वर्ष - 32
अंक - 14
01-04-2023

भाजपाई बुलडोजर की तर्ज पर बिहार के दलितों-गरीबों पर चल रहे बुलडोजर के खिलाफ विगत 28 मार्च 2023, को बिहार की राजधानी पटना में अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के बैनर से हजारों खेत मजदूरों-दलितों-गरीबों ने विधानसभा के समक्ष आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया. गेट पब्लिक लाइब्रेरी से प्रदर्शन निकला और गर्दनीबाग धरनास्थल पर एक बड़ी सभा आयोजित हुई, जिसे खेग्रामस नेताओं के अलावे भाकपा(माले) विधायकों ने भी संबोधित किया.

यह प्रदर्शन दलितों-गरीबों पर चल रहे बुलडोजर पर तत्काल रोक लगाने, दलितों-गरीबों के लिए नया वास-आवास कानून बनाने, सभी बसावटों का मुकम्मल सर्वे करने, बासगीत पर्चाधारियों को दखल कब्जा दिलाने, फर्जी बिजली बिल रद्द करने, बिजली की दर में की गई बढ़ोतरी वापस लेने, मनरेगा में 200 दिन काम व 600 रु. मजदूरी तय करने, कार्यस्थल पर मजदूरी का भुगतान करने, दमन पर रोक लगाने आदि सवालों पर आयोजित था.

प्रदर्शनकारी अपनी मांगों से संबंधित तख्तियां व बैनर के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए, जिसमें बड़ी संख्या महिलाओं की थी. प्रदर्शन में उन हजारों भूमिहीनों ने जमीन से संबंधित अपना आवेदन भी जमा किया जिन्हें उजाड़ने का नोटिस दिया गया है.

प्रदर्शन का नेतृत्व विधायक व खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यदेव राम, महासचिव धीरेंद्र झा, पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद, विधायक व खेग्रामस के राज्य अध्यक्ष बीरेंद्र प्रसाद गुप्ता व सचिव गोपाल रविदास, खेग्रामस के सम्मानित राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीराम चौधरी, कार्यवाहक राज्य अध्यक्ष शत्रुघ्न सहनी सहित आधा दर्जन विधायकों और खेग्रामस नेताओं ने किया. इन नेताओं के अलावा विधायक सुदामा प्रसाद, संदीप सौरभ, अरूण सिंह, मनोज मंजिल भी प्रदर्शन में शामिल थे.

शत्रुघ्न सहनी, जीवछ पासवान, जंगी यादव, नागेश्वर पासवान व कामता सिंह की अध्यक्षता में सभा की शुरूआत हुई. सभा को संबोधित करते हुए विधायक सत्यदेव राम ने कहा कि अडानी-अंबानी की गोद में बैठी मोदी सरकार मनरेगा मजदूरों के साथ लगातार विश्वासघात कर रही है. मनरेगा की राशि बिहार में रोकने की धमकी दी जा रही हैकाफी आंदोलनों के बाद इस सरकार ने मनरेगा मजदूरी में मामूली वृद्धि की है. मोदी सरकार ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार में डूबी हुई है. अडानी घोटाले पर चुप और संसद में चर्चा कराने से भाग खड़ी हुई मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण खेत मजदूर और गरीब भयानक महंगाई व बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं.

खेग्रामस महासचिव धीरेन्द्र झा ने कहा कि बिहार की महागठबंधन सरकार को भाजपाई बुलडोजर की संस्कृति पर रोक लगानी होगी. इस सरकार में भी रजवाड़ा (दरभंगा), बेगूसराय, नवादा, बक्सर, चंपारण, पूर्णिया और राजधानी पटना, आदि तमाम जगहों पर बरसों-बरस से बसे गरीबों को बेदखल किया जा रहा है. सरकार दावा करती है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए एक भी गरीब को नहीं उजाड़ा जाएगा, लेकिन हर जगह उन्हें बेघरबार किया जा रहा है. महागठबंधन सरकार को इससे बाज आना चाहिए. हजारों गरीब आज बिहार के हजारों दलित-गरीब यह कहने आए हैं कि महागठबंधन सरकार पहले सभी बसावटों का मुकम्मल सर्वे कराए और नया वास-आवास कानून बनाए.

वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में बासगीत पर्चाधारियों को कई जगहों पर जमीन पर कब्जा नहीं मिला है, यदि कब्जा है तो पर्चा नहीं है. सरकार को इन विसंगतियों को ठीक करना होगा.

गोपाल रविदास ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा बिजली बिल में 40 % की वृद्धि बेहद जनविरोधी कदम है. इसकी सबसे ज्यादा मार दलित-गरीबों पर पड़ेगी. सरकार गरीबों और कृषि कार्य हेतु मुफ्त बिजली उपलब्ध करवाए. अलग से फर्जी बिल भेजे जा रहे हैं. हम सरकार की इन जनविरोधी नीतियों का कभी भी समर्थन नहीं कर सकते. यदि महागठबंधन सरकार इसे वापस नहीं लेती तो हम सड़कों पर लड़ाई जारी रखेंगे.

पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद ने रजवाड़ाव रोसड़ा में गरीब उजाड़ो अभियान सहित दलित-गरीबों पर दमन की दर्जनों घटनाओं को सामने रखा और कहा कि महागठबंधन सरकार को ऐसी घटनाओं पर विराम लगाना होगा. केवल कह देने भर से भाजपा का विरोध नहीं हो सकता बल्कि उसे गरीबपक्षी रूख भी दिखलाना होगा.

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