वर्ष - 32
अंक - 29
15-07-2023

देश के विभिन्न राज्य बार काउंसिलों द्वारा मनमाने ढंग से ज्यादा फीस वसूलने पर रोक लगाने और तयशुदा रजिस्ट्रेशन फीस 750/रुपये लेने की मांग को लेकर विगत 10 जुलाई 2023 को आइलाज (ऑल इंडिया लाॅयर्स एसोसिएशन फाॅर जस्टिस), बिहार एक प्रतिनिधिमंडल ने पटना हाई कोर्ट की अधिवक्ता और आइलाज की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मंजू शर्मा के नेतृत्व में बिहार राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष एडवोकेट रमाकांत शर्मा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा.

आइलाज की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पटना हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की ज्वाइंट सेक्रेटरी एडवोकेट मंजू शर्मा ने कहा कि देश भर में नए कानून स्नातकों के लिए राज्य बार काउंसिलों द्वारा निषेधात्मक रूप से बहुत अधिक नामांकन शुल्क लिया जाता है. उदाहरण के बतौर बिहार में 21460, तमिलनाडु में 14 100, ओडिसा में 42100, झारखंड में 29000, प. बंगाल में 14000, आंध्र प्रदेश में 12500, दिल्ली में 15450, कर्नाटक में 15900, असम में 17350, उतर प्रदेश में 17800, छत्तीसगढ़ में 28000 और केरल में 20 500 रुपया लिया जा रहा है.

नये कानूनी स्नातकों से इतना अधिक नामांकन शुल्क लेना एडवोकेट एक्ट-1961 की धारा 24(1)(एफ) का उल्लंघन है, जिसमें अनिवार्य रूप से कहा गया हैै कि नामांकन शुल्क केवल 750/रुपये होगा. इतना अधिक नामांकन शुल्क होने से नए कानून स्नातकों पर, खास तौर से ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहने वाले दलित और आदिवासी समुदायों सहित महिलाओं, अल्पसंख्यकों और आर्थिक रूप से कमजोर तबके से आने वाले कानून स्नातकों पर, बड़ा वित्तीय बोझ पड़ता है.

द बार काउंसिल ऑफ केरल बनाम अक्षय एम. सिवन – डब्ल्यूपी (सी) संख्या 3068 ऑफ 2023 (जी) मामले में माननीय केरल हाइकोर्ट ने 15 फरवरी 2023 को अंतरिम आदेश पारित करते निर्देश दिया  है – ‘इस मामले के मद्देनजर बार काउंसिल याचिकाकर्ताओं से सिर्फ 750 रुपया फीस के साथ उनका आवेदन प्राप्त करे.’ इस अंतरिम आदेश के खिलाफ बीसीआई द्वारा की गई अपील में खंडपीठ ने इसका न्यायिक संज्ञान लेते हुए कहा है कि भारत में सभी बार काउंसिलों को एक समान फीस तय करने के लिए एक बैठक बुलाई जाए, केरल बार काउंसिल भी इसमें शामिल हो और  तब तक पूर्व तय राशि ही ली जाए.

उन्होंने कहा कि बार काउंसिल की यह जिम्मेदारी और कर्तव्य है कि इन वंचित तबकों से कानूनी प्रैक्टिस में आने वाले कानून स्नातकों को प्रोत्साहित करने के लिए सक्रिय कदम उठाकर विविधता को बढ़ावा दे और अपनी जिम्मेदारी को पूरी करने के लिए अत्यधिक नामांकन शुल्क लेने के बजाय तयशुदा शुल्क ही कानूनी स्नातकों से ले और अन्य सहायता प्रदान कर सभी छात्रों को अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए समान अवसर मिले, यह सुनिश्चित करे.

आइलाज, बिहार द्वारा बिहार बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को दिए गए इस ज्ञापन पर 134 वकीलों के हस्ताक्षर दर्ज हैं.