वर्ष - 29
अंक - 18
25-04-2020

बंबई, थाणे, ऊल्हासनगर ,कल्याण, नई बंबई, अमरावती, नागपुर के लोकडाऊन मे फंसे कई मजदूरों से बातचीत हुई. इनमें से कई गारमेन्ट वर्कर हैं जिन्हें मालिक मदद नहीं कर रहा. मालिक गांव चला गया है. कोई जरी वर्कर तो कुछ नाका मजदूर. कई सबकोन्ट्रेक्ट पर काम करने वाले कन्सट्रक्शन मजदूर. सब अपने को जिन्दा रखने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ समय पहले कुछ जगहों पर कम्युनिटी किचन मे रेडीमेड खाना मिलता था. जो खाना मिलता था खाना लेने जाने पर पुलिस बुरी तरह पीट रही थी. अब वे सब भी बंद हो चुके हैं. ‘राशन नहीं है’ – यह कहते हुए कलक्टर ने हाथ खड़े कर दिये हैं. सार्वजनिक शोचालयों में लंबी भीड़ लगी रहती है. जहां खाना मिल रहा था, वहां भी कोरोना के कारण खाना बंद हुआ है. सारी जिम्मेदारी महापालिका पर डाल दी गई है जिसका इस तरह के कामों के लिए अपना कोई नेटवर्क ही नहीं है.

गारमेंट वर्कर्स कुछ पैसे यहां-वहां से जुगाड़ कर खाना खा रहे हैं. इनके मालिक जिम्मेदारी से भागकर गांव चले गये है. फोन भी बंद रखा है. कई गारमेन्ट वर्कर्स परिवार के साथ रहते हैं. उनकी हालात बहुत ही खराब है. बहुत ही कम लोग हैं जिन्हें ठेकेदार राशन दे रहा है और वह भी कर्ज के रूप मेंइनमें कई लोग कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में दिहाडी मजदूर हैं. इन मजदूरों के जीने का कोई आधार नहीं है, वे भुखमरी की स्थिति झेल रहे हैं. वे इस उम्मीद के साथ कि सरकार कुछ पैसे उनके खाता में डालेगी, सरकार द्वारा बनाये व जारी किए गए साॅफ्टवेयर में सूचना भरते हैं. किंतु यह प्रक्रिया कभी पूरी नहीं होती, वह आधे में ही जाकर अटक जाजी है या तमाम सूचनायें गायब हो जाती हैं. यह उनके तनाव और बढ़ा देता है. सायन चुना भट्ठी में लगभग 1 हजार दिहाडी मजदूर हैं. वे लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन उनका कोई मददगार नहीं है.

नालासोपारा में करीब 500 दिहाड़ी मजदूर हैं. उन्होंने हमें बताया कि हमसे जो मदद मिली है बहुत ज्यादा नहीं थी. फिर भी हम सबने आपस में मिल कर बांट लिया है. कई जगह मजदूर भुखमरी के कगार पर है। सबको मदद की जरूरत है. उल्हासनगर के मजदूरों ने बताया कि आरके सिन्हा (भाजपा के राज्यसभा सदस्य) की कोई संस्था यहां चल रही है. उनके द्वारा बिहार सरकार से 1000 लोगों के लिए राशन किट मंगवाई गई थी. वे सिर्फ बिहारी मजदूरों को राशन किट बांट रहे थे, किंतु 5000 से ज्यादा मजदूर जमा हो गए और वहां अफरा-तफरी मच गई. सबको पुलिस ने बुरी तरह पीटा. इसतरह से जिनको राशन किट मिलना था, वे भी वंचित हो गए. हमारे साथियों ने अमरावती व नागपुर में दिहाड़ी मजदूरों के परिवारों को राशन की मदद दी और उन्हें भुखमरी से बचाया.

– श्याम गोहिल