वर्ष - 32
अंक - 33
12-08-2023

खेग्रामस (अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा) के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत ग्रामीण मजदूरों द्वारा विगत 5 अगस्त 2023 को बिहार के 100 से ज्यादा प्रखंड कार्यालयों पर देशव्यापी हड़ताल के तहत धरना दिया. यह कार्यक्रम ग्रामीण मजदूरों से संबंधित 5 सूत्री मांगों पर आयोजित हुई.

धरना कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए खेग्रामस नेताओं ने कहा कि 5 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने अपने विगत 9 साल के शासन में सबसे अधिक अडानी-अंबानी जैसे काॅरपोरेटों को फायदा पहुंचाया, लेकिन वह दलित-गरीबों को लाभार्थी कहकर बार-बार अपमानित करती आई है. दलित-गरीब लाभार्थी नहीं है बल्कि वास-आवास, न्यूनतम मजदूरी, पक्का मकान, वृद्धावस्था पेंशन, शिक्षा-स्वास्थ्य, बिजली और सबसे बढ़कर मान-सम्मान उनका अधिकार है. दलित, आदिवासी, गरीब मजदूर, महिलाएं अब इस सरकार को और बर्दाश्त नहीं कर सकते.

उन्होंने बिहार सरकार से गरीबों के घरों को उजाड़ने और शराब के नाम पर गरीबों को गिरफ्तार करने पर रोक लगाने के साथ-साथ हड़ताली आशाओं की मांगों को अविलंब पूरा करने की मांग की. खेग्रामस के कार्यकारी राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी ने कहा कि अकाल के मद्देनजर मनरेगा में तत्काल काम शुरू कराना चाहिए तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि 3000 रुपए मासिक करनी चाहिए.

राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में ये पांच सूत्री मांगें शामिल हैं – (1) संपूर्ण सर्वेक्षण के आधार पर नया आवास कानून, सभी भूमिहीनों को 5 डिसमिल भूमि और पक्के मकान की गारंटी. (2) मनरेगा में 200 दिन काम, 600 रुपये दैनिक मज़दूरी और समय पर भुगतान. (3) सभी बुजुर्गों, विकलांगों और विधवाओं को 3000 रुपये मासिक पेंशन. (4) सभी दलितों, आदिवासियों, मजदूरों और गरीबों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने समेत शिक्षा-स्वास्थ्य और बिजली की गारंटी. (5) दलितों, आदिवासियों और अकलियतों के सम्मान और अधिकार की गारंटी.