वर्ष - 29
अंक - 30
24-07-2020

भाकपा(माले) ने 6 जुलाई को दलितों पर हर दिन जारी और लगातार बढ़ते अत्याचार के खिलाफ राज्यव्यापी प्रतिवाद संगठित किया, क्योकि राज्य और न्यायपालिका उनकी हिफाजत करने में नाकाम रह गए.

खासकर, कोरोना महामारी और लाॅकडाउन की अवधि में तमिलनाडु में ये अत्याचार बढ़ते ही जा रहे हैं. इस अवधि में दलितों के खिलाफ 70 से ज्यादा अपराध की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.

ऐसे जन संहारों के अपराधियों के पक्ष में तमिलनाडु सरकार का फैसला जनवरी 2020 में अन्ना द्रमुक के संस्थापक एमजीआर की सालगिरह के अवसर पर मेलावलाऊ जनसंहार के अभियुक्तों को रिहा करने के निर्णय में देखा जा सकता है. 1996 में मुरुगेसन को दिन-दहाड़े चलती बस में मार डाला गया था, क्योंकि वे मेलावलाऊ पंचायत (मदुरै जिला) में प्रभुत्वशाली जातियों की इच्छा के विरुद्ध पंचायत प्रधन का चुनाव जीत गए थे. इस जघन्य हत्या के अपराधियों को उम्र कैद की सजा मिली थी. लेकिन एमजीआर के जन्मदिन समारोह के मौके पर उनके अच्छे आचरण के नाम पर जेल से रिहा कर दिया गया. सरकार के इस कदम से प्रभुत्वशाली जातियों के दबंगों का ही मन बढ़ा है.

प्रभुत्वशाली जाति की लड़की कौशल्या एक दलित नौजवान उदुमलाइ शंकर के साथ प्रेम करने लगी और उन्होंने शादी कर ली. इस अंतरजातीय शादी को बर्दायत नहीं करने वाले कौशल्या के अभिभावकों ने शंकर की हत्या के लिए गुंडों को भाड़े पर लगाया. उन गुंडों ने दिन-दहाड़े पीट-पीटकर शंकर की हत्या कर डाली और कौशल्या को भी मारने का प्रयास किया. इस हमले और हत्या के सीसीटीवी फुटेज ने देश को हिला कर रख दिया. 22 जून 2020 को मद्रास हाई कोर्ट ने एक अपील पर कौशल्या के पिता चिन्नास्वामी को बरी कर दिया जो इस हत्या का मुख्य साजिशकर्ता था. यह न्याय का सरासर उल्लंघन था. प्रतिवादकारियों ने मांग की कि तमिलनाडु की राज्य सरकार फौरन सर्वोच्च न्यायालय जाए और वहां न्याय की गारंटी कराने की अपील करे.

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दलितों के लिए पूजा के अधिकार से इंकार, साझे कब्रगाह से इंकार, पाइप से अपने वाले पानी समेत ग्रामीण सार्वजनिक संपत्ति पर अधिकार या उसकी साझेदारी से इंकार, तथा दलित महिलाओं व बच्चों पर हिंसा और हाथ से सफाई के चलते सेप्टिक टैंकों में मौंतें लगातार जारी हैं. तमिलनाडु में लाॅकडाउन के 50 दिनों में दलितों के खिलाफ 40-50 अत्याचार की वारदात हुई हैं और ये बढ़ती ही जा रही हैं.

इस पृष्ठभूमि में भाकपा(माले) ने 5 जुलाई को राज्यव्यापी प्रतिवाद का आह्वान किया था. ‘न्याय के लिए जन आन्दोलन’, तमिलनाडु  के जरिये ऑनलाइन याचिकाएं भेजी गई हैं और प्रतिवाद दर्ज कराते हुए तमिलनाडु के मुख्य मंत्री से दलितों पर हमले को रोकने तथा ऐसे अपराधियों को सजा दिलवाने की मांग की है. राज्य की वामपंथी व लोकतांत्रिक शक्तियां भी इन याचिकाओं पर दस्तखत करके इस प्रतिवाद में शामिल हुई हैं, जबकि देश भर के लोगों ने ट्विटर स्टाॅर्म के जरिये इसमें शिरकत की. चेन्नै-चेंगलपट्टु, कांचीपुरम, पुदुकोट्टै, विल्लुपुरम, कन्याकुमारी, तिरुनेलवेल्लि, सलेम समेत राज्य के कई स्थानों पर ये प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए. इस प्रतिवाद के दौरान दलितों पर अत्याचार के अपराधियों को कड़ी सजा, अत्याचार निरोधक कानून के कठोर अनुपालन, लाॅकडाउन की इस अवधि में इन अपराधें के लिए स्पीडी मुकदमा चलाकर त्वरित दंड आदि की मांग की गई.

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