कंपनी राज के खिलाफ एकजुट संघर्ष तेज करने का आह्वान

वर्ष - 30
अंक - 41
09-10-2021

 

भाकपा(माले) का 6ठा झारखंड राज्य सम्मेलन

‘कंपनीराज के खिलाफ एकजुट संघर्ष तेज करो, झारखण्ड नवनिर्माण की वामपंथी दिशा सुनिश्चित करो!’ के केन्द्रीय आह्वान के तहत झारखंड प्रदेश भाकपा(माले) ने अपना 6ठा राज्य सम्मलेन पुरे जोशो-खरोश के साथ सम्पन्न किया. यह सम्मेलन 2 व 3 अक्टूबर 2021 को रामगढ़ में आयोजित हुआ. स्वतंत्रता संग्राम के समय 1940 में रामगढ़ में ही कांग्रेस का वह ऐतिहासिक अधिवेशन हुआ था. बताया जाता है कि उसी अधिवेशन में तत्कालीन ईस्ट इंडिया कंपनी राज के खिलाफ ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन’ की नींव पड़ी थी. इस दौर में आयोजित भाकपा(माले) का राज्य सम्मेलन भी कंपनी राज के खिलाफ संघर्ष पर केन्द्रित रहा.

सम्मलेन स्थल का नामकरण कामरेड जयंत गांगुली नगर के रूप में किया गया था जिन्होंने 70-80 के दशक में इस क्षेत्र के कोलियरी और आसपास के गांवों में जारी महाजन-सूदखोर व सामन्ती-माफिया शोषण अत्याचार से त्रास्त आदिवासियों, विभिन्न पिछड़े समुदायों व निजी कोयला खदानों के मजदूरों को वामपंथी राजनीति से लैस कर क्रन्तिकारी आन्दोलन और भाकपा(माले) की बुनियाद डाली थी. कामरेड बीबी पांडे व डीपी बक्शी सभागार के कामरेड सुखदेव प्रसाद व बशीर अहमद मंच पर आयोजित हुए इस सम्मलेन में राज्य के 16 जिलों से आये 311 चुने हुए प्रतिनिधियों, 40 पर्यवेक्षकों एवं 10 अतिथियों ने शिरकत की.

सम्मलेन के उद्घाटन सत्र से पूर्व रामगढ़-हजारीबाग क्षेत्र में पार्टी कामकाज के शुरूआती दिनों से सक्रिय रहे वरिष्ठ साथी एवं कथाकार कालेश्वर गोप द्वारा झंडोत्तोलन किया गया. जोशपूर्ण नारों के बीच शहीद वेदी पर माल्यार्पण कर दरांग व कोरोना काल में मारे गए लोगों समेत तमाम शहीदों को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम हुआ.

उद्घाटन सत्र की शुरुआत झारखण्ड जन संस्कृति मंच की केन्द्रीय टीम द्वारा प्रस्तुत स्वागत और शहीद गीत से हुई. जानेमाने आदिवासी बुद्धिजीवी प्रेमचंद मुर्मू ने स्वागत समिति अध्यक्ष के बतौर सम्मलेन में आये लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि जल, जंगल, जमीन और संवैधानिक अधिकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ कारगर प्रतिवाद को वामपंथी आन्दोलन ही धार देने का काम करता है. झारखंड को कंपनियों का खुला चारागाह बनाए जाने के खिलाफ पांचवी अनुसूची को सख्ती से लागू कराने में भाकपा(माले) की भूमिका जरूरी है.

सम्मलेन का उद्घाटन करते हुए पार्टी महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने अपने संबोधन में राज्य सम्मलेन के मुख्य नारे के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आज केंद्र में काबिज सत्ता देश की जनता, संविधान और संसद के आमने-सामने खड़ी है. जिसके खिलाफ एक निर्णायक और एकजुट संघर्ष खड़ा करना वक्त की जरूरत है. यह सड़कों के आन्दोलन और इस संघर्ष की जमीनी ताकत वामपंथ के बिना पूरी नहीं हो सकती. ये सभी जानते हैं कि भाजपा और आरएसएस की राजनीति और विचारधारा का सबसे कारगर मुकाबला सिर्फ वामपंथ ही कर सकता है. असम के दरांग में सरकार प्रायोजित जनसंहार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह आनेवाले चुनावों की फिजां बनाने की शुरुआत है. वहां आधार कार्ड और एनआरसी पहचान पत्रा होने के बावजूद लोगों को घुसपैठिया कह कर फासीवादी बर्बरता का नंगा नाच किया गया. मोदी सरकार की देश को गिरवी रखने की नीतियों और इसके खिलाफ जारी किसान आन्दोलन और उसे वामपंथी दलों व अन्य तबकों के मिल रहे सक्रिय समर्थन की चर्चा करते हुए उन्होंने विभिन्न तबकों के आन्दोलनों को ही आज का विपक्ष बताया. झारखंड की वामपंथी संघर्ष परम्पराका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस समय नक्सलबाड़ी के उभार से प्रभावित होकर देश के किसान मजदूर और छात्र-नौजवान आन्दोलनरत थे, ठीक उसी दौर में कोयले के निजीकरण और माफिया के खिलाफ आदिवासियों, स्थानीय ग्रामीणों और कोयला मजदूरों ने कामरेड एके राय के नेतृत्व में अपनी ताकत दिखलाई थी. आज फिर से संघर्ष के उसी जज्बे की जरूरत है जिसके साथ कामरेड चारु मजुमदार, एके राय और महेंद्र सिंह जैसों ने अपनी पूरी जिंदगी लगा दी. झारखंड की आंदोलनकारी पहचान फादर स्टेन स्वामी की हिरासत में सत्ता नियोजित हत्या भी इसी बात का प्रमाण है कि आज मोदी शासन को ना किसी की बात सुननी है और ना ही बात करनी है बल्कि जो भी विरोध करेगा उसे मार दिया जाएगा अथवा एनआईए के जरिये जेलों में ही सड़ा दिया जाएगा. यह सम्मेलन निश्चय ही पूरे झारखंड में वामपंथी धारा को और अधिक एकतााबद्ध और शक्तिशाली बनाकर जनता के मजबूत विपक्ष का निर्माण करेगा. झारखण्ड की हेमंत सरकार के सन्दर्भ में कहा कि जिन अपेक्षाओं से जनता ने उन्हें शासन में बिठाया, उनकी ये गंभीर जवाबदेही बनती है कि समय रहते उसे पूरा करते हुए प्रदेश को एकआदर्श गैरभाजपा राज के रूप में सामने लायें.

सम्मलेन के अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए एआईपीएफ से जुड़ी आन्दोलनकारी दयामनी बारला ने कहा कि मोदी शासन की जनविरोधी नीतियों, कुशासन से त्रास्त देश और झारखंड की त्रस्त जनता को आज लाल झंडे से बहुत उम्मीदें हैं. झारखण्ड प्रदेश के आदिवासी और किसान मजदूरों के एकजुट आन्दोलन से अडानी-अंबानी राज को हटाया जायेगा. मासस केन्द्रीय नेता कामरेड हलधर महतो ने अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि ये निर्विवाद सत्य है कि सिर्फ लाल झंडे की मजबूत एकता से ही मोदी शासन के पूंजीपरस्त राज का कारगर मुकाबला संभव है. सीपीएम के राज्य नेता ने कहा कि आज के सांप्रदायिक और  कार्पाेरेट परस्त शासन के खिलाफ एकजुट संघर्ष समय की मांग है. जिसकी टिकाऊ और मजबूती के लिए व्यापक वामपंथी आन्दोलन का तेज होना जरूरी है. सीपीआई के राज्य नेता बीके पांडेय ने कहा कि देश व झारखंड की भाईचारगी को सिर्फ लाल झंडा ही बचा सकता है. उद्घाटन सत्र का संचालन पोलित ब्यूरो सदस्य व विधायक कामरेड विनोद सिंह ने किया. धन्यवाद ज्ञापन कामरेड जनार्दन प्रसाद ने किया.
     
शाम 5 बजे से सम्मेलन का प्रतिनिधि सत्र प्रारंभ हुआ. सत्रा के संचालन के लिए अध्यक्ष मंडल के सदस्य – मनोज भक्त, गीता मंडल, अनीता देवी, लाखिमुनी मुंडा, उपेन्द्र सिंह व बैजनाथ मिस्त्री तथा तकनीकी टीम के सदस्य के रूप में दिव्या भगत, जगमोहन महतो, विनोद लहरी व किशोरी अग्रवाल का चुनाव किया गया. राज्य सचिव ने विदाई राज्य कमिटी की ओर से पिछले ‘कामकाज की रिपोर्ट’ प्रस्तुत किया. जिस पर प्रतिनिधियों ने बारी-बारी से आपने विचार दिए. सम्मलेन के दूसरे दिन बहस सत्र में 78 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. राज्य सचिव बहस से आये कई सुझावों को शामिल करते हुए रिपोर्ट का सार संकलन पेश किया जिसके बाद प्रतिनिधियों ने उसे सर्वसम्मति से पारित किया.

 प्रतिनिधि सत्र को सम्मलेन के मुख्य अतिथि भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो के सदस्य व अखिल भारतीय किसान माहासभा के राष्य्रीय महासचिव कामरेड राजाराम सिंह ने भी संबोधित किया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मोदी शासन द्वारा खेती, किसानी और खाद्यान्नों को कार्पाेरेट व निजी कंपनियों को हवाले किये जाने के खिलाफ पिछले 10 महीनों से भी अधिक समय से किसानों की मोर्चेबंदी लगातार जारी है. पिछले भारत बंद ने भी दिखला दिया कि किसान आन्दोलन को देश की व्यापक जनता का समर्थन बढ़ता जा रहा है. यह साफ संकेत दे रहा है कि देश के किसानों ने देश की जनता के और बाकी सवालों को मुखर बना रहा है. ऐसे में झारखंड में भी पार्टी को किसान आन्दोलन की तर्ज पर जनता के ज्वलंत सवालों को लेकर जुझारू आन्दोलन तेज करना होगा. सम्मलेन के प्रतिनिधि सत्र में  सर्वसम्मति से 53 सदस्यीय नयी कमिटी का चुनाव किया गया जिसने भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो सदस्य कामरेड मनोज भक्त को झारखंड प्रदेश का नया राज्य सचिव चुना. इस सत्र को सम्मेलन के केन्द्रीय पर्यवेक्षक पोलित ब्यूरो सदस्य कामरेड अमर ने भी संबोधित किया.

झारखण्ड जन संस्कृति मंच के कलाकारों द्वारा ‘होंगे कामयाब’ की प्रस्तुति और जोशपूर्ण नारों के साथ सम्मेलन संपन्न हुआ. सम्मलेन के विभिन्न सत्रों की शुरुआत में झारखण्ड जन संस्कृति मंच की संताली टीम अंजोम के कलाकारों द्वारा अपनी पारम्परिक वेशभूषा में प्रस्तुत किये गए संताली गीत-नृत्य ने सबको काफी प्रभावित किया.

सम्मलेन स्थल झारखंड के शहीद नायकों – बिरसा मुंडा, सिद्धू, कान्हो के साथ-साथ इस क्षेत्र में 1857 के शहीद शेख भिखारी, आदिवासी नायक जीतराम बेदिया के अलावे कामरेड चारु मजुमदार. कामरेड विनोद मिश्र, कामरेड महेंद्र सिंह, मासस नेता कामरेड एके राय, कामरेड शक्ति महतो, वफादर स्टैन स्वामी की तस्वीरों से सजाया गया था. इस इलाके के सभी शहीदों की सूची भी लगाई गयी थी.

 

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