धरना/प्रदर्शन/प्रतिरोध

जेएनयू में छात्रों का प्रतिरोध

जेएनयू के छात्र हाॅस्टल फीस में 70 प्रतिशत की वृद्धि के साथ नए हाॅस्टल मैनुअल और पितृसत्तात्मक ड्रेस कोड व कर्फ्यू के खिलाफ 1 नवंबर 2019 से ही हजारों की संख्या में प्रतिवाद कर रहे हैं. इस मैनुअल को वापस लेने और प्रतिवादकारी छात्रों के साथ वार्ता करने के बजाय जेएनयू के कुलपति ने कैंपस में सीआरपी के जवानों को बुला लिया. जब कैंपस के बाहर एआइसीटीई हाॅल में जेएनयू का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें मानव संसाधन विकास मंत्री सम्मानित अतिथि थे, तो जेएनयू के छात्रों ने हजारों की संख्या में वहां मार्च किया और मंत्री महोदय से मांग की कि वे छात्रों से बात करें.

कोयला श्रमिक हड़ताल : एकजुटता में दिल्ली में प्रतिवाद

लगभग 5.5 लाख हड़ताली कोयला मजदूरों की हड़ताल (पिछले अंक में इसकी रिपोर्ट देखें) के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए दिल्ली के जंतर मंतर पर मजदूरों ने एक सभा संगठित की. मोदी सरकार की विनाशकारी नीतियों की तरफ आम जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिये ऐक्टू ने यह प्रतिवाद प्रदर्शन आयोजित किया था.

हलद्वानी में संयुक्त धरना

स्वतंत्रत दिवस की पूर्व संध्या पर 14 अगस्त को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में ऐक्टू, अ. भा. किसान महासभा, अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा), डा. अंबेडकर मिशन एन्ड फाउंडेशन, द बुद्धिस्ट सोसायटी आॅफ इंडिया, भीम फोर्स, भाकपा(माले), भाकपा व विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं व जनसंगठनों द्वारा मोदी सरकार के अलोकतांत्रिक व असंवैधानिक रवैये के खिलाफ ‘संविधान बचाओ-लोकतंत्र बचाओ’ धरना दिया गया.

कटिहार में आइसा का प्रदर्शन

दिनांक 19 अगस्त 2019 को छात्रा संगठन आइसा की कटिहार जिला इकाई के द्वारा पूर्णिया विश्वविद्यालय की मनमानी के खिलाफ आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन विश्वविद्यालय के अंगीभूत इकाई आरडीएस महाविद्यालय, सालमारी, कटिहार के प्रांगण में किया गया.

बेगूसराय में संयुक्त धरना

जम्मू-कश्मीर में धारा 370 की अलोकतांत्रिक तरीके से समाप्ति के खिलाफ और माले के युवा नेता जीशान अली की बिना शर्त रिहाई के सवाल पर भाकपा(माले) व खेग्रामस के बैनर से बेगूसराय समाहरणालय पर एकदिवसीय धरना दिया गया जिसकी अध्यक्षता मुक्तिनारायण सिंह ने की.

प्रखंड मुख्यालयों पर धरना

अरवल को अकाल क्षेत्र घोषित कर राहत देने, पेयजल संकट दूर करने, राशनकार्ड की कटौती एवं मशीन के जरिए कार्डधारियों को राशन से वंचित किए जाने के खिलाफ 22 अगस्त 2019 को भाकपा(माले) एवं खेग्रामस द्वारा अरवल जिला के अरवल, कलेर, करपी एवं कुर्था प्रखंड मुख्यालयों पर विशाल धरना दिया गया. धरना के माध्यम से जनता के ज्वलंत सवालों को उठाया गया और प्रखंड विकास पदाधिकारी को 7 सूत्री मांग-पत्र सौंपा गया.

सामंती-प्रशासनिक धाक को तोड़ते हुए बड़गांव में माले की संकल्प सभा

20 अगस्त 2019 को अगिआंव प्रखंड के बड़गांव में शहीद का. सतीश यादव के चौथे शहादत दिवस पर सामन्तों व प्रशासन  की हर चाल को विफल करते हुए इलाके के हजारों मजदूर-किसानों, छात्र-नौजवानों और महिलाओं ने अपने प्रिय साथी को याद किया और उनके सपनों को मंजिल तक पहुंचाने को संकल्प लिया. सामंती ताकतों के दबाव में जिला प्रशासन ने पूर्व घोषित संकल्प दिवस को नहीं होने देने के लिए वहां धारा-144 लागू कर दिया था. इस चुनौती को स्वीकार करते हुए जनता ने धारा-144 को तोड़ा व गांव-गांव से हाथों में लाल झंडा लिए बड़गांव में जनसैलाब उमड़ पड़ा.

‘जम्मू-कश्मीर के पक्ष में उठ खड़े हों’ के नारे पर समूचे भारत में प्रतिवाद

5 अगस्त 2019 को अमित शाह द्वारा जम्मू-कश्मीर के सम्बंध में धारा 370 और 35-ए के रद्द किये जाने और उसे दो केन्द्रशासित क्षेत्रों में विभाजित किये जाने के तानाशाही भरे बेरहम ऐलान के चंद घंटों बाद ही, वामपंथी पार्टियों द्वारा आहूत प्रतिवाद के आह्नान पर दिल्ली के संसद मार्ग पर सैकड़ों की तादाद में प्रतिवादकारी एकत्रित हो गये.

छपरा में माॅब लिंचिंग नहीं, हत्याकांड

विगत 19 जुलाई को बिहार में माॅब लिंचिंग की दो घटनाएं घटित हुई जिसमें सारण में तीन और वैशाली में एक व्यक्ति इसका शिकार हुआ. भाकपा(माले) विधायक सत्यदेव राम व सारण जिला सचिव सभा राय ने सारण के बनियापुर में माॅब लिंचिंग की घटना की जांच की. यहां राजू नट, विदेशी नट व ड्राइवर नौशाद की पशु चोरी के आरोप में पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी. माले नेताओं ने मृतकों के गांव पैगंबरपुर का भी दौरा किया और मृतकों के परिजनों से बातचीत की. जो तथ्य उभरकर सामने आए हैं, वे दूसरी ही कहानी की ओर इशारा कर रहे हैं.

सोनभद्र जनसंहार : झारखंड में प्रतिवाद

रांची के अल्बर्ट एक्का चैक पर सोनभद्र में आदिवासियों के जनसंहार के खिलाफ आल इंडिया पीपुल्स फोरम के आह्वान पर 22 जुलाई 2019 को विभिन्न सामाजिक जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने नागरिक प्रतिवाद किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभी वक्ताओं ने सोनभद्र आदिवासी जनसंहार कांड को देश के संविधान और लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि वर्तमान सत्ताधारी दल के शासन में आदिवासियों और उनके जल-जंगल-जमीन के अधिकारों पर हमले बढ़े हैं. वर्तमान सरकार व उसके नेता जहां एक ओर आदिवासी प्रेम का ढोंग रचते हैं वहीं दूसरी ओर खुद इनके अधिकारों पर हमले करते हैं.