ऐतिहासिक खाद्य आंदोलन दिवस पर शहीदों की याद में

ऐतिहासिक खाद्य आंदोलन की वार्षिकी 31 अगस्त 2019 को पश्चिम बंगाल के विभिन्न स्थानों पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. सन् 1959 में खाद्य की मांग पर कोलकाता में विशाल विक्षोभ आंदोलन संगठित हुआ था जिसके दौरान पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री विधान चन्द्र राय की सरकार ने गोली चलाने का आदेश दिया था, जिसके परिणामस्वरूप 80 लोगों से भी ज्यादा लोग गोलियों से शहीद हुए थे. जनता उस भयावह हत्याकांड की याद भी न भूली थी कि आर्थिक संकट से बदहाल लोग 1966 में एक बार फिर खाद्य की मांग पर आंदोलन में शामिल हुए थे, उनको भी इसके बजाय पुलिस की गोलियों का ही शिकार बनना पड़ा था.

इस दिन कोलकाता में 17 वामपंथी और लोकतांत्रिक संगठनों ने मिलकर सुबोध मल्लिक स्क्वायर पर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर एक सभा की. सभी दलों के नेताओं ने पुष्पांजलि देकर अपनी बात रखी. भाकपा(माले) केे राज्य सचिव पार्थ घोष, पोलिटब्यूरो सदस्य कार्तिक पाल एवं अन्य नेतागण, सीपीआई(एम) के बिमान बसु, सूर्यकान्त मिश्र, सीपीआई के स्वपन बनर्जी, आरएसपी के मनोज भट्टाचार्य आदि कार्यक्रम में शामिल थे. सभी वक्ताओं ने खाद्य, स्वाधीनता और लोकतंत्र के मुद्दों पर जन-संघर्ष को आगे बढ़ाने की बातें रखीं. कोलकाता में भाकपा(माले) के राज्य कार्यालय परिसर में भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई.

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खाद्य आंदोलन के दौरान कृष्णनगर में 4 मार्च को पुलिस की गोली से 14 वर्षीय युवा आनंद हाइत एवं वाम आंदोलन के कार्यकर्ता प्रणव विश्वास, बशीरहाट में केरोसिन तेल की मांग कर रहे नूरुल इस्लाम ने शहीदों की मौत धारण की थी.यहां पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में अभाकिम के राज्य सचिव जयतु देशमुख, कृष्णपद प्रामानिक, इनसान विश्वास, नदीया जिले के पार्टी सचिव सुविमल सेनगुप्त, कृष्णनगर शहर के स्वपन दास, नीहार बनर्जी, कमल कांति दत्त व मुकुल बनर्जी आदि शामिल थे.

1960 के दशक की याद दिलाते हुए वक्ताओं ने कहा कि आठ आना सेर चावल का दाम रातोंरात बढ़कर 5 रु. सेर हो गया था और गरीबों के घर लालटेन जलाने को केरोसिन तो मिलना ही बंद हो गया था. कालाबाजारी भयानक बढ़ गई थी. आज जब केन्द्र और राज्य सरकारें खाद्य सुरक्षा के लिये राशन कार्ड तो बांट रही हैं पर बहुतेरे गरीबों को आज तक राशन कार्ड नहीं मिला और जिन्हें मिला भी है उनमें बहुतों को राशन नहीं मिलता. भ्रष्टाचार चरम पर है. विडम्बना यह है कि सरकारी कर्मचारियों, बड़े व्यापारियों, गांव में धनी किसानों, जोतदार – ये सब तो राशन कार्ड पर सस्ता चावल, गेहूं पा रहे हैं पर गरीब परिवारों को महंगे दामों पर बाजार से खरीदना पड़ रहा है. डीलर और खाद्य विभाग के अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचारी गठजोड़ कायम है. और भ्रष्टाचार का बहाना बनाकर सरकार राशन प्रणाली को खत्म करके नकद सब्सिडी देने की योजना बना रही है, जिससे गरीबों को और अधिक बदहाली झेलनी होगी. भविष्य में खाद्य संकट की आशंका देखते हुए हमें एकजुट होकर कमर कसने की जरूरत है.

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हुगली जिले के पांडुआ प्रखंड के सांचिताड़ा ब्रांच में वरिष्ठ खेतमजदूर गौर बाउलदास ने लाल झंडा फहराया. यहां निरंजन बाग, प्रभात बाउलदास, दिवस मालिक, शेफाली बाउलदास, सुकुमार सांतरा आदि दर्जनों साथी उपस्थित थे. कोन्नगर में चलचित्रम मोड़ पर वामपंथी दलों ने संयुक्त कार्यक्रम किया. भाकपा(माले) की ओर से कोन्नगर लोकल कमेटी सचिव प्रदीप सरकार एवं आइसा के साथियों ने पुष्पांजलि दी और का. सौरभ ने सभा को संबोधित किया. आइसा की हिंद मोटर-कोन्नगर इकाई ने खाद्य आंदोलन के शहीद छात्रों को पुष्पांजलि दी.

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दक्षिण 24 परगना में भाकपा(माले) के जिला कार्यालय पर आयोजित शहीद स्मरण सभा में ऐपवा की वरिष्ठ जिला नेत्री देवयानी गोस्वामी ने लाल झंडा फहराया. जिला सचिव किशोर सरकार ने भाषण दिया. निर्माण यूनियन की जिला नेत्राी अंजना माल, बजबज लोकल कमेटी के सदस्य शेख मुस्तफा, आइसा नेता द्वीप मालिक, ‘चलार पथे’ सांस्कृतिक संगठन के अभिजित मंडल आदि भी कार्यक्रम में मौजूद थे. बाखराहाट में सीपीआई(एम) के साथ मिलकर हमारी पार्टी द्वारा लिये गये कार्यक्रम में जिला कमेटी सदस्य शुभदीप पाल, दिलीप पाल एवं जन संगठनों के सदस्य शामिल थे.

वर्ष28
अंक39