का स्थापना दिवस ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में चुनाव करवाने की जिम्मेदारी निभानेवाली स्थायी संवैधानिक संस्था के बतौर ईसीआई का सांस्थानिक महत्व सचमुच बहुत ज्यादा है.

अयोध्या : जब राम के नाम पर मंदिर आरएसएस के एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए मोदी स्मारक बन गया

भारत को एक गहरा धक्का लगा था जब तीन दशक पहले संघ ब्रिगेड ने दिन-दहाड़े ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद को ढहा दिया था. लेकिन उस कार्रवाई की हिंसा और नतीजतन सैकड़ों लोगों की जान जाने के बावजूद अनेक भारतीय उसे महज मस्जिद-मंदिर विवाद के बतौर ही देखते रहे थे. हाल-हाल तक सर्वोच्च न्यायालय विध्वंस की उस कार्रवाई को अपराध, कानून के राज का जबर्दस्त उल्लंघन, मान रहा था; किंतु आश्चर्यजनक ढंग से उसने उन्हीं अपराध-कर्ताओं को उस भूमि पर स्वामित्व दे दिया और उस शहर में मस्जिद के प्रतिस्थापन के लिए एक दूसरी जगह आवंटित कर दी.

महिलाओं के खिलाफ भाजपा का बढ़ता युद्ध

साल 2023 के अंतिम दिन देश भर में खबर फैली कि दो माह पूर्व बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आइआइटी की एक 20-वर्षीय बी.टेक. छात्रा का बंदूक की नोंक पर गैंगरैप करने वाले तीन आरोपी नौजवानों को अंततः गिरफ्तार कर लिया गया. ये तीनों नौजवान - कुणाल पांडे, सक्षम पटेल और आनंद चौहान - भाजपा की बनारस आईटी सेल से जुड़े हुए हैं. इनमें से पहले वाले दो नौजवान तो उस आईटी सेल के संयोजक और सह-संयोजक ही थे.

22 जनवरी बनाम 26 जनवरी : भारतीय गणतंत्र के भविष्य की जंग

गणतांत्रिक भारत केवल और केवल एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के रूप में जिन्दा रह सकता है. हमारे पूर्वज 26 जनवरी 1950 को एक स्वतंत्र गणराज्य की स्थापना के अग्रदूत बने थे, आइए हम भारत के लोग उसी सपने को पूरी शक्ति, साहस और दृढ़निश्चय के साथ आगे बढ़ाने का आज संकल्प लें.

बहस को भटकाने और जनता को बांटने के संघ ब्रिगेड के हताशोन्मत्त प्रयासों को चकनाचूर करें

जब से व्यापक आधर वाला एकताबद्ध विपक्ष सामने आया है, मोदी सरकार और संघ ब्रिगेड की चूलें हिल गई हैं. यह सरकार अच्छी तरह जानती है कि 2019 में पुलवामा संहार-कांड से उत्पन्न जुनूनी राष्ट्रवादी लहर की पृष्ठभूमि में भी राजग (एनडीए) का साझा वोट प्रतिशत 45% से ज्यादा नहीं जा सका था, जबकि भाजपा का अपना वोट प्रतिशत 40 से भी कम था.

जी-20 नई दिल्ली शिखर सम्मेलन की हकीकत और गलत प्राथमिकताएं

भारत के विशाल और विविध शहरी इलाकों में जी-20 के कार्यक्रमों के एक साल लंबे सिलसिले का नजारा 8 से 10 सितंबर तक नई दिल्ली में 18वीं शिखर बैठक के साथ खत्म हो गया. चूंकि यह शिखर सम्मेलन 1983 में हुए गुटनिरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन और 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के बाद भारत की मेजबानी में पहला ऐसा खास अंतरराष्ट्रीय आयोजन था, इसलिए इसने न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जनता का ध्यान आकर्षित किया.

भारत के पांव चांद पर, लेकिन भारतीय क्लासरूम डरावने कक्ष बन गए हैं

चंद्रयान-3 की सफल साॅफ्टलैंडिंग बेशक ‘इसरो’ के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. यह पहली बार है कि कोई चंद्र अभियान चंद्रमा के दक्षिणी धरुव पर उतरा हो, और इससे चंद्रमा की हकीकत की खोजबीन तथा उसके अध्ययन की वृहत्तर संभावनाओं के द्वार खुलने की उम्मीद है. भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य का ऐसा बड़ा मील का पत्थर विज्ञान व तकनोलाॅजी, और खासकर अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की समग्र अग्रगति को प्रेरित करने की क्षमता रखता है.

भारत के संविधान को तहस-नहस करने की साजिश को नाकाम करें!

हिंदू वर्चस्ववादी खेमे के जरिये लंबे समय से भारत के संविधान को पलटने का मुद्दा अब खुलकर सामने आ गया है. नए संविधान की बड़ी ढिठाई से वकालत अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय द्वारा आजादी के 76वीं सालगिरह के मौके पर एक अखबार में लेख के बतौर सामने आयी है. खासकर, जब इसे लिखने वाला प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद का अध्यक्ष हो और पहले से ही सरकार अपने बयानों और कदमो से इसे जाहिर कर रही हो, तब इसे किसी व्यक्ति की अलग-थलग राय मानना मूर्खता है.