वर्ष - 33
अंक - 4
24-01-2024

18 जनवरी 2024 को अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) की ओर से ‘अक्षत भभूत नहीं, रोज़ी, रोटी और आवास चाहिए - आजादी, लोकतंत्र और संविधान का सम्मान चाहिए’  नारे के साथ गांव-गरीबों के बीच चल रहे अभियान का समापन प्रखंड और अंचल मुख्यालयों पर प्रदर्शन के जरिए हुआ।

इसके तहत राज्य के 200 से ज्यादा प्रखंड और अंचल मुख्यालयों पर प्रदर्शन हुआ और सीओ-बीडीओ के जरिए राष्ट्रपति तथा मुख्यमंत्री के नाम स्मारपत्र भेजा गया। मोदी सरकार ने मनरेगा मजदूरी के साथ बड़ा छल किया है। वह न्यूनतम मजदूरी कानून का उल्लंघन कर रही है. उन्हें न तो राज्य की न्यूनतम मजदूरी दी जा रही है और न केंद्र की और 228 रुपए की हास्यास्पद दैनिक मजदूरी पर मनरेगा मजदूरों से काम लिया जा रहा है। 2022 तक सबको पक्का मकान देने का वादा करने वाली मोदी सरकार ने बिहार के गरीबों के साथ नाइंसाफी की है। 2017 से राज्य को प्रधानमंत्री आवास योजना का कोई आबंटन नहीं दिया गया है। बढ़ती मंहगाई में कोई राहत पैकेज नहीं लेकिन अक्षत भभूत बांट कर लोगों को भरमाया जा रहा है।

प्रदर्शन के माध्यम से बिहार के मुख्यमंत्री से मांग की गई कि सरकार की ओर से तमाम अनधिकृत बसावटों का सर्वे कराया जाये और नया वास-आवास कानून बनाया जाये. यह आंदोलनात्मक अभियान दलित-गरीबों के 5 गारंटी आंदोलन के तहत चल रहा है। आंदोलन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ोत्तरी की मांग भी उठाई गई। बकाया बिजली बिल माफी को भी मुद्दा बनाया गया है। भयानक शीत लहर का मुकाबला करते हुए दसियों हजार गरीबों ने पटना, भोजपुर, सिवान, समस्तीपुर, दरभंगा, नालंदा आदि समेत विभिन्न जिलों के 200 से ज्यादा प्रखंड व अंचल मुख्यालयों पर हुए इन प्रदर्शनों में भाग लिया।