वर्ष - 31
अंक - 1
01-01-2022

1857 के स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा शहीद जीतराम बेदिया की 129वीं जयंती पर भाकपा(माले) और मासस के कार्यकर्ताओं ने उनको याद किया. सिकिदरी के महुआटोली में जयंती समारोह अयोजित कर शहीद जीतराम बेदिया को पुष्पांजर्लि अिपत की गई. बेदिया बहुल कई गांवों से जुड़े कार्यकर्ता रैली की शक्ल में सिकिदरी के महुआटोली पहुंचे जहां जंयती सामारोह के अवसर पर सभा आयोजित हुई.

सभा को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) के रांची जिला सचिव भुवनेश्वर केवट ने कहा कि झारखंड वीरों-वीरांगनाओं की धरती है. हजारों गुमनाम शहीद आज भी इतिहास के गर्त में दफन है. उन्होंने सावरकर की तरह देश की आजादी के आंदोलन से गद्दारी करते हुए अंग्रजों से क्षमा याचना नहीं की बल्कि दिलेरी से शहादत दी है. इतिहास के पन्नो में जीतराम बेदिया को सम्मान मिलना चाहिए.

मासस के नेता विनोद रजवार ने कहा कि शहादत की विरासत ने ही झारखण्ड की परंपरा और पहचान को जिंदा रखा है. ये शहीद जंगल, जमीन और जनाधिकार के संघर्ष में ये हमेशा हमारे प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे. झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड आजादी के आंदोलन से लेकर अलग राज्य तक के आंदोलनों के द्वारा हमेशा लूट व दमन के खिलाफ लड़ा है. झारखंड को आन-बान और शान इन्हीं शहीदों के बल पर मिली है. बच्चों के पाठ्य पुस्तकों में इन शहीदों को शामिल किया जाना चाहिए.

आदिवासी आधिकार संघर्ष मोर्चा के नेता जगरनाथ उरांव ने कहा कि आदिवासी स्वशासन की परंपरा ने ही हर लूट के खिलाफ विद्रोह किया है. विद्रोह की इसी कड़ी को जीतराम बेदिया ने आगे बढ़ाया. जंयती समारोह में दक्षिण छोटा नागपुर प्रमंडल के प्रभारी मोहन दत्ता, बालेश्वर बेदिया, सवाना बेदिया, मजदूर नेता भीम साहू, रूपमणि देवी, नरेश बेदिया, आशाराम प्रजापति समेत कई नेता गण शामिल थे.

Jeetram Bedia