वर्ष - 31
अंक - 48
02-12-2022

हम मेहनतकश जग वालों से जब अपना हिससा मांगेगे, एक खेत नहीं, एक देश नहीं, हम सारी दुनिया मांगेंगे – दुनिया भर में मशहूर क्रांतिकारी शायर फैज अहमद फैज की इस चर्चित गजल की पक्तियों के साथ भाकपा(माले) महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने विगत 14-15 नवंबर को पश्चिम बंगाल के खूबसूरत शहर चंदननगर (जिला हुगली) के रवींद्र भवन सभागार में आयोजित अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (आइरला) के सातवें राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने उद्घाटन वक्तव्य का समापन किया.

सम्मेलन की शुरूआत चंदननगर रेलवे स्टेशन से निकाली गई एक एक आकर्षक रैली के साथ हुई जिसमें जिसका नेतृत्व भाकपा(माले) महासचिव का दीपंकर भट्टाचार्य, आइरला के राष्ट्रीय महासचिव का. धीरेन्द्र झा व राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड श्रीराम चौधरी समेत भाकपा(माले) और आइरला के वरिष्ठ नेताओं ने किया. रैली में सम्मेलन के लिये देश भर से जुटे प्रतिनिधि व अन्य कार्यकर्ता तथा सैकड़ों की संख्या में स्थानीय खेत मजदूर व नागरिक शामिल थे.

सम्मेलन स्थल, सभागार व मंच को रासबिहारी बोस, कनाई लाल दत्त व नजरूल इस्लाम के नाम समर्पित किया गया था. 16 लाख सदस्यता के आधार पर 15 राज्यों के 800 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में हिस्सा लिया.

सम्मेलन के उद्घाटन सत्रा को एआइएडब्ल्यू के अमिय पात्र, पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति के स्वपन गांगुली और पर्यावरणविद विश्वजीत मुखर्जी, पूर्व सांसद व आइरला के सम्मानित अध्यक्ष का. रामेश्वर प्रसाद, ऑल इंडिया स्कीम वकर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय संयोजक का. शशि यादव और इनौस के राष्ट्रीय महासचिव नीरज, आइसा नेता निलाशीष बसु और अखिल भारतीय किसान महासभा नेता काशिवसागर शर्मा ने भी संबोधित किया.

सम्मेलन के प्रतिनिधि सत्रा में का. धीरेन्द्र झा ने कामकाज की रिपोर्ट प्रस्तुत की जिस पर व्यापक चर्चा करने के बाद उसे स्वीकार कर लिया गया. सम्मेलन से कहा गया कि गरीबों की योजना और अधिकार को रेवड़ियां बांटना कहकर प्रधानमंत्री ने गरीबों का मजाक उड़ाया है और इसके लिए वे देश से माफी मांगें. देश में चल रहे मनरेगा मजदूरी घोटाला की जांच हो और हर क्षेत्र में 700 रुपये दैनिक न्यूनतम मजदूरी और सार्वभौमिक पेंशन की व्यवस्था हो. 1 दिसंबर को देश के हर गांव-पंचायत में प्रधानमंत्री का पुतला जलाने और राष्ट्रपति को दलित, आदिवासी और गरीबों-मजदूरों से सम्बंधित 10 सूत्री मांगपत्र की प्रतियां भेजने के कार्यक्रम घोषित किया गया.

सम्मेलन ने पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद को संरक्षक, काश्रीराम चौधरी को सम्मानित अध्यक्ष, बिहार के भाकपा(माले) विधायक का. सत्यदेव राम को अध्यक्ष चुना. का. धीरेन्द्र झा फिर से राष्ट्रीय महासचिव चुने गए. सम्मेलन के द्वारा आइरला की 205 सदस्यीय राष्ट्रीय परिषद और 79 सदस्यीय कार्यकारिणी चुनी गई.

सम्मेलन के दौरान पश्चिम बंग गण संस्कृति परिषद, जन संस्कृति मंच, बिहार, आंध्र प्रदेश व पंजाब के जन गायकों ने अपने गीतों से प्रतिनिधियो के अंदर लगातार जोश भरा.‘हम होंगे कामयाब’के गान व बुलडोजर राज को ध्वस्त करने के जोरदार नारों के साथ प्रतिनिधि सत्र समाप्त हुआ.

सम्मेलन का समापन आजादी आंदोलन के नायक बिरसा मुंडा को उनकी 147वीं जयंती के मौके पर याद करते हुए मार्च निकाल कर प्रस्तावित वन संशोधन विधेयक 2022 की प्रतियां जलाई गयीं.

– दीलीप सिंह

Rural Laborers Association

आइरला के 7वें राष्ट्रीय सम्मेलन द्वारा पारित 9 सूत्री प्रस्ताव

अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के 7वें राष्ट्रीय सम्मेलन ने निम्न प्रस्तावों को पारित किया –
(1). यह सम्मेलन डा. भीमराव अंबेउकर के इस विश्लेषण को स्वीकार करता है कि जाति सिर्फ श्रम का विभाजन ही नहीं बल्कि श्रमिकों का भी विभाजन है और मोदी सरकार के समाज में जातिवाद को बढ़ावा देने वाले रवैये का विरोध करता है. उच्चतम न्यायालय द्वारा उच्च जातियों के लिए 10% इडब्लूएस आरक्षण को स्वीकृति दी गई जिसका मोदी सरकार द्वारा खुले दिल से अनुमोदन किया गया. न्यायालय द्वारा आर्थिक आधार पर दिया गया आरक्षण संविधान की मूल भावना के साथ छेड़छाड़ है जो मूल रूप से समाज के सबसे दबे कुचले एससी, एसटी और ओबीसी को सामाजिक न्याय प्रदान करने के लिए था. यह फैसला सामाजिक रूप से पिछड़े एवं दलितों को 10% आर्थिक कोटे से बाहर करता है. आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन प्रोग्राम नहीं है बल्कि इसके लिए सरकार को रोजगार की व्यवस्था करनी होगी जिसमें मोदी सरकार पूरी तरह से असफल रही है.
(2). आइरला अपने सदस्यों और आम जन को बढ़ती हुई भूखमरी, महंगाई और ग्रामीण ऋणग्रस्तता के खिलाफ पुरजोर तरीके से लड़ने का आह्वान करता है. भारी ऋणग्रस्तता से हुई मौत सरकार की महँगाई और कोरपोरेट पक्षीय नीतियां तथा माइक्रो फायनांस कंपनियों द्वारा ग्रामीण गरीबी को रोक पाने में असफलता को दर्शाता है. ग्लोबल हंगर सूचकांक में भारत की स्थिति सबसे दयनीय देशों की सूची में शामिल है तथा सूचकांक में भारत की लगातार गिरती हुई स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार हमारे ग्रामीण गरीबों के बच्चों की जिंदगियों से खिलवाड़ कर रही है तथा उनको कुपोषण के मुंह में धकेल रही है. बच्चों की बढ़ती हुई मृत्यु दर सरकार के गैर जिम्मेदाराना रवैये का परिणाम है. इस सम्मेलन में शामिल तमाम प्रतिनिधि सरकार के रवैये के प्रति अपना रोष प्रकट करते हैं तथा यह संकल्प लेते हैं कि आम जनों, ग्रामीण गरीबों के लगातार गिरते हुए स्वास्थ्य, कुपोषण और मौत के खिलाफ पुरजोर आवाज बुलंद करेंगे.
(3). बेतहाशा बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ग्रामीण जनता को बुनियादी उपभोग की वस्तुओं में कमी लाने के लिए मजबूर कर रही है. सरकार बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी पर काबू पाने के बजाए कोरपोरेट और उनके सहयोगियों के पक्ष में नीति बनाकर गैरबराबरी के खाई को और गहरी कर रही है. यह सम्मेलन सरकार की कोरपोरेट परस्त नीतियों का पुरजोर विरोध करता है.
(4). टीएमसी सरकार में मंत्री पार्थ चटर्जी ने अपने शिक्षा मंत्री रहते हुए पश्चिम बंगाल में एसएससी और शिक्षक भर्ती में भारी घोटाले किए. हालांकि पार्थ चटर्जी गंभीर घोटाले के आरोप में जेल के सलाखों के पीछे हैं लेकिन मूल बात शिक्षकों के भर्ती से संबंधित है जो कि अभी भी ठंडे बस्ते में पड़ी है. यह सम्मेलन ग्रामीण शिक्षा और शिक्षकों में कटौती किए बगैर पारदर्शी तरीके से योग्य स्टाफ एवं शिक्षकों की नियुक्ति तुरंत दिलाने की लड़ाई के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करता है.
(5). आइरला मोदी सरकार तथा अन्य राज्य सरकारों द्वारा मनरेगा को तोड़-मरोड़ कर कमजोर करने के रवैए जिसमें बजट में कटौती सहित मज़दूरी में कटौती तथा मज़दूरी करने की इच्छा रखने वाले मजदूरों को इस महंगाई और बेरोजगारी के दौर में रोजगार न देने की साजिश का विरोध करता है. मनरेगा को ग्रामीण जनता और गरीबों के जीवन और जीविका के अधिकार के रूप में मान्यता दिलाने के लिए तथा समयबद्ध हर दिन की मजदूरी भुगतान उसी दिन करने, 200 दिनों की मज़दूरी तथा 600 रू. प्रतिदिन की मज़दूरी तय करने के लिए लड़ाई के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करता है तथा मोदी सरकार द्वारा अपने कारपोरेट सहयोगियों की भक्ति तथा ग्रामीण गरीबों के जीविका के अधिकारों से वंचित रखने के रवैये का विरोध करता है.
(6). यह सम्मेलन यह आह्वान करता है कि वह सरकार की गरीब विरोधी मनुवादी नीतियों के खिलाफ ग्रामीण जनता के जीवन, जीविका, वास, आवास, शिक्षा, रोजगार एवं सम्मान के लिए दलितों एवं आदिवासियों की लड़ाई को मज़बूत करेगा.
(7). यह सम्मेलन एक करोड़ से अधिक महिलाओं जो कि सरकारी योजनाओं को लागू करने के काम में लगी हैं और जिनको न्यूनतम मज़दूरी से भी वंचित किया जाता है, को सरकारी कर्मचारी के तौर पर पहचान दिलाने के लिए संघर्ष करने की प्रतिबद्धता व्यक्त करता है. ये महिलायें अधिकतर ग्रामीण परिवेश से आती हैं और हम उनको एकतबद्ध करते हुए उनके आर्थिक अधिकारों को पारित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
(8). आइरला के तमाम प्रतिनिधि संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा एमएसपी की गारंटी के लिए 26 नंवंबर को राजभवन पर धरने के आह्वान का समर्थन करते हुए उनके साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करते हैं. वे इस बात को स्वीकार करते हैं कि सरकार की नीतियां कोरपोरेट फार्मिंग को लाकर ग्रामीण मजदूरों तथा किसानों के अधिकारों और उनके बारगेनिंग शक्ति को कमजोर कर रही है.
(9). सम्मेलन कश्मीर में निर्दाेष प्रवासी मजदूर की मौत से आहत है. ये मौत मोदी और शाह की नीतियों का परिणाम है जिसने कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करके उसे संघ राज्य का दर्जा दिया. मोदी-शाह की इस नीति ने कश्मीर के जनता के बीच आपसी अविश्वास और उग्र वातावरण पैदा करने का काम किया है. यह सम्मेलन प्रवासी मजदूरों की जिंदगियां केंद्र सरकार का राजनीतिक चारा न बने इसके लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करता है. सम्मेलन मांग करता हैं कि प्रवासी मजदूरों के सम्मान, सुरक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा की गारंटी एक केंद्रीय कानून बनाकर की जाए.